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हरिद्वार ( मोक्षं की प्राप्ति) haridwar sapt puri teerth in hindi

उतराखंड राज्य में स्थित हरिद्धार जिला भारत की एक पवित्र तथा धार्मिक नगरी के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हरिद्धार हिन्दू धर्म के सात पवित्र स्थलों में से एक है । हरिद्वार का अर्थ है कि हरि ( ईश्वर) द्वार यानि ईश्वर तक पहुँचने का द्वार। यही वह स्थान है जहाँ पर्वतों से उतरकर पवित्र पावन गंगा मैय्या मैदानी धरती पर प्रथम आगमन होता है । हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार यही वह स्थल है जहाँ अमृत की कुछ बूंदें भूल से घड़े से गिर गई थी । जब खगोलीय पक्षी गरूड़ उस घड़े को समुद्र मंथन के बाद ले जा रहे थे । यह अमृत बूंदें चार स्थानों पर गिरी थी – उज्जैन, हरिद्वार, नासिक ओर प्रयाग आज यही वह स्थान है जहाँ कुंभ मैला लगता है । जिस स्थान पर वह बूंद गिरी थी उसे हर की पौड़ी पर ब्रहम्कुंड माना जाता है इस ब्रहम्कुंड में स्नान करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है । हरिद्वार को चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार भी माना जाता है । चारधाम यात्रा का सुभारंभ यही से होता है । इस धार्मिक नगरी में अनेकों धार्मिक स्थल है। हर की पौड़ी ब्रहम्कुंड को ही हर की पौड़ी कहते है । इस घाट के ब्रहम्कुंड में स्नान करने से मोक्ष  की प्...

खजुराहो का मंदिर (कामुक कलाकृति) kamuk klakirti khujraho

अनेक भसाव-भंगिमाओं का चित्रण करने वाली मूर्तियों से सम्पन्न खजुराहो के जड़ पाषाणों पर चेतनता भी वारी जा सकती है। पाषाण-निर्मित निर्जीव और स्थिर प्रतिमाएँ जिव्हाहीन होकर भी जैसे मन का भाव स्पष्ट कर देती है। ये कठोर पाषाण की मूर्तियाँ इतने कोमल भाव व्यक्त करती है कि मन आश्चर्यं चकित हो जाता है। विविध उपास्य देवी-देवताओं को सुंदरतम एवं भव्य मूर्तियों के साथ ही खजुराहो में अनेक काम-क्रिड़ा और रति-केलि’ का चित्रण करने वाली मूर्तियाँ भी है, जो प्रणयी जीवन की प्रणय-गाथाओं को निः:शव्द मूक स्वर में मुखरित करती है। पाषाणों के माध्यम से कलाकारों ने जैसे समस्त नायिकाभेद का रहस्योद्घाटन कर इन मूर्तियों में मुग्धा, गुप्ता, प्रोषित पतिका, रूपगर्विता, परकीया इत्यादि नायिकाओं का चित्रण किया है। खजुराहो के मंदिरों की मदमाती एवं काम क्रिड़ाओं की अनेक परिभाषाओं को विशद करने वाली मूर्तियों में उद्वेगी एवं कलुषित मन भले ही अश्लीलता देखे किंतु जिन कलाकारों ने इनका निर्माण किया था उनकी भावना निश्चित ही ऐसी नहीं थी, क्योंकि ऐसी मूर्तियाँ उपास्य नहीं उपासक है। उपास्य तो हे देवी-देवता, जो आलों में प्रतिष्ठित हैं...

पीरान कलियर शरीफ - दरगाह करियर शरीफ - कलियर दरगाह का इतिहास पाक

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पीरान कलियर शरीफ उतराखंड के रूडकी से 4किमी तथा हरिद्वार से 20 किमी की दूरी पर स्थित   पीरान  कलियर शरीफ हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल कायम करता है । यहाँ पर हजरत अलाऊद्दीन साबीर साहब की पाक व रूहानी दरगाह है । इस दरगाह का इतिहास काफी पुराना है यहाँ पर सभी धर्मों के जायरीन  जियारत करने आते है । तथा अपनी मन्नतें मागंते है तथा चादर और सीनी (प्रसाद) चढाने के साथ साथ यहाँ भूखों के लिए लंगर भी लगाते है । यहाँ पर साबिर साहब की दरगाह से अलग और भी कई दरगाह है जैसे :-  हजरत इमाम साहब की दरगाह, हजरत किलकिली साहब , नमक वाला पीर, अब्दाल साहब और नौ गजा पीर  कलियर जियारत के लिए यह दरगाह अपना महत्व रखती है। कलियर के बीच से  एक साथ निकलने वाली दो नहरें इसकी शोभा और बढ़ा देती है। हमारे यह लेख भी जरूर पढे:— दरगाह अजमेर शरीफ ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर शरीफ का इतिहास दरगाह साबीर पाक हजरत अलाऊद्दीन साबीर पाक की दरगाह यहाँ की मुख्य दरगाह है । इस दरगाह के दो मुख्य द्वार है तथा बीच में हजरत साबीर साहब का मजार है मजार के अन्दर साबीर साहब की कब्र है । कब्र पर जायरीन चादर व फूल चढाते है । म...

जामा मस्जिद दिल्ली का इतिहास- jama masjid dehli history in hindi

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जामा मस्जिद दिल्ली मुस्लिम समुदाय का एक पवित्र स्थल है । सन् 1656 में निर्मित यह मुग़ल कालीन प्रसिद्ध मस्जिद जिसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ द्वारा कराया गया था । यह पवित्र स्थल भारत की राजधानी दिल्ली के पुरानी दिल्ली इलाके में लाल किले के सामने 500 मीटर की दूरी पर स्थित है । इसके निर्माण में 6 वर्ष का समय लगा था तथा उस समय के 10 लाख रूपये का खर्च आया था । इस मस्जिद को बनाने में सफेद संगमरमर तथा लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है । मस्जिद एक बड़े तथा ऊचे चबूतरे पर बनायी गयी है । मस्जिद के तीन बड़े द्वार है जिनपर लाल पत्थरों  पर बढियां नक्काशी की गई है । जामा मस्जिद दिल्ली के सुंदर दृश्य   उत्तर और दक्षिण द्वार से ही प्रवेश किया जा सकता है । पूर्वी द्वार केवल शुक्रवार को ही खुलता है ।ऐसा माना जाता है की यह बादशाह का प्रवेश द्वार था । नीचे मार्ग से प्रवेश द्वार तक अनेकों सिढियां बनी है । जहाँ बैठकर अच्छा समय बिताया जा सकता है । प्रवेश द्वार से होकर निकलते ही एक लम्बा चौड़ा मैदान है जिसके फर्श पर लाल पत्थर लगा है। जहाँ लगभग 2500 व्यक्ति  इबादत कर सकते है । दिल्ली लाल किले का...

सिद्धबली मंदिर - सिद्धबली मंदिर का इतिहास - sidhbali tample

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सिद्धबली मंदिर उतराखंड के कोटद्वार कस्बे से लगभग 3किलोमीटर की दूरी पर कोटद्वार पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भव्य सिद्धबली मंदिर स्थित है । यह मंदिर खो नदी के किनारे पर स्थित लगभग 40मी ऊचे पहाड़ी टीले पर बना हुआ है । कोटद्वार को गढ़वाल का प्रवेश द्वार भी माना जाता है तथा यह सिद्धबली मंदिर पौड़ी गढ़वाल का प्रसिद्ध देव स्थल है । इसकी स्थापना के बारे में कहा जाता है कि यहाँ तप साधना करने के बाद एक सिद्ध बाबा को हनुमानजी की सिद्धि प्राप्त हुई थी । सिद्ध बाबा ने यहाँ बजरंगबली की एक विशाल पाषाणी प्रतिमा का निर्माण किया था । इससे इसका नाम सिद्धबली पड गया अथार्त् सिद्ध बाबा द्वारा स्थापित बजरंगबली । कहा जाता है कि बाद में ब्रिटिश शासन काल के एक खान मुस्लिम अधिकारी अपने घोड़े से कहीं जा रहे थे जैसे ही वह सिद्धबली के पास पहुँचे वह बेहोश होकर गिर गये उनको स्वपन हुआ की सिद्धबली की समाधि पर मंदिर की स्थापना की जायें। जब वह होश में आये तो उन्होंने आसपास के लोगों को अपने स्वपन के बारे में बताया ।   सिद्धबली मंदिर कोटद्धार के सुंदर दृश्य   पौराणिकता और शक्ति की महत्वता के कारण श्रृदालुओ ने इसे भव्यता...

सोमनाथ मंदिर का इतिहास somnath tample history in hindi

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भारत के गुजरात राज्य में स्थित सोमनाथ मदिर भारत का एक महत्वपूर्ण  मंदिर है । यह मंदिर गुजरात के सोमनाथ जिले के वेरावल समुद्री तट पर बना हुआ है । इस मंदिर की गिनती 12 ज्योतिलिंगों में प्रथम ज्योतिलिंग के स्थान पर होती है । इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वंय चन्द्र देव ने किया था । इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है । प्राचीन कथाओं के अनुसार चन्द्र देव ने श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी । चन्द्र देव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने चन्द्र देव के कष्टों का निवारण किया। अत: चन्द्र देव अथार्त सोम चन्द्र ने कष्टों को दूर करने वाले प्रभु शिव की स्थापना यहाँ करवायी । कहा जाता है कि इसी से इसका नाम सोमनाथ पड गया। सोमनाथ मंदिर गुजरात लोककथाओं के अनुसार यही पर श्रीकृष्ण ने देह त्याग किया था । मान्यता है कि श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे । तब ही शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पदचिन्ह को हिरण की आंख जानकर धोखे में तीर मारा था । तब ही श्रीकृष्ण ने देह त्यागकर यही से वैकुंठ गमन किया। इस स्थान पर बडा ही सुंदर श्रीकृष्ण मंदिर बना हुआ है । ...

बद्रीनाथ धाम - बद्रीनाथ मंदिर चार धाम यात्रा का एक प्रमुख धाम

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उत्तराखण्ड के चमोली जिले मे स्थित व आकाश की बुलंदियो को छूते नर और नारायण पर्वत की गोद मे बसे आदितीर्थ बद्रीनाथ धाम न सिर्फ श्रद्धा व आस्था का अटूट केन्द्र है। बल्कि अद्धितीय प्राकृतिक सौंदर्य से भी पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह हिन्दुओ के चार प्रमुख धामो में से एक है। भगवान नारायण के वास के रूप मे जाना जाने वाला बद्रीनाथ धाम अादि शंकराचार्य की कर्मस्थली रहा है। चारो और पहाडियो से घिरा बद्रीनाथ मंदिर अलंकृत है। नारायण पर्वत के निकट बसा होने के कारण यहा प्राय: भारी हिमशिखाए खिसकती रहती है। परंतु आज तक मंदिर को कोई हानि नही हुई है यह तो कुछ भी नही 2013 मे आयी भारी बाढ आपदा जिसमे बद्रीनाथ शहर तिनके की तरहा बह गया था परंतु इस पवित्र मंदिर का बाल भी बांका नही कर सकी। बद्रीनाथ का इतिहास चारों धाम यात्रा मे बद्रीनाथ धाम को सबसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यहां स्थित भव्य बद्रीनाथ मंदिर का निर्माण 9 वी शताब्दी मे शंकराचार्य द्धारा कराया गया था। यह भव्य मंदिर अलकनंदा नदी के तट पर बना हुआ है। कहा जाता है कि यहां बदरी ( बेर) के घने वन होने के कारण इस क्षेत्र का नाम बदरी वन पडा था। बाद म...

वैष्णो देवी यात्रा माँ वैष्णो देवी की कहानी veshno devi history in hindi

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जम्मू कश्मीर राज्य के कटरा गाँव से 12 किलोमीटर की दूरी पर माता वैष्णो देवी का प्रसिद्ध व भव्य मंदिर है। यह प्रसिद्ध मंदिर उत्तर भारत के सबसे पवित्र व पूजनीय स्थलों में से एक है। यह मंदिर त्रिकुटा हिल्स में पहाड़ी पर लगभग 5200 फीट की ऊचाई पर स्थित है। हसीन वादियों में गुफा में विराजित माता वैष्णो देवी का स्थान हिन्दूओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। कहते है कि पहाड़ों वाली माता भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाली उनके दुखों को हरने वाली उनकी दिक्कतों को खत्म करने वाली शेरा वाली माता आदिशक्ति वैष्णो देवी माता के एक बुलावे पर भक्त माता के माता के दर्शन के लिए दौडे चले आते है। चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है गीत गाते तथा माता के जयकारे लगाते हुए भक्तों की टोलिया माता के दर्शन के लिए कठिन परिश्रम करते हुए माता रानी के दरबार पहुँचते है। आज हम आपको इस पवित्र पावन माँ वैष्णो देवी यात्रा की जानकारी इस पोस्ट में साझा करेंगे। माँ वैष्णो देवी की कथाएँ माँ वैष्णो देवी को लेकर कई कथाएँ प्रचलित है। इनमे से दो सबसे अधिक प्रचलित कथाओं का वर्णन हम यहाँ करेंगे। क्योंकि जहाँ भी हम यात्रा पर जाते है तो वहाँ ...

Akshardham tample history in hindi स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

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पिछली पोस्ट में हमने दिल्ली के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कमल मंदिर   के बारे में जाना और उसकी सैर की थी। इस पोस्ट में हम दिल्ली के ही एक ओर प्रमुख स्थल की सैर करेगें ओर उसके बारे में जानेगें। तो आज हम चलते है दिल्ली के प्रमुख मंदिरों   में से aksherdham tample एक स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर। दिल्ली में यमुना नदी   के पास नोएडा मोड पर बना यह एक सांस्कृतिक मंदिर है। इसीलिए और मंदिरों की तरह यहाँ पूजा-पाठ नहीं होता है। इस मंदिर में कारीगरों की अदभुत कारीगरी और कला का संगम देखने को मिलता है। इस मंदिर को देखने के लिए प्रतिमाह हजारों की संख्या में श्रृद्धालु और पर्यटक देश और विदेश के कोने कोने से दर्शन के लिए यहाँ आते है। (Akshardham tample) अक्षरधाम मंदिर ज्योतिधर्र भगवान स्वामीनारायण   की स्मृति में बनाया गया है। इस प्रसिद्ध मंदिर को बीएपीएस स्वामीनारायण संस्थान   द्वारा बनाया गया है। जिसके प्रमुख पूज्य स्वामी महाराज   है। जिन्होंने अप्रैल 1971 से नवंम्बर 2007 के बीच पांच महाद्वीपो में 713 मंदिरों का निर्माण कर विश्व रिकार्ड बनाया है। (akshardham tample) अक्षरधाम मंदिर परिसर लगभग 100 एकड भूमि म...

शाकुम्भरी देवी सहारनपुर - शाकुम्भरी देवी का इतिहास - शाकुम्भरी माता मंदिर

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प्रिय पाठको पिछली पोस्टो मे हमने भारत के अनेक धार्मिक स्थलो मंदिरो के बारे में विस्तार से जाना और उनकी यात्रा की। इस पोस्ट मे हम भारत के सबसे बडे राज्य उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ शाकुम्भरी देवी देवी की यात्रा करेगे और उसके बारे में जानेगें कि शाकुम्भरी देवी की कहानी शाकुम्भरी देवी का इतिहास, शाकुम्भरी देवी कैसे पहुँचे, शाकुम्भरी देवी का महत्व,  (शाकुम्भरी देवी मंदिर)  आदि की जानकारी हिन्दी मे जानेगें। शाकुम्भरी देवी मंदिर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर नगर से लगभग 25 मील की दूरी पर शिवालिक की पर्वतमालाओ में स्थित यह शांकुम्भरी देवी का मंदिर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठो मे गिना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहा पर सती का शीश गिरा था। इस मंदिर की प्रतिमा के दाई ओर भीमा एंव भ्रामरी तथा बाई ओर शीताक्षी देवी प्रतिष्ठित है। शीताक्षी देवी को शीतला देवी के नाम से भी संबोधित किया जाता है। नवरात्रो मे तथा दुर्गाष्टमी पर यहा मेले भरते है। जिनमें हजारो श्रद्धालुओ की भारी भीड रहती है।   शाकुम्भरी देवी मंदिर शाकुम्भरी देवी की कहानी शांकुम्भरी देवी की कथा धार्मिक पृष...

मनसा देवी मंदिर मनीमाजरा पंचकुला - मनसा देवी पंचकुला - मनसा देवी मंदिर

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श्री मनसा देवी का प्रसिद्ध मंदिर भारत के प्रमुख नगर चंडीगढ़ के समीप मनीमाजरा नामक स्थान पर है मनसि दैवी का य साथान प्रमुख शक्तिपीठ माना गया है। यहा पर सती का मस्तक गिरा था। चैत्र के नवरात्रो में में यहा पर बहुत भारी मेला लगता है इस अवसर पर लाखो की संख्या में श्रद्धालु दर्शन पूजन करने यहा आते है। लगभग सौ एकड में फैला यह मंदिर काफी भव्य व सुन्दर है     मनसा देवी का धार्मिक महत्व     मनसा देवी की कथा इस देवी के बारे में वैसे तो बहुत सी कथाए प्रचलित है परंतु निम्नलिखित कथा प्रामाणिक मानी जाती है। मुगल सम्राट अकबर के समय की बात कि चंडीगढ़ के पास मनीमाजरा नामक स्थान जहा पर अब मनसा देवी का मंदिर स्थित है। यहा एक राजपूत जागुदार के अधीन जागीर थी। अकबर सम्राट जागीदारो व कृषको से लगान के रूप में अन्न वसूल करता था।     मनसा देवी मंदिर के सुंदर दृश्य     एक बार प्रकृति के प्रकोपवश फसल बहुत कम हुई जिससे राजपूत जागीरदार लगान देने में असमर्थ रहे। इसलिए उन्होने अकबर बादशाह से लगान माफ करने की विनती की। यद्यपि मुगल सम्राट अकबर काफी दयालु बादशाह था परंतु उसने उन जागीर...

Naina devi tample bilaspur - नैना देवी मंदिर बिलासपुर - नैना देवी की कथा

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हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर में स्थित प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर (naina devi tample bilaspur) भारत भर में अपने श्रृद्धालुओ में काफी प्रसिद्ध है तथा हिमाचल प्रदेश के धार्मिक स्थलो में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह स्थान पंजाब की सीमा से काफी करीब है। श्री शिवपुराण की कथानुसार सती पार्वती के शव को लेकर जब भगवान शिव तीनो लोको का भ्रमण कर रहे थे तो भगवान विष्णु ने उनका मोह दूर करने के लिए सती के शव को चक्र से काट काटकर गिरा दिया था। ज्वाला देवी मंदिर कांगडा हिमाचल प्रदेश – जोत वाली माता – ज्वाला देवी की कहानी जिन जिन स्थानो पर अंग गिरे वहा वहा शक्ति पीठ माने गए कुल 51 शक्ति पीठो में नौ देवीयो के मंदिरो की भी गणना है। जिनमे ज्वालाजी, चामुण्डा देवी, कालिका देवी, वैष्णो देवी, चिन्तपूर्णी, वज्रेश्वरी देवी, मनसा देवी, शाकुम्भरी देवी, तथा नैना देवी है।  अपनी इस पोस्ट में हम जिस नैना देवी मंदिर ( naina devi tample) मंदिर की बात कर रहे है उसके बारे में कहा जाता है की इस स्थान पर सती के दोनो नेत्र गिरे थे। जिससे इसकी गणना प्रमुख शक्ति पीठो में होती है। यहा मंदिर में भगवती नैना देवी के दर्शनपिण्...

ज्वाला देवी मंदिर कांगडा हिमाचल प्रदेश - जोत वाली माता - ज्वाला देवी की कहानी

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हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में कालीधार पहाडी के बीच श्री ज्वाला देवी जी का प्रसिद्ध मंदिर है। यह धूमा देवी का स्थान है। इसकी मान्यता 51 शक्तिपीठो में सर्वोपरि है। कहा जाता है कि यहां पर भगवती सती की महाजिव्हा गिरी तथा भगवान भगवान शिव उन्मत्त भैरव रूप से स्थित है। इस तीर्थ में देवी के दर्शन ज्योति के रूप में किए जाते है। पर्वत की चटटान से 9 विभिन्न स्थानो पर ज्योति बिना किसी ईंधन के स्वत: प्रज्वलित होती है। इसी कारण देवी को ज्वालाजी के नाम से पुकारा जाता है। और यह स्थान भी ज्वालामुखी नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहा माता को जोत वाली माता भी के नाम से भी जाना जाता है। ज्वाला देवी की कहानी ज्वाला देवी मंदिर की कथा श्री ज्वाला देवी मंदिर के निर्माण के विषय में एक दंतकथा प्रचलित है। जिसके अनुसार सतयुग में सम्राट भूमिचंद ने ऐसा अनुमान किया कि भगवती सती की जिह्वा भगवान विष्णु के धनुष से कटकर हिमालय के धौलीधार पर्वत पर गिरी है। काफी प्रयत्न करने पर भी वह उस स्थान को ढूंढने में असफल रहे। उसके बाद उन्होने नगरकोट- कांगडा में एक छोटा सा मंदिर भगवती सती के नाम से बनवाया। इसके कुछ वर्षो बाद किसी ग्वाले ने...

चिन्तपूर्णी देवी मंदिर ऊना हिमाचल प्रदेश - चिन्तपूर्णी माता की कहानी

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हिमाचल प्रदेश राज्य को देवी भूमी भी कहा जाता है। क्योकि प्राचीन काल से ही यहा की पवित्र धरती पर देवताओ का वास रहा है। इसी पवित्र धरती पर हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में माता चिन्तपूर्णी देवी मंदिर व चिन्तपूर्णी देवी तीर्थ स्थल है। इस पवित्र स्थल की गणना 51 शक्ति पीठो में कि जाती है। श्री शिवपुराण की कथा के अनुसार जब सती पार्वती के शव को लेकर भगवान शिव तीनो लोको का भ्रमण कर रहे थे।तो भगवान विष्णु ने उनका मोह दूर करने के लिए सती के शव को चक्र से काट काटकर गिरा दिया था। जिन जिन स्थानो पर सती के अंग गिरे थे वहा वहा शक्ति पीठ माने गए है। इन 51 शक्ति में माता चिन्तपूर्णी देवी मंदिर के इस स्थान की भी गणना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर सती के चरणो के कुछ अंश गिरे थे। यह छिन्नमस्तिका देवी का स्थान है। माता चिन्तपूर्णी को छिन्नमस्तिका के नाम से भी जाना जाता है। चिन्तपूर्णी अर्थात चिन्ता को पूर्ण करने वाली देवी भी मिना जाता है। चिन्तपूर्णी देवी की धार्मिक पृष्ठभूमि चिन्तपूर्णी देवी का महात्मय इस तीर्थ पर विराजमान माता शक्ति को चिन्तपूर्णी क्यो कहा जाता है? इसे ले कई दंत कथाए व मत प्रच...

वज्रेश्वरी देवी मंदिर नगरकोट धाम कांगडा हिमाचल प्रदेश - कांगडा देवी मंदिर

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हिमाचल प्रदेश के कांगडा में स्थित माता वज्रेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। यह स्थान जनसाधारण में नगरकोट कांगडे वाली देवी के नाम से भी प्रसिद्ध है। यहा दर्शन किए बिना यात्रा सफल नही मानी जाती है। यवनो ने यहा अनेको बार आक्रमण किया फिर भी यह स्थान वज्रेश्वरी देवी के प्रताप से अक्षत रहा। यह स्थान 51 शक्तिपीठो में माना जाता है यहा कांगडा में सती के वक्षस्थल गिरे थे। यह श्री तारा देवी का स्थान है वज्रेश्वरी देवी का धार्मिक महत्व वज्रेश्वरी देवी की कथा कांगडा धाम का इतिहास बहुत प्राचीन माना जाता है। राजा सुशर्मा के नाम पर रखा गया सुशर्मापुर नगर कांगडा का अति प्राचीन नाम है। जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। महमूद गजनवी के आक्रमण के समय इसका नाम नगरकोट था। कोट का अर्थ है किला अर्थात वह नगर जहां किला है। त्रिगर्त प्रदेश कांगडा का महाभारत कालीन नाम है। कांगडा के शाब्दिक अर्थ है – कान+गढ़ अर्थात कान पर बना हुआ किला । पौराणिक कथा के अनुसार यह कान जलंधर दैत्य का है। जलंर नामक दैत्य का कई वर्षो तक देवताओ से घोर युद्ध हुआ । जलंधर महात्मय के अनुसार ही जब विष्णु भगवान और शंकरजी की कपटी माया से परा...

बाबा वैद्यनाथ मंदिर देवधर - श्री वैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग

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शिवपुराण में वर्णित है कि भूतभावन भगवान शंकर प्राणियो के कल्याण के लिए तीर्थ स्थानो में लिंग रूप में वास करते है। जिस जिस पुण्य स्थान में भक्तजनो ने उनकी अर्चना की उसी उसी स्थान में वे आविर्भूत हुए। साथ ही वे ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा के लिए अवस्थित हो गए। यू तो शिवलिंग असंख्य है फिर भी इनमें द्वादश ज्योतिर्लिंग सर्वप्रधान है। केवल शिवपुराण में ही नही रामायण, महाभारत और अन्य अनेक प्राचीन धर्मग्रंथों में भी ज्योतिर्लिंग सम्बंधी वर्णन भरा पडा है उन्ही पवित्र पावन द्वादश ज्योतिर्लिंगो में से है श्री बाबा वैद्यनाथ मंदिर में स्थापित ज्योतिर्लिंग । इसके अलावा यहा 51 शक्तिपीठो में से भी एक शक्तिपीठ है। यहा सती की देह से ह्रदय गिरा था। कुछ लोग इसे असली वैद्यनाथ न मानकर हैदराबाद राज्य के अंतर्गत परली गांव के शिव लिंग को वास्तविक वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मानते है। परंतु द्वादश ज्योतिर्लिंग संबंधी जो वर्णन शिव पुराण में है। उसमे जसीडीह के पास वाले शिवलिंग को ही वास्तविक शिवलिंग माना गया है। जो आज भी भारत के राज्य झारखंड के प्रसिद्ध देवघर नामक स्थान पर अवस्थित है। यह स्थान संथाल परगने में पूर्व रेल...