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सोमनाथ मंदिर का इतिहास somnath tample history in hindi

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भारत के गुजरात राज्य में स्थित सोमनाथ मदिर भारत का एक महत्वपूर्ण  मंदिर है । यह मंदिर गुजरात के सोमनाथ जिले के वेरावल समुद्री तट पर बना हुआ है । इस मंदिर की गिनती 12 ज्योतिलिंगों में प्रथम ज्योतिलिंग के स्थान पर होती है । इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वंय चन्द्र देव ने किया था । इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है । प्राचीन कथाओं के अनुसार चन्द्र देव ने श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी । चन्द्र देव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने चन्द्र देव के कष्टों का निवारण किया। अत: चन्द्र देव अथार्त सोम चन्द्र ने कष्टों को दूर करने वाले प्रभु शिव की स्थापना यहाँ करवायी । कहा जाता है कि इसी से इसका नाम सोमनाथ पड गया। सोमनाथ मंदिर गुजरात लोककथाओं के अनुसार यही पर श्रीकृष्ण ने देह त्याग किया था । मान्यता है कि श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे । तब ही शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पदचिन्ह को हिरण की आंख जानकर धोखे में तीर मारा था । तब ही श्रीकृष्ण ने देह त्यागकर यही से वैकुंठ गमन किया। इस स्थान पर बडा ही सुंदर श्रीकृष्ण मंदिर बना हुआ है । ...

बाबा वैद्यनाथ मंदिर देवधर - श्री वैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग

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शिवपुराण में वर्णित है कि भूतभावन भगवान शंकर प्राणियो के कल्याण के लिए तीर्थ स्थानो में लिंग रूप में वास करते है। जिस जिस पुण्य स्थान में भक्तजनो ने उनकी अर्चना की उसी उसी स्थान में वे आविर्भूत हुए। साथ ही वे ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा के लिए अवस्थित हो गए। यू तो शिवलिंग असंख्य है फिर भी इनमें द्वादश ज्योतिर्लिंग सर्वप्रधान है। केवल शिवपुराण में ही नही रामायण, महाभारत और अन्य अनेक प्राचीन धर्मग्रंथों में भी ज्योतिर्लिंग सम्बंधी वर्णन भरा पडा है उन्ही पवित्र पावन द्वादश ज्योतिर्लिंगो में से है श्री बाबा वैद्यनाथ मंदिर में स्थापित ज्योतिर्लिंग । इसके अलावा यहा 51 शक्तिपीठो में से भी एक शक्तिपीठ है। यहा सती की देह से ह्रदय गिरा था। कुछ लोग इसे असली वैद्यनाथ न मानकर हैदराबाद राज्य के अंतर्गत परली गांव के शिव लिंग को वास्तविक वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मानते है। परंतु द्वादश ज्योतिर्लिंग संबंधी जो वर्णन शिव पुराण में है। उसमे जसीडीह के पास वाले शिवलिंग को ही वास्तविक शिवलिंग माना गया है। जो आज भी भारत के राज्य झारखंड के प्रसिद्ध देवघर नामक स्थान पर अवस्थित है। यह स्थान संथाल परगने में पूर्व रेल...

नागेश्वर महादेव - नागेश्वर मंदिर की 10 रोचक जानकारीयां

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नागेश्वर महादेव भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगो में से एक है। यह एक पवित्र तीर्थ है। नागेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग कहा है। यह एक विवादग्रस्त प्रश्न है। असली नागेश्वर महादेव कहा है? कुछ लोगो का मानना है की असली नागेश्वर ज्योतिर्लिंग हैदराबाद राज्य में है कुछ लोगो का मानना है कि असली ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में है। परंतु शिवपुराण को देखने से पता चलता है कि वह ज्योतिर्लिंग गोमती – द्वारका से बेट -द्वारका को जाते समय कोई बारहा तेरहा मील पूर्वोत्तर की ओर रास्ते में है। यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारका से 15 किलोमीटर दूर एकांत में है। शिव महापुराण के अनुसार इसी को असली नागेश्वर ज्योतिर्लिंग माना गया। ज्यादातर लोगो का मानना भी यही है। इसीलिए ज्यादातर श्रृद्धालु यहा आते है। और अपनी इस पोस्ट में हम अपने पाठको को गुजरात के द्वारका के समीप स्थित इस ज्योतिर्लिंग यात्रा के बारे में बताएगें।   नागेश्वर महादेव मंदिर के सुंदर दृश्य नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का महात्मय आइये सबसे पहले हम जानतै है कि नागेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग का महत्व क्या है? इस ज्योतिर्लिंग का नाम नागेश है। जिसे नागेश्वर के नाम से ...

घुश्मेश्वर नाथ धाम - घुश्मेश्वर नाथ मंदिर - घुश्मेश्वर ज्योर्तिलिंग

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शिवपुराण में वर्णित है कि भूतभावन भगवान शंकर प्राणियो के कल्याण के लिए तीर्थ स्थानो में लिंग रूप में वास करते है। जिस जिस पुण्य स्थान पर उनके सच्चे परम भक्तो ने उनकी पूजा – अर्चना अपने सच्चे मन से कि उसी उसी स्थान में भगवान शंकर आविर्भूत हुए और साथ ही वे ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा के लिए वहा अवस्थित हो गए। यूं तो भारत में शिवलिंग असंख्य है, फिरभी इनमें द्वादश ज्योर्तिंलिग सर्वप्रधान है। इन द्वादश ज्योतिर्लिंगो का वर्णन शिवपुराण में ही नही मिलता है बल्कि रामायण, महाभारत, के साथ  साथ अन्य अनेक प्राचीन धर्म ग्रंथों में भी द्वादश ज्योतिर्लिंगो से सम्बंधित वर्णन भरा पडा है। अपनी इस पोस्ट में हम जिस घुश्मेश्वर नाथ धाम या घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में जानेगें यह घुश्मेश्वर नाथ मंदिर महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद जिले में वेरूल नामक गांव के पास शिवालय नामक स्थान पर स्थित है। घुश्मेश्वर नाथ धाम के सुंदर दृश्य घुश्मेश्वर नाथ धाम – घुश्मेश्वर नाथ मंदिर – घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग घुश्मेश्वर को दो अलग नामो “घुसृणेश्वर” और “घृष्णेश्वर” के नाम से भी जाना ...

ओंकारेश्वर दर्शन - ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग खंडवा मध्य प्रदेश

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ओंकारेश्वर दर्शन:- प्रिय पाठको हमने अपनी द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा के अंतर्गत  पिछली कुछ पोस्टो में द्वादश ज्योतिर्लिंलोंं में से :- सोमनाथ ज्योतिर्लिंग त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास केदारनाथ धाम का इतिहास काशी विश्वनाथ धाम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भीमशंकर ज्योतिर्लिंग वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा की और उनके बारे में विस्तार से जाना अपनी इस पोस्ट में हम ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेगे और उसके बारे में विस्तार से जानेगें। ओंकारेश्वर दर्शन के अंतर्गत हम जानेगें कि :- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कहां स्थित है? ओंकारेश्वर मंदिर कहां है? ओंकारेश्वर का धार्मिक महत्व क्या है? ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी क्या है? ओंकारेश्वर मंदिर का निर्माण किसने कराया? ओंकारेश्वर दर्शन कैसे करे? ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग किस नदी के तट पर स्थित है? ओंकारेश्वर की आरती का टाइम टेबल क्या है? ओंकारेश्वर के दर्शनीय स्थल कौन कौन से है? ओंकारेश्वर का इतिहास? ओंकारेश्वर किस लिए प्रसिद्ध है? ओंकारेश्वर के घाट कौन कौन से है? ओ...

त्रयम्बकेश्वर महादेव - त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग - त्रियम्बकेश्वर टेम्पल नासिक

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त्रयम्बकेश्वर महादेव मंदिर महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। नासिक से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर त्रयम्बकेश्वर बस्ती है। इसी बस्ती में पहाड की तलहटी में गोदावरी नदी के तट पर त्रयम्बकेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है। इस मंदिर में स्थित शिव लिंग की गणना भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगो में होती है। इस दिव्य ज्योतिर्लिंग के नाम पर ही इस बस्ती का नाम भी त्रयम्बकेश्वर पडा। यहा के निकटवर्ती ब्रह्मागिरी नामक पर्वत से पूत सलिला गोदावरी निकलती है। जो मान्यता गंगा जी की उत्तर भारत में है। वैसी ही मान्यता गोदावरी की दक्षिण भारत में है। जैसे गंगा जी को धरती पर लाने का श्रेय  भगीरथ जी  को जाता है। वैसे ही गोदावरी को धरती पर लाने का श्रेय  ऋषि श्रेष्ठ गौतम जी को जाता है। जिन्होनें घोर तपस्या कर  गोदावरी  को जनकल्याण के लिए धरती पर जल धारा के रूप में प्रवाह कराया। प्रिय पाठको अपने इस लेख हम भगवान शिव के उन पवित्र दिव्य 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग के इस पवित्र पावन स्नान की यात्रा करेगें। और उसके बारे में विस्तार से जानेगें। अपनी द्वादश ज्योतिर्लिगं यात्रा के अंतर्गत ...