मल्हराराव होलकर का जीवन परिचय
होल्कर राज्य के मूल संस्थापक मल्हारराव होलकर का उदय महाराष्ट्र साम्राज्य के प्रकाशमान दिनों में ही हुआ था। नवयुवक मल्हारराव होलकर ने महान पेशवा बाजीराव से महाराष्ट्र धर्म का पवित्र मन्त्र सीखा था। इसका यह प्रभाव था कि होल्कर राजवंश हमेशा से स्वतन्त्रता और आत्म-सम्मान आदि उच्च गुणों का पुजारी रहा है। अगर सूक्ष्म दृष्टि से होल्कर राज्य के सच्चे इतिहास का अवलोकन किया जाये तो यह प्रतीत हुए बिना न रहेगा कि भारत वर्ष के इतिहास में इस गौरवशाली राजवंश ने स्वतन्त्रता, स्वाधीनता ओर राष्ट्र सम्मान की रक्षा के लिये जो जो महान कार्य किये थे, वैसे कार्य बहुत कम राजवंशों ने किये होंगे। राष्ट्रीय दृष्टि से, साम्राज्य संगठन की दृष्टि से, तथा समय सूचकता और राजनीतिज्ञता की दृष्टि से, होल्कर राजवंश का इतिहास प्रायः अद्वितीय है। हम तो बड़े अभिमान के साथ यों कहगें कि मल्हारराव होलकर, तुकोजीराव प्रथम, प्रात:स्मरणीया अहिल्याबाई तथा तुकोजीराव द्वितीय-इनके नाम भारतवर्ष के इतिहास के पन्नों को तब तक शोभायमान करते रहेंगे जब तक कि संसार में हिन्दू वीरत्व, स्वदेश भक्ति, राज्य-संगठन का अद्भुत ससामर्थ्य तथा उच्च श्रेण...