संदेश

भारत के हिल्स स्टेशन लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दार्जिलिंग के पर्यटन स्थल - दार्जिलिंग पर्यटन के बारे में

चित्र
दार्जिलिंग हिमालय पर्वत की पूर्वोत्तर श्रृंखलाओं में बसा शांतमना दार्जिलिंग शहर पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। लगभग 7000 फुट तक की ऊँची श्रृंखलाओं को काट-काटकर बसा यह ढलवां शहर पर्यटकों के लिए नयनाभिराम दृश्य प्रस्तुत करता है। अत्यंत साफ-सुथरा दार्जिलिंग अपने निश्छल-हृदय निवासियों का प्रतिबिंब है। यह ऐसा शहर है, जिसकी यात्रा के आरंभ-स्थल से ही मन रोमांचित होना शुरू हो जाता है।   दार्जिलिंग टॉय ट्रेन का सुहाना सफर   दार्जिलिंग यात्रा का वह आरंभ-स्थल है न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन, जिसे संक्षेप में ऐनजेपी भी कहते हैं। दार्जिलिंग के लिए ऐनजेपी स्टेशन से रेलगाड़ी पकड़नी होती है। यह गाड़ी खिलौना गाड़ी के नाम से ज्यादा जानी जाती है। इसे 1881 में फ्रैंकलिन प्रेस्टेज द्वारा चलाया गया था। ज्यों-ज्यों हम ऐनजेपी से दार्जिलिंग की ओर बढ़ते हैं, इसका चुंबकीय आकर्षण हमें बरबस अपनी ओर खींचता महसूस होता है। इसी आकर्षण वश हम प्रकृति की गोद में समाते चले जाते हैं। दार्जिलिंग वस्तुत: प्रकृति की गोद है। इस गोद में जो आकर्षण है, जो स्नेह है जो मधुरता है और जो विशालता है, वह यहां की घाटि...

मांउट आबू के पर्यटन स्थल - माउंट आबू दर्शनीय स्थल

चित्र
पश्चिमी राजस्थान जहाँ रेगिस्तान की खान है तो शेष राजस्थान विशेष कर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान की छटा अलग और निराली है । वहाँ सुंदर झीलें और प्राकति के वरदान से भरपूर नजारे हरी भरी वादियों से सजी धजी पहाड़ियों ओर वन्यजीवों जीवों से भरपूर अभयारण्य भी है । मांउटआबू ऐसा ही एक अनुपम दर्शनीय स्थल है । जो कि न केवल डेज़र्ट- स्टेट कहे जाने वाले राजस्थान का इकलौता हिल्स स्टेशन है बल्कि गुजरात के लिए भी हिल्स स्टेशन की कमी को पूरा करने वाला सांझा पर्वतीय स्थल है । दक्षिणी राजस्थान के सरोही जिले में गुजरात की सीमा से सटा यह हिल्स स्टेशन चार हज़ार फीट की उचाई पर बसा हुआ हैं  मांउट आबू कभी राजस्थान की जबरदस्त गर्मी से बदहाल पूर्व राजघरानों के सदस्यों का समर रिसोर्ट हुआ करता था  कलांतर में इसे हिल्स अॉफ विजडम भी कहा जाने लगा क्योंकि इससें जुड़ी कई धार्मिक और समाजिक मान्यताओं ने इसे एक धार्मिक सास्कृतिक और अध्यात्मिक केंद्र के रूप में भी वख्यात है मांउट आबू के पर्यटन स्थल अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के दक्षिणी किनारे पर पसरा यह हिल्स स्टेशन अपने ठंडे मौसम और वनस्पति समृद्धि की वजह से देश भर के पर्यट...

शिमला(सफेद चादर ओढती वादियाँ) शिमला के दर्शनीय स्थल

बर्फ से ढके पहाड़ सुहावनी झीलें, मनभावन हरियाली, सुखद जलवायु ये सब आपको एक साथ एक ही जगह मिल सकता है । हिमाचल प्रदेश में बसा यह सुंदर हिल्स स्टेशन पहाड़ों की रानी के नाम से प्रसिद्ध है “शिमला” । इसकी सुंदरता देश ही नहीं विदेशी पर्यटकों को भी अपनी और आकर्षित करती है । यहाँ बर्फ की सफेद चादर ओढ़े पर्वत और हरियाली पर्यटकों को बहुत भाती है । भारत में नवविवाहित जोडों का हनीमून मनाने के लिए सबसे ज्यादा पसंदीदा पर्यटन स्थल है । यहाँ की जलवायु में ऐसा नशा व जादू है कि जो एक बार यहाँ आता है इस जगह का दिवाना हो जाता है और  बार – बार यहाँ आना चाहता है । यहाँ की खुबसूरती अंग्रेजों के शासन काल में भी प्रसिद्ध थी । इसकी खुबसूरती उन्हें भी आकर्षित करती थी । इसलिए उस समय उन्होंने इसे ग्रीष्मकाल की राजधानी घोषित कर दिया था । अंग्रेज गर्मियों में वहाँ जाकर रहा करते थे इसका प्रमाण आज भी वहाँ देखने को मिलता है। हम बात कर रहे है शिमलां की Naina devi tample bilaspur – नैना देवी मंदिर बिलासपुर – नैना देवी की कथा वहाँ बड़े बड़े भवनों का निर्माण अंग्रेजों के द्वारा किया गया था जो आज भी पर्यटन का मुख्य हिस्सा है...

नैनीताल( सुंदर झीलों का शहर) नैनीताल के दर्शनीय स्थल

चित्र
देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 300किलोमीटर की दूरी पर उतराखंड राज्य के कुमांऊ की पहाडीयोँ के मध्य बसा यह खुबसूरत शहर झीलों के शहर के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह हिमालयन बेल्ट  में ही स्थित है । नैनीताल अपने खुबसूरत परिदृश्यों ओर शांत परिवेश के कारण पर्यटकों के स्वर्ग के रूप में भी जाना जाता है। अपने इस लेख में हम नैनीताल की यात्रा करेगें और नैनीताल के पर्यटन स्थल, नैनीताल के दर्शनीय स्थल, नैनीताल टूरिस्ट पैलेस, नैनीताल भारत आकर्षक स्थल, नैनीताल में घुमने लायक जगह आदि कै साथ साथ नैनीताल के टॉप आकर्षक स्थलो के बारे में विस्तार से जानेगें। औली पर्यटन स्थल – औली में बर्फबारी का आनंद – औली का तापमान   नैनीताल मल्लीताल, नैनी झील   नैनीताल का इतिहास नैनीताल की स्थापिता में कई कथाएँ प्रचलित है । नैंंनीताल को श्री स्कन्द पुराण के मानस खंड में तीन संतों की झील या त्रि-ऋषि-सरोवर के रूप में उल्लेखित किया गया है । तीन संत जिनके नाम – अत्री, पुलस्त्य ओर पुलाह थे अपनी प्यास मिटाने के लिए नैनीता़ल में रूके थे परन्तु उन्हें कहीं भी पानी नहीं मिला तब उन्होंने एक गढ्ढा खोदा ओर मानसरोवर झील से ...

मसूरी (पहाड़ों की रानी) मसूरी टूरिस्ट पैलेस - masoore tourist place

चित्र
उतरांचल के पहाड़ी पर्यटन स्थलों में सबसे पहला नाम मसूरी का आता है। मसूरी का सौंदर्य सैलानियों को इस कदर प्रभावित करता है। कि इसे पर्वतों की रानी भी कहा जाता है। इस जगह को यमुनोत्री और गंगोत्री के धार्मिक केन्द्रों के लिए प्रवेश द्वार भी माना जाता है । मसूर एक प्रकार की झाड़ी होती है जो एक बार इस क्षेत्र में बहुतायत में पाई गई थी इसी से इसका  नाम मसूरी पड़ गया। मसूरी का इतिहास सन् 1825 में केप्टन यंग एक साहसिक ब्रिटिश मिलिट्री अधिकारी और श्री शोर , देहरादून के निवासी और अधिक्षक द्वारा वर्तमान  मसूरी स्थल की खोज से आरम्भ होता है तभी इस छुट्टी पर्यटन स्थल की नीवं पड़ी थी। मसूरी में पर्यटकों को लुभाने वाले अनेक स्थल है। उन्हीं में से कुछ पर प्रकाश डालते है। गनहिल मसूरी की दूसरी सबसे उंची चोटी पर रोपवे द्वारा जाने का आनन्द ले । यहाँ पैदल रास्ते से भी पहुँचा जा सकता है । यह रास्ता माल रोड़ पर कचहरी के निकट से जाता है और यहाँ पहुँचने में लगभग बीस मिनट का समय लगता है । रोपवे की लम्बाई केवल 400 मीटर है । सबसे ज्यादा इसकी सैर में जो रोमांच है वह अविस्मरणीय है । गनहिल से हिमालय पर्वत श्रृंखला...

कुल्लू मनाली के पर्यटन स्थल - कुल्लू मनाली पर्यटक का स्वर्ग

चित्र
कुल्लू मनाली पर्यटन :- अगर आप इस बार मई जून की छुट्टियों में किसी सुंदर हिल्स स्टेशन के भ्रमण की प्लानिंग कर रहे है या अभी अभी शादी के बंधन में बंधे है और अपने पार्टनर के साथ हनीमून प्लानिंग बना रहे है तो हिमाचल राज्य की राजधानी शिमला से लगभग 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुल्लू मनाली आपके लिए छुट्टियां बिताने और हनीमून  सैर के लिए इससे अच्छा स्थान भारत देश में अपको कहीं ओर नहीं मिलेगा । कुल्लू मनाली टूरिस्ट पैलेस   देश विदेश से लाखों पर्यटक यहाँ  प्राकृतिक सौंदर्य , बर्फ की चादर ओढ़ चोटिया ,सेब बागानों के मनोरम दृश्यों के साथ साथ बर्फ पर अठखेलियाँ का आनंद उठाने साल भर यहाँ आते है। ऊटी के पर्यटन स्थल – ऊटी के दर्शनीय स्थलो की सूची – ऊटी टूरिस्ट प्लेस   कुल्लू मनाली के सुंदर दृश्य मनाली समुद्र तल से 1950 मीटर की ऊचाई पर स्थित है । मनाली कुल्लू जिले का एक हिस्सा है ।कुल्लू मनाली में देखने योग्य अनेक व्यू प्वाइन्ट ,धार्मिक स्थल तथा खेल क्रिड़ा का आनन्द लेने के लिए  अनेकों स्थान उपलब्ध है सोलांग घाट कुल्लू मनाली यह सुंदर घाटी व्यास कुंड के पास स्थित है । यह मनाली...

Jammu kashmir tourist place जम्मू कश्मीर टूरिस्ट पैलेस जानकारी हिन्दी में

चित्र
जम्मू कश्मीर भारत के उत्तरी भाग का एक राज्य है । यह भारत की ओर से उत्तर पूर्व में चीन और दक्षिण में हिमाचल प्रदेश और पंजाब राज्य से घिरा है । पश्चिम में यह पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम फ्रंटियर प्रान्त और पंजाब से घिरा है।  इस राज्य के तीन प्रमुख क्षेत्र है ।( Jammu Kashmir tourist place ) जम्मू का तलहटी मैदान, कश्मीर की नीली घाटियां और झीलें तथा लद्दाख का खुबसूरत पहाड़ी इलाका।जम्मू कश्मीर राज्य की दो राजधानियां है । ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर रहती है। और शीतकालीन राजधानी जम्मू रहती है। वैसे तो जम्मू कश्मीर पूरा राज्य ही कुदरती खुबसूरती की अनोखी देन है । परन्तु कश्मीर क्षेत्र वाला हिस्सा अपनी खुबसूरती के लिए विश्व भर में इतना प्रसिद्ध है कि इसके बारे में कहा जाता है कि  धरती पर कहीं स्वर्ग है तो वो यही पर है । यहाँ के खुबसूरत झरने बर्फ की सफेद चादर ओढे ढलान आसमान छूती दूधिया ग्लेशियर चोटियाँ सुंदर झीलों में तैरते रंग-बिरंगे शिकारे व हाऊसबोट मुगलों की वैभवता और शानोशौकत को बयां करते मनभावन बगीचे सैलानियों को यहाँ आने पर मजबूर कर देते है । जम्मू कश्मीर साहसिक गतिविधियों जैसे स्काई...

Utrakhand tourist place देव भूमि उतराखंड के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल

चित्र
उत्तराखण्ड हमारे देश का 27वा नवोदित राज्य है। 9 नवम्बर 2002 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर इस राज्य का गठन किया गया तथा देहरादून शहर को इस राज्य की राजधानी बनाया गया। ( utrakhand tourist place ) हिमालय की गोद में स्थित इस नवगठित राज्य की प्राकृतिक सुन्दरता अनूठी है। ऊँची हिमाच्छादित पर्वत चोटियाँ, घने जंगल, नदी घाटियाँ, कल कल करती नदियाँ, झरने, फूलो से सजी घाटियाँ आदि एक अनुपम दृश्य प्रस्तुत करती है। ऐसा लगता है कि मानो लगता है कि मानो प्रकृति ने इस प्रदेश को बडी फुरसत से सजाया संवारा है। बद्रीनाथ धाम – बद्रीनाथ मंदिर चार धाम यात्रा का एक प्रमुख धाम उत्तराखण्ड को देव भूमी के रूप मे भी जाना जाता है। तथा हिन्दुओ के लिए यह प्रदेश पवित्रतम धरा है। प्रत्येक हिन्दू अपने जीवन काल में जिन चार पवित्र स्थलो के दर्शन करने की अभीलाषा रखता है। वे चारो धाम- बद्रीनाथ, केदारनाथ,गंगोत्री एंव यमुनोत्री इसी प्रदेश में स्थित है। इसके अलावा हरिदूार और ऋषिकेश जैसे पवित्र तीर्थ स्थल भी इसी प्रदेश में स्थित है। इस चार धाम यात्रा मार्ग पर अन्य कई दर्शनीय स्थल है । उत्तरांचल के सुंदर दृश्य Utrakhand tourist place ...

Almorda tourist place उत्तराखण्ड अल्मोडा जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल

चित्र
प्रकृति की गोद में बसा अल्मोडा कुमांऊ का परंपरागत शहर है। अल्मोडा का अपना विशेष ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक महत्व है। ( almorda tourist place ) कभी कुमाऊ की राजधानी रहे अल्मोडा में वर्ष भर सांस्कृतिक उत्सवो की छटा बिखरी रहती है। इस पर 9वी शताब्दी में कत्यूरी वंश के शासको का शासन था। 16वी शताब्दी के मध्य तक इस पर चंद्रवंशीय शासको ने अधिकार कर लिया। अल्मोडा को 1563 में बसाने का स्रेय राजा बालो कल्याण चंद्र को जाता है। 1790 से इस पर गोरखाओ ने शासन किया और 1815में यह अंग्रेजो के आधिपत्य में चला गया। कत्यूरी व चंद्रवंशीय शासको द्धारा बनवाये गए महल व किले आज भी अतीत की यादो को संजोए है। अल्मोडा से हिमाच्छादित शिखरो की लंबी कतार का नयनाभिराम दृश्य दिखाई पडता है। स्लेट की छत वाले पुराने मकान, लालमंडी का किला तथा नरसिंह मंदिर इस नगर की मध्यकालीन विरासते है। अल्मोडा जिला लगभग 3083 वर्ग किलोमीटर मे फैला हुआ है जिसकी सीमाए छ: जिले चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ, चम्पावत, नैनीताल तथा पौडीगढवाल जिलो से मिली हुई है। अल्मोडा जिले में अनेक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।       अल्मोडा जिले के सुं...