संदेश

भारत के पर्यटन स्थल लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गोवा( बीच पर मस्ती) goa tourist place information in hindi

चित्र
भारत का गोवा राज्य अपने खुबसुरत समुद्र के किनारों और मशहूर स्थापत्य के लिए जाना जाता है ।गोवा क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे छोटा राज्य है ।यहाँ लगभग 450 सालों तक पुर्तगालियों का शासन था 1961 में यह भारतीय प्रशासन को सौपा गया । उसके बाद इसे राज्य घोषित किया गया यहाँ की राजधानी पणजी है। गोवा का समुद्री तट लगभग 101 किलोमीटर लम्बा है । यहाँ ज्यादातर युवा सैलानियों का तांता लगा रहता है यह कहना गलत नहीं होगा कि यहाँ की बीच मस्ती , नाइट बीच पार्टी ,एडवेंचर स्पोर्ट्स, बार कैफे सनबाथ आदि का रंगीन माहौल युवाओं को खुब पसंद आता है। यह हनीमून का प्रसिद्ध स्पाट भी है । नव विवाहित जोड़े अधितकतर यहाँ आते है । गोवा में लगभग छोटे बड़े 40 बीच है गोवा बीच पर मस्ती   अगोंडा बीच:- यह बीच साउथ गोवा में स्थित है । यह बहुत लम्बा एंव चौड़ा बीच है । शहर के शोरगुल से दूर यहाँ आने से मन शांत हो जाता है । यहाँ अधिक भीड़भाड़ नहीं होती रिलैक्स करने का यह उत्तम स्थान है । यहाँ बीच के किनारे हटस है ।  जहाँ आप अपने साथी के साथ रूक सकते है तथा प्राकृतिक सौंदर्य का आनन्द ले सकते है।   गोवा के सुंदर बीच ...

जोधपुर ( ब्लू नगरी) jodhpur blue city - जोधपुर का इतिहास

चित्र
जोधपुर का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे मन में वहाँ की एतिहासिक इमारतों वैभवशाली महलों पुराने घरों और प्राचीन मंदिरों का ख्याल मन में आता है ।जोधपुर के राज्य राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है । वर्ष भर चमकते सूर्य के कारण इसे सूर्य नगरी भी कहा जाता है ।यहाँ स्थित मेहरानगढ़ किले को घेरे हुए हजारों नीले मकानों के कारण इसे ब्लू नगरी के नाम से भी पुकारा जाता है । वर्ष भर देश विदेश से हजारों की संख्या में पर्यटक यहाँ आते है जोधपुर का इतिहास मेहरानगढ़ का किला:- विश्व भर में प्रसिद्ध यह किला 150 मीटर ऊची पहाड़ी पर स्थित है । यह भव्य इमारत लगभग 5  किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैली हुई है ।किले के अन्दर भी कई भव्य महल है जैसे:- मोती महल , सुख महल, फूल महल, शीश महल, , सिलेह खाना, दौलत खाना आदि आदि । यहाँ की अद्भुत नक्काशीदार किवाड़ जालीदार खिड़कियाँ और प्रेरित करने वाले नाम पर्यटकों को खुब पसंद आते है इन महलों में भारतीय राजवंशों के साजो समान का विम्स्यकारी संग्रह भी है । इसके अतिरिक्त पालकियां हाथियों के हौदे विभिन्न  शैलियों के लघु चित्र संगीत वाघा राजशाही पोशाकें व फर्नीचर का आश्चर्य जनक संग्...

लाल किला किसने बनवाया - लाल किले का इतिहास और तथ्य

चित्र
यमुना नदी के तट पर भारत की प्राचीन वैभवशाली नगरी दिल्ली में मुगल बादशाद शाहजहां ने अपने राजमहल के रूप में दिल्ली के लाल किले का निर्माण कराया था। इससे पूर्व आगरे का प्रसिद्ध किला मुगल वंशीय बादशाहों द्वारा निर्मित हो चुका था परन्तु शाहजहां ने दिल्‍ली नगरी में मुख्य रूप से निवास करने की दृष्टि से सन 1638 में लाल किले के निर्माण का कार्य प्रारम्भ कराया। लाल किले के निर्माण का कार्य लगभग 10 वर्षों तक चलता रहा। राज्य भवनों के वैभव और सौंदर्य की दृष्टि से यह किला भारत में विशेष ख्याति पाता है। जिस समय मुगल साम्राज्य अपने यौवन के उभार में था उस समय शहंशाह जैसे भव्य भवनों के निर्माता ने इस दुर्ग में सुन्दर से सुन्दर भवन बनवाने में अपने शक्ति लगाई। लाल किले के सुंदर दृश्य   कहा जाता है कि जब मुगल सम्राट शाहजहां का मन  आगरा में न लगा उस समय उसने यमुना तट दिल्ली में शाहजहांनाबाद नाम से एक नगरी बसाई ओर वहीं पर लाल किला नाम से एक विशाल राजमहल का निर्माण कराया। उस राज महल को सुरक्षित करने के लिये उसके चारों ओर लाल पत्थर की सुदृढ़ प्राचीर बनवाई गई और इस प्रकार इस राज महल ने भारत की राजधानी...

हुमायूं का मकबरा मुगलों का कब्रिस्तान humanyu tomb history in hindi

चित्र
भारत की राजधानी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन तथा  हजरत निजामुद्दीन दरगाह  के करीब मथुरा रोड़ के निकट  हुमायूं का मकबरा  स्थित है। यह मुग़ल कालीन इमारत दिल्ली पर्यटन के क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध है। तथा यहाँ के पर्यटन स्थलों में अपना अलग ही मुकाम रखती है। इस खुबसूरत इमारत को देखने के लिए दुनिया भर के इतिहास प्रेमी, वास्तुकला प्रेमी तथा पर्यटक आते है। इसकी प्रसिद्धि और महत्वता का अंदाजा यही से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति  बराक ओबामा  भी इस भव्य इमारत के दर्शन के लिए यहाँ आ चुके है। तथा 1993 में यूनेस्को  द्वारा इस इमारत को  विश्व धरोहर  घोषित किया गया है। हुमायूं का मकबरा हुमायूं की मृत्यु सन् 1556  में हुई थी। और  हाजी बेगम के नाम से जानी जाने वाली उनकी विधवा पत्नी  हमीदा बानू बेगम  ने 9 वर्ष बाद सन् 1565 में इस मकबरे का निर्माण शुरू करवाया था। 1572 में हुमायूँ का मकबरा बनकर तैयार हुआ था। एक फारसी वास्तुकार  मिराक मिर्जा ग्यासुद्दीन बेग  को इस मकबरे के निर्माण के लिए हाजी बेगम ने नियुक्त कि...

कुतुबमीनार का इतिहास Qutab minar history in hindi

चित्र
पिछली पोस्ट में हमने  हुमायूँ के मकबरे  की सैर की थी। आज हम एशिया की सबसे ऊंची मीनार की सैर करेंगे। जो भारत के अनेक शासकों के शासन की गवाही देती है। जिस कों यूनेस्को द्वारा 1983 में विश्व धरोहर घोषित किया गया है जिसे देखने के लिए भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने कोने से पर्यटक भारत की राजधानी दिल्ली आते है। अब तो आप समझ गये होगें कि हम किस मीनार की बात कर रहे है। जी हाँ। ठीक समझें हम बात कर रहे है। दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र के मेहरौली में स्थित  कुतुबमीनार की। जिसकों दिल्ली के अंतिम हिन्दू शासक की पराजय के तत्काल बाद   दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक  द्वारा  1193 में इसकी नीव रखी गई थी। कुतुबमीनार के सुंदर दृश्य कुतुबमीनार की स्थापत्य विवाद पूर्ण है। कुछ लोगों का मानना है कि भारत में मुस्लिम शासन की शुरुआत में विजय दिवस के रूप में देखते है। तथा कुछ लोगों का मानना है की मस्जिद के मुअज्ज़िन के अजान देने के लिए कराया गया था। जिससे अजान की आवाज़ दूर तक जा सके। कुतुबुद्दीन ऐबक  अपने शासन काल में कुतुबमीनार के आधार का ही निर्माण करा पाया था। कुतुबुद्दीन ऐबक के बाद उसके दामाद एवं उ...

Lotus tample history in hindi कमल मंदिर एशिया का एक मात्र बहाई मंदिर

चित्र
भारत की राजधानी के नेहरू प्लेस के पास स्थित एक बहाई उपासना स्थल है। यह उपासना स्थल हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आदि सभी धर्मों के एकता का प्रतीक के रूप जाना व माना जाता है। यहाँ सभी धर्मों के लोग उपासना करते है।( lotus Temple ) इसी कारण इसे एक अलग पहचान मिली हुई है। इस स्थल के अंदर न कोई मूर्ति है और न ही किसी प्रकार का कोई धार्मिक कर्म कांड किया जाता है। यहाँ लोग सिर्फ भगवान को मन में याद करके तथा धार्मिक ग्रन्थों को पढकर पूजा करते है। यह उपासना स्थल मूर्ति पूजा में नहीं अपितु ईश्वर की उपस्थिति में विशवास करता है। विश्व में इस तरह के अभी तक कुल सात ऐसे उपासना स्थल है। एशिया का यह एक मात्र पहला उपासना स्थल है। अब तो आप समझ गये होगें हम किस स्थल की बात कर रहे है। जी हाँ। हम बात कर रहे है।  Lotus tample (कमल मंदिर) अथवा बहाई मंदिर  की। पिछली पोस्ट में हमने  कुतुबमीनार के बारे में जाना और उसकी सैर की थी इस पोस्ट में हम Lotus tample (कमल मंदिर) के बारे में जानेगें और सैर करें कमल मंदिर के सुंदर दृश्य इसकी गिनती दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में की जाती है तथा 20 शताब्दी में नयी दिल्ली में पर्...

Charminar history in hindi- चारमीनार का इतिहास

चित्र
प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने दिल्ली के प्रसिद्ध स्थल स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के बारे में जाना और उसकी सैर की थी। इस पोस्ट में हम आपको तेलंगाना राज्य के प्रसिद्ध शहर हेदराबाद ले चलेंगे। हेदराबाद शहर किस लिए प्रसिद्ध है यह तो आप सभी अच्छी तरह जानते होगें। हेदराबाद शहर वहाँ स्थित चारमीनार के लिए जाना जाता है। तो इस पोस्ट में हम हेदराबाद में स्थित चारमीनार( charminar history in hindi ) मस्जिद स्मारक की सैर करेगें और जानेगें कि:- चारमीनार को किसने बनवाया चारमीनार का निर्माण क्यों किया गया चारमीनार का निर्माण कब हुआ चारमीनार की कहानी चारमीनार को बनाने में किस मटेरियल का प्रयोग किया गया चारमीनार का इतिहास चारमीनार किस वास्तुशैली में बनाया गया है चारमीनार की ऊचाँई क्या है Charminar history in hindi दिल्ली लाल किले का इतिहास जामा मस्जिद दिल्ली का इतिहास कुतुबमीनार का इतिहास Charminar चारमीनार कहा स्थित है यह इमारत भारत के तेलंगाना राज्य के प्रसिद्ध शहर हेदराबाद में स्थित है। इस इमारत का निर्माण मुसी नदी के पूर्वी तट पर किया गया है। चारमीनार के निर्माण के बाद उसके चारों ओर हेदराबाद शहर ...

रूद्रपुर के पर्यटन स्थल - रूद्रपुर दर्शनीय स्थलों

चित्र
प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी श्री उधमसिंह के नाम पर इस जिले का नामकरण किया गया है। श्री उधमसिंह ने जनरल डायर की हत्या कर जलियांवाला बाग कांड का प्रतिशोध लिया था। उधमसिंह नगर ( रूद्रपुर ) जिले की स्थापना अक्टूबर 1995 में हुई थी जब इसे नैनीताल जिले से पृथक किया गया था। उधमसिंह नगर जिले का क्षेत्रफल 2908 वर्ग किलोमीटर है। तथा उधमसिंह नगर जिले का जिला मुख्यालय रूद्रपुर roodarpur शहर है। उधमसिंह नगर जिले को कुमांऊ की पहाडियो का मुख्यद्धार भी कहा जाता है। उधमसिंह नगर जिले मे तीन सब डिविजन ( रूद्रपूर, काशीपुर, खटिमा ) तथा चार तहसीले ( काशीपुर, किच्छा, खटिमा, और सितारगंज ) है। यह खुशहाल जिला अपनी ऊपजाऊ भूमि और कौमी एकता के लिए प्रसिद है। उधमसिंह नगर जिले को उत्तरांचल का औधोगिक जिला भी कहा जाता है। इस जिले के अंदर कई बडी बडी औधोगिक ईकाईयां है। जो इस जिले को सृमिद्ध बनाती है। Tourist place near roodarpur (रूद्रपुर) यह प्रसिद नगर उधमसिंह नगर जिले का मुख्यालय है। यहा पर कई बडेे बडे होटल रेस्तरां है। यहां यात्रीयो के ठहरने की उचित व्यवस्था है। इसके अलावा आप यहां के मुख्य बाजारो और प्रमुख मॉलो मे शॉपि...

Amer fort jaipur आमेर का किला जयपुर का इतिहास हिन्दी में

चित्र
पिछली पोस्टो मे हमने अपने जयपुर टूर के अंतर्गत जल महल की सैर की थी। और उसके बारे में विस्तार से जाना था। इस पोस्ट में हम जयपुर की ही एक और राजपूताना विरासत व सांसकृतिक धरोहर आमेर दुर्ग amer fort jaipur की सैर करेगें और उसके बारे में विस्तार से जानेगें। यह सांसकृतिक धरोहर राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर के उपनगर आमेर में स्थित है। जयपुर शहर से आमेर की दूरी 11 किलोमीटर के लगभग है। आमेर पर कछवाहा समुदाय के राजपूत शासको का शासन था। तथा उनकी राजधानी भी थी। जिसको बाद में राजा सवाई जयसिंह द्धारा स्थानांतरित कर जयपुर कर दिया गया था। आमेर का किला के सुंदर दृश्य आमेर का किला अरावली पर्वत श्रृखला पर चील के टिले नामक पहाडी की चोटी पर स्थित है। पहाडी के नीचे की ओर माओटा झील है। जिसके पानी मे किले का सुंदर प्रतिबिंब दिखाई पडता है। इस भव्य अजय आमेर का किला का निर्माण राजा मान सिंह प्रथम ने सन् 1592 ई° मे करवाया था उसके बाद राजा सवाई जय सिहं द्धारा इसमें कई योगदान व सुधार कार्य किये गये है। जल महल जयपुर Amer fort jaupur history in hindi Jaipur tourist place amer fort jaipur आमेर के किले के मुख्य प्रवे...

Punjab tourist place पंजाब के दर्शनीय स्थल

चित्र
पंजाब भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग मे स्थित है। पंजाब शब्द पारसी भाषा के दो शब्दो “पंज” और “आब” से बना है। पंज का तात्पर्य पाँच और आब का तात्पर्य पानी अथार्त नदियां। यानि पाँच नदियाँ- रावी, झेलम, सतलुज, व्यास और चेनाब के मध्य बसा पंजाब प्रांत अत्यंत ही हरा-भरा और ऊपजाऊ क्षेत्र है।  (punjab tourist place) पंजाब राज्य का निर्माण 1947 मे भारत और पाकिस्तान के विभाजन के पश्चात हुआ। पुराने राज्य को पंजाब और हरियाणा के रूप में विभाजन के पश्चात 1 नवम्बर 1966 को पंजाब राज्य का गठन हुआ। उत्तर पश्चिमी दिशा मे स्थित होने के कारण बाहरी राजाओ- पारसी, मौर्य, पार्थियन, कुषाणो और मुगलो के आक्रमणो का डटकर मुकाबला करता आया है। गुरूनानक जी पहले गुरू थे जिन्हौने सिक्ख धर्म की स्थापना शांति, भाई-चारा,सदभावना और सहनशीलता के उद्देश्य से कि तथा नौ गुरूओ ने इसका पालन किया। पटियाला के महाराजा रणजीत सिंह जी का पंजाब के लिए अति विशिषट योगदान रहा है। पंजाब सदैव से ही पर्यटको को अपने विभिन्न सिक्ख तीर्थ स्थलो ( गुरूद्धारे) विशाल किलो, ऐतिहासिक भवनो, त्यौहारो, भंगडा नृत्य, विशिष्ट भोजन और अतिथि सत्कार मे दक्ष विचारो...

लखनऊ के दर्शनीय स्थल - लखनऊ पर्यटन स्थल - लखनऊ टूरिस्ट प्लेस इन हिन्दी

चित्र
गोमती नदी के किनारे बसा तथा भारत के सबसे बडे राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ दुनिया भर में अपनी तहजीब के लिए जाना जाता है। अपने मेहमानो की खातिरदारी में यहां के लोग कोई कसर नही छोडते। उससे भी कही अच्छा है यहां की भाषा और बात करने की तहजीब व अदब। इसलिए इस ऐतिहासिक शहर को ” शहर-ए-अदब” भी कहा जाता है। अपनी इस पोस्ट मे हम इस सुंदर व ऐतिहासिक शहर की यात्रा के दौरान लखनऊ के दर्शनीय स्थल व ऐतिहासिक इमारतो की सैर करेगे । अवध के नवाबो के शासन काल में इस शहर ने विशेष ख्याति प्राप्त की थी। इस नगर में कला संस्कृति और सभ्यता का अनूठा संगम देखने को मिलता है। जो लखनऊ के पर्यटन में चार चाँद लगता है। लखनऊ के दर्शनीय स्थल लखनऊ के प्रमुख पर्यटन स्थल बडा इमामबाडा ( भुलभुलैया ) लखनऊ के दर्शनीय स्थल में बडा इमाबाडा वास्तुकला का अदभुत नमूना है। विश्व भर में प्रसिद्ध इस इमारत का निर्माण नवाब आसिफुददौला ने सन 1784 में करवाया था। यह इमारत बाहर से एक किले की भाँति दिखाई पडती है। इस इमारत मे एक विशाल कमरा है। जिसकी लम्बाई 49.4 मीटर चौडाई 16.2 मीटर तथा ऊचाई 15 मीटर है। इस कमरे की खास बात यह है कि इस कमरे के एक ...

इलाहाबाद का इतिहास - गंगा यमुना सरस्वती संगम - इलाहाबाद का महा कुम्भ मेला

चित्र
इलाहाबाद  उत्तर प्रदेश का प्राचीन शहर है। यह प्राचीन शहर गंगा यमुना सरस्वती नदियो के संगम के लिए जाना जाता है। यह  खुबसूरत शहर इसी संगम तट पर बसा है। इलाहाबाद का इतिहास इस बहुत पुराना और प्राचीन है। इलाहाबाद संगम तट पर बसे इस शहर का प्राचीन नाम प्रयाग था। प्रयाग की भौगोलिक स्थिति का जिक्र हवेनसांग ने 644 ईस्वी के यात्रा वृत्तांत में किया है। ऐसा कहा जाता है कि उस समय प्रयाग संगम के अति निकट बसा हुआ था। अत: गंगा की बाढ के कारण प्रयाग नगर नष्ट होकर बहुत छोटा हो गया था। 1583 ई० के आसपास बादशाह अकबर ने यहां एक नया नगर बसाया जिसका नाम उसने अल्लाहाबबाद रखा जिसको बाद मे इलाहाबाद के नाम से जाना जाने लगा। संगम पर अकबर ने एक किले का भी निर्माण करवाया ।   सन 1801 में इलाहाबाद पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया तब उनहोने किले के पश्चिम मे यमुना तट पर अपनी छावनियां बनाई। सन 1857 के गदर मे अंग्रेजों द्धारा बनाई गयी छावनिया नष्ट कर दी गई तथा इलाहाबाद को बहुत क्षति पहुची। गदर के बाद 1858 मे इलाहाबाद को उत्तर पश्चिम प्रांतो की राजधानी बनाया गया । भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इलाहाबाद चश्मदीद ...