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ओडिशा के त्योहार - ओडिशा के टॉप 10 फेस्टिवल

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हमारे प्रिय भारत के हर हिस्से में आपको उत्सव और त्योहारो की भरमार मिलेगी। ओडिशा के त्योहार जीवंत संस्कृति, समृद्ध रीति-रिवाज, उत्सव की भावना, उत्तम भोजन से भरी प्लेट, नृत्य, रंगो से सर्बोर आखिरकार, यह सब भारत के त्योहारो का ही हिस्सा है जिसके लिए भारत जाना जाता है। ओडिशा भारत का एक ऐसा हिस्सा जहां त्यौहार लोगों के खुशहाल जीवन विभिन्न अंग है। ओडिशा में विभिन्न धर्मों और जनजातियों की भूमि होने के नाते, यहा आपको पूरे साल लोगों द्वारा मनाए जाने वाले कई त्यौहार मिलेंगे। उड़ीसा के त्योहार वैसे तो सभी मजेदार होते है। किन्तु हम आपको अपने इस लेख में ओडिशा के त्योहार, ओडिशा के उत्सव, ओडिशा के मेले, ओडिशा के महोत्सव और ओडिशा के  “टॉप10” फेस्टिवल के बारे में विस्तार से बताएगें।   ओडिशा के त्योहार   ओडिशा के टॉप 10 फेस्टिवल       ओडिशा के त्योहारो के सुंदर दृश्य         Odisha festivals information in hindi   दुर्गा पुजा ओडिशा के त्योहार में दुर्गा पूजा उड़ीसा का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है। जो उडीसा के पूरे राज्य में शानदार रूप से मनाया ...

ओडिशा का खाना - ओडिशा का भोजन - ओडिशा की टॉप15 डिश

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पूर्वी तट पर स्थित, ओडिशा, जिसे ‘भारत की आत्मा’ के नाम से जाना जाता है, भारतीय संस्कृतियों, वास्तुशिल्प प्रतिभा और आश्चर्यजनक प्राकृतिक परिदृश्य का एक सुंदर संयोजन है। ओडिशा का खाना के बारे में लोगों को पता नहीं है कि ओडिशा अपने स्थानीय व्यंजनों की तुलना में समान रूप से समृद्ध है। ओडिशा को उपयुक्त रूप से ‘पूर्वी भारत का गोवा’भी कहा जाता है, ओडिशा का खाना अपने स्वाद और पौष्टिकता के लिए भी जाना जाता है। ओडिशा में खाना बनाने की सरल लेकिन विशिष्ट शैली की अपनी अलग पहचान है। अगर आप ओडिशा की यात्रा पर जा रहे है तो वहा के इस लजीज स्वाद का आनंद जरूर लेना चाहेगें। इसलिए हम आपको ओडिशा का खाना, ओडिशा का भोजन, ओडिशा का खान पान ओडिशा की टॉप 15 डिश के बारे में नीचे विस्तार से बता रहै है। जिनका स्वाद लिए बिना ओडिशा भ्रमण की यात्रा का आनंद अधूरा सा रहता है।   ओडिशा का खाना – ओडिशा का भोजन   ओडिशा की टॉप 15 डिश     ओडिशा की फेमस डिशो के सुंदर दृश्य     Odisha food recipes in hindi खिचडी खिचडी, जैसा कि हम इसे अन्य राज्यों में कहते हैं, एक आसान ले...

ओडिशा का पहनावा - ओडिशा की वेष-भूषा

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ओडिशा बंगाल की सुंदर खाड़ी,में भारत का एक पूर्वी भारतीय राज्य है। और यह पश्चिम बंगाल से घिरा हुआ है। ओडिशा का पहनावा इस भारतीय राज्य की एक अनोखी संस्कृति है। उड़ीसा के लोग बहुत धार्मिक हैं। इस बात का अंदाजा यहा उनके रूप औ वेषभूषा से लगाया जा सकता है। ओडिशा का पहनावा उनके रूप और संस्कृति पर एकदम फिट बैठता है। ओडिशा पांरपरिक पहनावा एक प्राचीन संस्कृति और शास्त्रीय नृत्य के लिए भी लोकप्रिय है।     ओडिशा का पहनावा   ओडिशा की वेषभूषा   ओडिशा का पहनावा   महिलाओ के लिए ओडिशा का पारंम्परिक परिधान:– ओडिशा का इतिहास बहुत बहुत प्राचीन है। यहां तक ​​कि कलिंग जगह जो सम्राट अशोक के पूरे जीवन रुख बदलने के लिए किया जानी जाती है। वह इसी राज्य का हिस्सा है। यहां लोगों को उनकी परंपरा और संस्कृति विरासत मे मिलीहो जिस को संरक्षित रखने के लिए यहा के लोग आज भी प्रतिबद्ध है ओडिशा में महिलाओ का मुख्य पहनावा साडी है। जो भारतीय संस्कृति का भी हिस्सा है। ओडिसा की महिलाओ की सुंदरता में भी चार चांद लगाता है। ओडिशा कटकी साड़ी और संबलपुरी साड़ी के लिए प्रसिद्ध है। इन साड़ीयो के डिजाइन बह...

कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास - कोणार्क सूर्य मंदिर का रहस्य

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कोणार्क’ दो शब्द ‘कोना’ और ‘अर्का’ का संयोजन है। ‘कोना’ का अर्थ है ‘कॉर्नर’ और ‘अर्का’ का मतलब ‘सूर्य’ है, इसलिए जब यह जोड़ता है तो यह ‘कोने का सूर्य’ बन जाता है। कोणार्क सूर्य मंदिर पुरी के उत्तर पूर्वी कोने पर स्थित है और सूर्य भगवान को समर्पित है। कोणार्क को अर्का खेत्र भी कहा जाता है।   कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास 13 वीं शताब्दी के मध्य में निर्मित कोणार्क का सूर्य मंदिर कलात्मक भव्यता और इंजीनियरिंग निपुणता की एक बड़ी धारणा है। गंगा राजवंश के महान शासक राजा नरसिम्हादेव प्रथम ने इस मंदिर को 12 साल (1243-1255 ईसवी) की अवधि के भीतर 1200 कारीगरों की मदद से बनाया था। कोणार्क सूर्य मंदिर को 24 पहियों पर घुड़सवार एक भव्य सजाए गए रथ के रूप में डिजाइन किया गया था, प्रत्येक व्यास में लगभग 10 फीट, और 7 शक्तिशाली घोड़ों द्वारा खींचा गया था। यह समझना वास्तव में मुश्किल है, यह विशाल मंदिर, जिसमें से प्रत्येक इंच की जगह इतनी आश्चर्यजनक रूप से नक्काशीदार थी,रोचक बात यह है कि इतनी कम समय में यह पूरी हो ...

उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं और इतिहास

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उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं  उड़ीसा में भुवनेश्वर के पास पुरी जिले में है। यह स्थान बालाजी बाजीराव और हैदराबाद के निजाम सलाबतजंग के मध्य 1759 ई० में हुए युद्ध का कारण भी प्रसिद्ध था। इस युद्ध में निजाम की हार हुई थी। फलस्वरूप उसे मराठों को 62 लाख रु सालाना आमदनी वाली भूमि तथा असीरगढ़, दौलताबाद, बीजापुर, अहमद नगर और बुरहानपुर के किले देने पड़े थे।   उदयगिरि और खंडगिरि गुफाओं का इतिहास   उदयगिरि की पहाड़ियों में कुछ गुफ़ाएं पाई गई हैं, जिनमें दूसरी शताब्दी ई०पू० में बौद्ध भिक्षु रहा करते थे। इनमें स्वर्ग हाथी, विजय, चीता, गणेश और रानी गुफा अधिक प्रसिद्ध हैं। यहाँ प्राप्त एक शिलालेख से चंद्रगुप्त द्वितीय के प्रशासन और उसके मंत्रियों के बारे में जानकारी मिली है। इसमें उल्लेख है कि राजा के कई मंत्री होते थे और उनमें विष्णु, वराह देव तथा गंगा-यमुना की मूर्तियाँ मिलने के साथ-साथ हाथी गुफा में एक शिलालेख भी मिला है, जिससे कलिंग के राजा खारवेल (24 ई०प०) के बारे में जानकारी मिलती है। इस लेख से पता चलता है कि खारवेल चेदि वंश का तीसरा सम्राट था।   उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं  ...

कटक का इतिहास और दर्शनीय स्थल

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कटक  उड़ीसा राज्य का एक प्रमुख शहर है। महानदी और कोठजोड़ी नदियों से घिरे कटक शहर की स्थापना 989 ई० में कलिंग राजा नृपकेशरी ने की थी। कटक से आशय छावनी है। कटक के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि 15वीं-16वीं शताब्दी में यहाँ गजपति वंश का शासन था। बहमनी शासक निजामुद्दीन अहमद के काल में गजपति शासक कपिलेश्वर बहमनी साम्राज्य पर आक्रमण करके बीदर तक बढ़ आया था और उसने हर्जाने की भी माँग की थीं।   कटक का इतिहास 1470 में उसकी मृत्यु के बाद मंगल राय एवं हंबीर के मध्य उत्तराधिकार का युद्ध छिड़ गया। हंबीर बहमनी शासक के प्रधान मंत्री महमूद गावाँ द्वारा मलिक हसन बहरी के नेतृत्व में भेजी गई सैनिक सहायता से कुछ समय के लिए सत्तारूढ़ हो गया, परंतु शीघ्र ही मंगल राय पुरुषोत्तम गजपति नाम से शासक बन गया। सन् 1474-75 ई० में पुरुषोत्तम गजपति ने बहमनी साम्राज्य के अधीनस्थ कोंडविदु के विद्रोहियों का साथ देकर बहमनी साम्राज्य के गोदावरी तक के इलाके पर अधिकार कर लिया, परंतु बहमनी सुल्तान मुहम्मद तृतीय ने उसे हरा दिया। सन् 1477-78 में उसने बहमनी साम्राज्य के अधीनस्थ कोंडपल्ली के विद्रोही भीमराज का पु...

भुवनेश्वर के दर्शनीय स्थल - भुवनेश्वर के पर्यटन स्थल

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भुवनेश्वर 1950 से आधुनिक उड़ीसा की राजधानी है। प्राचीन काल में भुवनेश्वर केसरी वंश के शैव शासकों की राजधानी थी। भुवनेश्वर शहर नागर शैली में बने मंदिरों का विशेष केंद्र है। ऐसा कहा जाता है कि इसकी बिंदुसागर झील के चारों ओर कभी 7000 मंदिर हुआ करते थे। अब भी यहाँ सैंकड़ों मंदिर देखे जा सकते हैं। इसी कारण इसे मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। इनमें अनंत वासुदेव मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर परशुरामेश्वर मंदिर, राम मंदिर, आठवीं शताब्दी का विठठल मंदिर, दसवीं शताब्दी का मुक्तेश्वर मंदिर और ग्यारहवीं शताब्दी में बने ब्रहमेश्वर, राजा रानी, लिंगराज तथा केदार गौरी मंदिर प्रसिद्ध हैं। ग्रेनाइट पत्थर से तराशा गया 44.8 मी ऊँचा शिवलिंग यहाँ का विशेष आकर्षण है।     भुवनेश्वर के प्रमुख दर्शनीय मंदिर लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर शहर का सबसे पुराना और सबसे बड़ा मंदिर, लिंगराज मंदिर त्रिभुवनेश्वर (तीन लोकों के भगवान) को समर्पित है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा जाजति केशरी ने करवाया था, लेकिन इसका जिक्र प्राचीन हिंदू ग्रंथ ‘ब्रह्म पुराण’ में किया गया है। कलिंग शैली की वास्तुकला के अ...

जगन्नाथ पुरी धाम की यात्रा - जगन्नाथ पुरी का महत्व और प्रसिद्ध मंदिर

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श्री जगन्नाथ पुरी धाम चारों दिशाओं के चार पावन धामों मे से एक है। ऐसी मान्यता है कि बदरीनाथ धाम सतयुग का और उत्तर दिशा का धाम है। रामेश्वरम धाम त्रेतायुग और दक्षिण दिशा का धाम है। द्वारका धाम द्वापरयुग और पश्चिम दिशा का धाम है। तथा जगन्नाथ पुरी धाम कलियुग और पूर्व दिशा का पावन धाम है। आइए जानते है जगन्नाथ जी का धाम कहा है? जगन्नाथ पुरी धाम उडीसा राज्य के पुरी शहर मेें स्थित है। यह शहर भगवान जगन्नाथ के मंदिर के लिए जाना जाता है। यह एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। अपने इस लेख में हम जगन्नाथ पुरी धाम की यात्रा करेंगे और उसके बारें में विस्तार से जानेंगे कुम्भलगढ़ का इतिहास – कुम्भलगढ़ का किला जहां वर्तमान मे जगन्नाथ पुरी धाम है, पहले यहां नीलाचल नामक पर्वत था, और नीलमाधव भगवान की मूर्ति इस पर्वत पर थी। इस मूर्ति की देवता लोग आराधना करते थे। माना जाता है कि यह पर्वत भूमि मे समा गया था और भगवान की वह मूर्ति देवता अपने देवलोक ले गए थे, परंतु इस क्षेत्र को उन्हीं की स्मृति में अब भी नीलाचल कहते है। पातालेश्वर मंदिर कालपी धाम जालौन उत्तर प्रदेश श्री जगन्नाथ पुरी के मंदिर के शिखर पर लगा चक्र  नी...

अरकू घाटी या अरकू वैली हरी भरी घाटिया व सुंदर झरने

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भारत के  उड़ीसा के विशाखापटनम जिले में पूर्वि घाटो मे बसा एक बेहद ही खुबसूरत हिल्स स्टेशन है – अरकू घाटी ! इस सुंदर घाटी को अरकू वैली के नाम से भी जाना जाता है। अरकू घाटी की समुन्द्र तल से बऊचाई लगभग 3100 फीट है। यहां के सुंदर बगीचे हरी भरी घाटिया व मनोहर झरने अरकू वैली को शोभायुक्त हिल्स स्टेशन बनाते है। यह घाटी दो तरफ से घने जंगलों से घीरी हुई है। यहां तक़रीबन 19 तरह की जनजातियां है। यहां का डिसमा लोकनृत्य बहुत ही मनोरंजक है। अरकू घाटी के दर्शनीय स्थल छापराई वाटर फाल:-  अरकू घाटी से छापराई जलप्रपात की दूरी 14 किलोमीटर के लगभग है। यह खुबसूरत फाल अरकू का सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह सुंदर स्थल अपने नाम के अनुसार ही पर्यटको में अपनी एक अलग छाप छोडता है।   अरकू घाटी के सुंदर दृश्य दुदुमा जलप्रपात :-  अरकू से लगभग 82 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह एक खुबसूरत स्थल है। यह माचखंड विधुत परियोजना के स्थल पर है। अरकू घाटी और उसके आस पास के पर्यटन स्थल आंध्र प्रदेश के पर्यटन स्थल – आंध्र प्रदेश के हिल्स स्टेशन – आंध्र प्रदेश के दर्शनीय स्थल बोर्रा गुफाएं :-  ये गुफाएं लग...