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झेलम का युद्ध - सिंकदर और पोरस का युद्ध व इतिहास

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झेलम का युद्ध भारतीय इतिहास का बड़ा ही भीषण युद्ध रहा है। झेलम की यह लडा़ई इतिहास के महान सम्राट विश्व विजेता सिकंदर और पोरस के बीच हुई थी। इस भीषण संग्राम को सिकंदर और पोरस का युद्ध तथा हाईडेस्पीज (Hydaspes) का युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। इस भीषण संग्राम में हजारों सैनिक मारे गए थे। अपने इस लेख में हम अपने कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जो अक्सर हम इस लडा़ई के संबंध में जानना चाहते है उनके जवाब तथा सिकंदर और पोरस की कहानी और युद्ध को विस्तार पूर्वक जानेगें। बीजापुर का युद्ध जयसिंह और आदिलशाह के मध्य सबसे पहला सवाल आता है झेलम का युद्ध कब लड़ा गया? या झेलम का युद्ध कब हुआ था? इतिहास का यह भीषण संग्राम आज लगभग 2346 साल पहले यानि ईसा 326 वर्ष पहले हुआ था। अब सवाल आता है कि झेलम का युद्ध किस किस के बीच हुआ था? या जो झेलम का युद्ध लड़ा उसका नाम क्या था। यह युद्ध यूनान के सम्राट सिंकदर और भारत में  पंजाब के महाराज पोरस के बीच हुआ था। आगे के लेख में हम इस युद्ध और समकालीन स्थिति को विस्तार पूर्वक क्रम अनुसार जानेगें।   झेलम का युद्ध के समकालीन भारत की राजनीतिक स्थिति आज से लगभग...

चंद्रगुप्त मौर्य और सिकंदर का युद्ध - सेल्यूकस और चंद्रगुप्त का युद्ध

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चंद्रगुप्त मौर्य और सिकंदर का युद्ध ईसा से 303 वर्ष पूर्व हुआ था। दरासल यह युद्ध सिकंदर की मृत्यु के बाद उसके सेनापति सेल्यूकस और चंद्रगुप्त के बीच हुआ था। इसलिए इसको सही तौर पर सेल्यूकस और चंद्रगुप्त मौर्य का युद्ध के नाम से जाना जाना चाहिए। चूंकि सेल्यूकस सिकंदर का सेनापति था और उसकी मृत्यु के बाद उसके सम्राज्य के कुछ हिस्से का उत्तराधिकारी हुआ था इसलिए इतिहास में इसे चंद्रगुप्त मौर्य और सिकंदर का युद्ध के नाम से भी प्रसिद्धि प्राप्त है। अपने इस लेख में आज से 2300 वर्ष पूर्व हुए इस भीषण युद्ध के बारे में विस्तार से जानेंगे। सबसे पहले इस युद्ध के प्रमुख किरदारों के बारे में जानेगें। चंद्रगुप्त मौर्य चंद्रगुप्त मौर्य कौन था? चंद्रगुप्त मौर्य कहा का शासक था? मौर्य नामक क्षत्रिय वंश में चंद्रगुप्त ने जन्म लिया था। और इसलिए वह चंद्रगुप्त मौर्य के नाम के विख्यात हुआ। ईसा से छः शताब्दी पू्र्व चंद्रगुप्त मौर्य के पूर्वज पिपलोन नामक एक छोटी सी रियासत में राज्य करते थे। उन दिनों में मगध का राज्य शक्तिशाली हो रहा था। उसने अनेक छोटे छोटे राज्यों पर आक्रमण करके उनको अपने राज्य में मिला लिया था। उ...

शकों का आक्रमण - शकों का भारत पर आक्रमण, शकों का इतिहास

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शकों का आक्रमण भारत में प्रथम शताब्दी के आरंभ में हुआ था। शकों के भारत पर आक्रमण से भारत में शकों का प्रभुत्व बढ़ता गया। और उन्होंने अनेक राज्य अपने अधिकार में कर लिये थे। शकों का भारत पर आक्रमण भारत के युद्ध इतिहास में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। और भारत के शिक्षा जगत में शकों के भारत में प्रवेश से लेकर उनके शासन, आक्रमण, प्रभुत्व, या शक कौन थे कहाँ से आये आदि अनेक प्रश्न छात्रों से पूछे जाते है। अपने इस लेख में हमने छात्रो के उन सभी प्रश्नों के उत्तर को विस्तार पूर्वक बताया गया और शकों का इतिहास पर रोशनी डाली है। शकों का भारत पर आक्रमण के समकालीन भारत की राजनीतिक स्थिति मौर्य साम्राज्य के पतन के आखिरी समय में अंतिम मौर्य सम्राट वृहद्रथ को मार कर पुण्यमित्र पाटलिपुत्र के सिंहासन पर बैठा था। उन्हीं दिनों में यूनानियों का आक्रमण हुआ था और उन्हे पुण्यमित्र ने अंत पराजित किया था। लेकिन उसके बाद भारतीय राजाओं की शक्तियां फिर क्षीण होने लगी। पुण्यमित्र शुंग वंशीय था। इसलिए जब वह मौर्य वंश के शासन का अंत करके सिंहासन पर बैठा, उस समय का मौर्य शासन शुंग वंशीय शासन के रूप में परिणात हो गय...

हूणों का आक्रमण - हूणों का इतिहास - भारत में हूणों का शासन

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देश की शक्ति निर्बल और छिन्न भिन्न होने पर ही बाहरी आक्रमण होते है। आपस की फूट और द्वेष से  भारत सदा निर्बल रहा है। और इसी प्रकार के अवसरों पर बाहरी आक्रमणकारियों ने देश का सर्वनाश किया है। अपने इस लेख में हम जिस बहारी आक्रमण का वर्णन करने जा रहे वो है, हूणों का आक्रमण। इस लेख हम हूणों के आक्रमण के साथ साथ हूणों का इतिहास, हूणों के आक्रमण का प्रभाव, हूणों के वंशज, हूणों की उत्पत्ति, हूणों कौन थे, हूणों का शासन, हूणों का धर्म, हूणों को किसने पराजित किया, हूणों के बारें आदि महत्वपूर्ण जानकारियों का भी इस लेख में वर्णन करेंगे। बीजापुर का युद्ध जयसिंह और आदिलशाह के मध्य लेकिन हूणों के साथ साथ इस देश में भयानक युद्ध हुए उनके पहले की परिस्थितियों पर प्रकाश डालना जरूरी है। यानि हूणों का आक्रमण से पहले फ्लैसबैक में जाना बहुत जरूरी है। हूणों से भी पहले जिन आक्रमणकारी जातियों ने भारत पर आक्रमण कर अपना आधिपत्य कायम किया उनमें  शकों का आक्रमण विषेता रखता है। जिसका वर्णन हम अपने पिछले लेख में कर चुके है। इस देश में जब अशोक का शासन चल रहा था, करीब करीब उन्हीं दिनों में चीन में एक शक्तिशाल...

खैबर की जंग - खैबर की लड़ाई - महमूद गजनवी और अनंगपाल का युद्ध

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खैबर दर्रा नामक स्थान उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान की सीमा और अफ़ग़ानिस्तान के काबुलिस्तान मैदान के बीच हिन्दुकुश के सफ़ेद कोह पर्वत शृंखला में स्थित एक प्रख्यात दर्रा है। यही वह स्थान है जहाँ पर खैबर की जंग हुई थी। खैबर दर्रा क्या है? यह 1070 मीटर (3510 फ़ुट) की ऊँचाई पर सफ़ेद कोह शृंखला में एक प्राकृतिक घाटी है। उस समय में इस दर्रे के ज़रिये भारतीय उपमहाद्वीप और मध्य एशिया के बीच आवागमन का यह एकमात्र सुगम मार्ग था। जिसके कारण इस क्षेत्र ने इतिहास अपनी पर गहरी छाप छोड़ी है। ख़ैबर दर्रा लगभग 52.8 कि.मी. लम्बा है और इसका सबसे सँकरा भाग केवल 10 फुट चौड़ा है। इस दर्रे के पूर्वी भारतीय छोर पर पेशावर तथा लंदी कोतल स्थित है, जहाँ से अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी  काबुल को मार्ग जाता है। उत्तर-पश्चिम से भारत पर आक्रमण करने वाले अधिकांश आक्रमणकारी इसी दर्रे से भारत में आये। अब यह दर्रा पाकिस्तान के पश्चिमी पंजाब प्रान्त को अफ़ग़ानिस्तान से जोड़ता है। प्राचीन काल के हिन्दू राजा विदेशी आक्रमणकारियों से इस दर्रे की रक्षा नहीं कर सके। शकों और हूणों ने भी इसी मार्ग से ही आकर आक्रमण किया था। यहां तक...