संदेश

बिहार पर्यटन लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पटना के पर्यटन स्थल - पटना के दर्शनीय स्थलो की जानकारी हिन्दी में

चित्र
गंगा और सोन नदी के संगम पर बसा पटना शहर इतिहास में रूची रखने वालो के लिए शोध का विषय रहा है। ऐतिहासिक साक्ष्य को समेटे यह शहर हमेशा से ही पर्यटको के आकर्षण का केंद्र रहा है। पटना के पर्यटन स्थल अपनी ऐतिहासिक विरासत के कारण बहुत प्रसिद्ध है। पटना को प्राचीन काल से कुसुमपुर, पाटिलपुत्र, अजीमाबाद, पुष्पकर आदि कई नामो से जाना जाता रहा है। लेकिन इसकी सांस्कृतिक विरासत में कोई कमी नही आई है। ऐतिहासिक दस्तावेज इस बात के साक्षी रहे है। कि चाहे प्राचीन भारतीय संस्कृति को मान्यता देने का सवाल रहा हो या फिर राष्ट्रवादी आंदोलन को बढावा देने का, इस शहर ने हमेशा महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई है। आज के अपने इस लेख में हम इस महत्तवपूर्ण शहर पटना के पर्यटन स्थल, पटना के दर्शनीय स्थल, पटना टूरिस्ट पैलेस, पटना पर्यटन की सैर करेगें और उनके बारे में विस्तार से जानेगें     पटना के पर्यटन स्थलो के सुंदर दृश्य   पटना के पर्यटन स्थल   तख्त हरमिंदर साहिब गुरूद्वारा पटना के पर्यटन स्थल में सिखो का यह पवित्र तीर्थ गुरूद्वारा हरमिंदर साहिब सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहा लाखो श्रृद्धालु प्रति वर्ष...

दरभंगा का इतिहास - दरभंगा के दर्शनीय स्थल

चित्र
दरभंगा, जिसे ‘मिथिलाचल का दिल’ भी कहा जाता है, अपने समृद्ध अतीत और प्रसिद्ध दरभंगा राज के लिए जाना जाता है। अपनी सांस्कृतिक और शाब्दिक परंपराओं के लिए जाना जाता है, यह शहर ‘बिहार की सांस्कृतिक राजधानी’ के रूप में भी लोकप्रिय है। उत्तर बिहार में मिथिलाचल के बहुत दिल में स्थित है, दरभंगा बिहार राज्य के सबसे पुराने शहरों और जिलों में से एक है। दरभंगा नगर निगम है और तेजी से विकास कर रहा है। दरभंगा का इतिहास लगभग रामायण और महाभारत की अवधि तक है और इन प्रसिद्ध भारतीय पौराणिक महाकाव्यों में भी चित्रित किया गया है। दरभंगा ने कई ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, जिन्होंने इसे बदल दिया और इस सांस्कृतिक रूप से विविध क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास के लिए कई अध्याय जोड़े     दरभंगा का नाम कैसे पडा दरभंगा का नाम मुख्य शहर और मुख्यालय, दरभंगा के नाम पर रखा गया है, जिसे दरभंगी खान द्वारा स्थापित किया गया था। दरभंगा के नाम की उत्पत्ति के बारे इतिहासकारो में कई राय हैं। कुछ लोग मानते हैं कि दरभंगा “द्वारबंगा” से ली गई है जो दो शब्द, “द्वार” (गेट) और “...

मुजफ्फरपुर के दर्शनीय स्थल - मुजफ्फरपुर के टॉप 8 पर्यटन, धार्मिक, ऐतिहासिक स्थल

चित्र
मुजफ्फरपुर बिहार राज्य का ऐतिहासिक व सांस्कृतिक जिला है, जो अपने लीची के बागों के साम्राज्य के रूप में जाना जाता है, और बिहार के प्रमुख शहरों में से भी एक है, मुजफ्फरपुर, गण्डक और बागमती नदियों के किनारे पर स्थित है। मुजफ्फरपुर का नाम ब्रिटिश शासन के अधीन एक राजस्व अधिकारी मुजफ्फर खान के नाम पर है। मुज़फ़्फ़रपुर जिला, जो तिरहुत विभाजन का एक हिस्सा है और जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। और उत्तरी बिहार में सबसे बड़ा वाणिज्यिक और शैक्षिक केंद्रों में से भी एक है,जिले की मूल निवासी भाषा विज्जिका है। हालांकि, हिंदी को व्यापक रूप से सरकारी प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल की जाती है। मुजफ्फरपुर के दर्शनीय स्थल, मुजफ्फरपुर के पर्यटन स्थलो की सूची काफी लंबी है। यदि आप मुजफ्फरपुर की सैर, मुजफ्फरपुर भ्रमण, मुजफ्फरपुर की यात्रा की प्लानिंग कर रहे है, तो हमारा यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। क्योंकि हम यहां आपको मुजफ्फरपुर के टॉप 8 आकर्षक स्थलों के बारे मे विस्तार से बताने जा रहे है। मुजफ्फरपुर कई खूबसूरत और ऐतिहासिक मंदिरों का गृह है, मुजफ्फरपुर उन सभी पर्यटकों के लिए जो आध्यात्मिक और धार्मिक सां...

राजगीर यात्रा - राजगीर टूरिस्ट पैलेस - राजगीर कुंड में स्नान के फायदे

चित्र
यदि आप पटना और गया का भ्रमण कर रहे तो आप राजगीर यात्रा पर भी जा सकते है। यह पटना से 100 किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व में सुंदर पहाडियो के बीच बसा एक खुबसूरत शहर व धार्मिक स्थल है। राजगीर बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध तीर्थ है। इसके अलावा यहा हिन्दू धर्म और जैन धर्म का भी इस स्थान पर विषेश महत्व है। राजगीर गया से 70 किलोमीटर तथा बोधगया से 80 किलोमीटर की दूरी पर है। यहा बौद्ध धर्म के धार्मिक स्थलो और राजगीर कुंड में स्नान करने लाखो श्रृद्धालु राजगीर यात्रा पर आते है। यह स्थान बिहार के नालंदा जिले स्थित है।   राजगीर का महत्व प्राचीन काल से ही राजगीर विभिन्न नामो से जाना जाता रहा है। रामायण काल में इसका नाम  “वासुमती”  था। जैन ग्रंथो में इसे  “कुशागपुर”  नाम दिया गया। जबकि बौद्ध ग्रंथो में इसका उल्लेख  “राजगृह”  के नाम से किया गया।   राजगीर की भिन्न भिन्न कालो में प्रासंगिकता भी अलग अलग रही है। कहते है कि सम्राट जरासंध ने अनेक प्रतिद्वूद्वी राजाओ को युद्ध के दौरान परास्त करके राजगीर के दुर्ग में नजरबंद किया था। भीम ने 28 दिनो के अनवरतमल्ल युद्ध के बाद जरा...

गया दर्शन बौद्ध गया तीर्थ - बौद्ध गया दर्शनीय स्थल

चित्र
बिहार की राजधानी पटना से 178 किलोमीटर दूर फल्गु नदी के किनारे बसा यह शहर मगध साम्राज्य का अभिन्न अंग रहा है। गया दर्शन ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से गया का विशेष महत्व रहा है। गया की खूबसूरती का राज इसके चारो ओर फैली पर्वत श्रृंखला है। जो गया को गया पर्यटन, के रूप में पेश करती है। और गया के मंदिर व गया की ऐतिहासिक इमारते गया तीर्थ के रूप में पेश करती है। यदि आप गया यात्रा, गया भ्रमण, गया की सैर की योजना बना रहे है तो हमारी यह पोस्ट आपके लिए सुविधाजनक हो सकती है। अपने इस लेख में हम आपको गया दर्शन, गया के पर्यटन स्थल, गया दर्शनीय स्थल, गया के मंदिर, गया तीर्थ स्थल, गया के आकर्षक स्थलो की जानकारी हिंदी में उपलब्ध करा रहे है। गया और बौद्ध गया दो अलग अलग नगर है। गया और बौद्ध गया के बीच की दूरी लगभग 11 किलोमीटर है। सबसे पहले हम गया के दर्शनीय स्थलो के बारे में जानेगें और गया दर्शन करेगें। गया दर्शन – गया दर्शनीय स्थल   अहिल्याबाई का मंदिर इस मंदिर का निर्माण सन 1781 में महारानी अहिल्याबाई ने करवाया था। यह मंदिर “प्रेतशिला”  पर्वत पर बना है। कहते है कि इसी मंदिर की वजह स...

पटना साहिब गुरूद्वारा का इतिहास - पटना साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी

चित्र
बिहार की राजधानी पटना शहर एक धार्मिक और ऐतिहासिक शहर है। यह शहर सिख और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक तीर्थ स्थल भी है। पटना साहिब को श्री गुरू नानक देव जी, श्री गुरू तेगबहादुर साहिब जी तथा श्री गुरू गोविन्द सिंह जी ने अपने पावन चरणों से पवित्र किया है। धार्मिक दृष्टि से पटना सिटी का महत्व, सिखों के दसवें व अंतिम गुरु, श्री गोविन्द सिंह जी के जन्म स्थान के रूप में माना जाता है। गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज का जन्म इसी पवित्र भूमि पर हुआ था। गुरु गोविन्द सिंह जी के इसी जन्म स्थान पर वर्तमान में एक विशाल भव्य गुरूद्वारा श्री हरमंदिर साहिब है। जिसे तख्त श्री हरमंदिर साहिब के नाम से जाना जाता है। यह सिख धर्म का दूसरा महान तख्त है। पटना शहर बिहार प्रान्त की राजधानी है, और यह शहर शिक्षा तथा साहित्य का केंद्र भी रहा है। साथ ही यह शहर श्री गुरू गोविन्द सिंह जी की बाल लीलाओं से भरा हुआ है। और यहां अनेक गुरूद्वारे है। अपनी पटना साहिब यात्रा के अंतर्गत हम पटना साहिब का इतिहास, पटना साहिब इन हिन्दी, पटना साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी, पटना साहिब की जानकारी, पटना साहिब गुरूद्वारा रूम बुकिंग, तख्त श्र...

मखदूम कुंड दरगाह का इतिहास राजगीर बिहार

चित्र
मखदूम कुंड बिहार के राजगीर का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां एक पवित्र सरोवर है जिसे राजगीर का मखदूम कुंड के नाम से जाना जाता है। यह कुंड विपुलांचल पर्वत की तलहटी में है। इसी के तट पर मखदूम शाह का मजार है। बताया जाता है कि मखदूम कुंड का प्राचीन नाम श्रृंगी ऋषि कुंड है। यहाँ हजरत मखदूम शाह बाबा की इबादत गाह और मखदूम शाह बाबा की दरगाह है। आपका पूरा नाम मखदूम-उल-मुल्क शेख शरीफुद्दीन याइया मनीरी रहम तुल्ला इलै है। आपका जन्म पटना जिले के मनशरीफ में हुआ था। मखदूम कुंड दरगाह राजगीर बिहार   आप आज से साढ़े सात सौ साल पहले फकीरी बुजुर्गी में यहाँ आये तो यहाँ चारों ओर जंगल पहाड़ था। कोई आबादी नहीं थी। आपने पहाड़ की चट्टान पर बैठकर इबादत करनी आरम्भ कर दी। मखदूम शाह से पहले यहाँ दो जादूगर थे एक का नाम रावा और दूसरे का नाम रत्ता था। दोनों बहुत बड़े जादूगर थे। उन्होंने मखदूम शाह को जादू से मारना चाहा ताकि आप यह जगह छोड़कर चले जायें लेकिन आप अल्लाह वाले थे, अपनी इबादत में मशगूल रहे। जादूगरों ने मारने के लिए पहले एक शेर आजमाया लेकिन आपने उस शेर को मार दिया। ऊपर में शेर के पंजे और खून का निशान है। वह...

महाबोधि मंदिर का इतिहास और परिचय

चित्र
भारत के  बिहार राज्य में बोध गया एक बौद्ध तीर्थ नगरी है। वैसे तो यहां अनेक बौद्ध मंदिर और तीर्थ है परंतु यहां का मुख्य मंदिर महाबोधि मंदिर है। जिसके बारे में हम अपने इस लेख में विस्तार से जानेंगे।  बौद्ध गया जहां महाबोधि मंदिर है पहले इस जगह का नाम उरुविल्व था और यहाँ बहुत बड़ा जंगल था और एक निरंजना नाम की नदी थी। उसी नदी का नाम अब फलगु नदी है। जब महात्मा बुद्ध को कठोर तपस्या से शान्ति नहीं मिली तब उन्होंने निरंजना नदी में स्नान किया और सुजाता नाम की स्त्री के दिये हुए भोजन (खीर) से तृप्त होकर बोधि वृक्ष (पीपल का वृक्ष) के नीचे ध्यान मग्न होकर बैठ गये और यहीं पर उनको दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ और इस स्थान का नाम उरुविल्व से बोध गया पड़ गया। यहाँ पर सम्राट अशोक ने एक विशाल मंदिर बनवाया। इसी मंदिर का नाम महाबोधि मंदिर हुआ।   महाबोधि मंदिर का इतिहास   यह 2300 वर्ष पुराना मंदिर है और बोध गया का मुख्य मंदिर है। पश्चिम की ओर बोधि वृक्ष है जिसे लोग सतयुग के वृक्ष की शाखा कहते हैं। इसी वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध ने 39 दिन निराहार पूर्व मुख बैठकर तपस्या की थी और सर्वोच्च दिव्य ...