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टिहरी झील प्राकृतिक सौंदर्य और एक्टिविटी का संगम

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 ये_मालदीव_के_नजारे_नहीं_हैं यहाँ आप ऋषिकेश से सिर्फ 1.30 घंटे में पहुंच सकते हैं,ये टिहरी झील के नजारे हैं जो कि इस समय बहुत फेमस टूरिस्ट प्लेस बन गया है ,इन तस्वीरों में फ्लोटिंग हट भी दिख रही हैं जो की झील में तैरते हुए घर हैं,यहां भी लोग नाइट स्टे कर सकते हैं,और यहां बहुत सारी वाटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी कर सकते हैं, ये जगह ऋषिकेश से सिर्फ 77 km दूर है शानदार रोड बना हुआ है सिर्फ 1.30 घंटे लगते हैं,टिहरी झील में विभिन्न प्रकार की वाटर स्पोर्ट्स और एक्टिविटीज़ का आनंद लिया जा सकता है, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं: 1. स्कीइंग और वॉटर स्कीइंग टिहरी झील में स्कीइंग और वॉटर स्कीइंग की सुविधा उपलब्ध है। 2. पैराग्लाइडिंगझील के ऊपर पैराग्लाइडिंग का आनंद लिया जा सकता है। 3. बोटिंग और टिहरी झील में बोटिंग और याटिंग की सुविधा उपलब्ध है। 4. *फिशिंग झील में मछली पकड़ने का आनंद लिया जा सकता है। 5. कयाकिंग और कैनोइंग टिहरी झील में कयाकिंग और कैनोइंग की सुविधा उपलब्ध है। 6. विंड सर्फिंग झील में विंड सर्फिंग का आनंद लिया जा सकता है। 7. जेट स्कीइंग टिहरी झील में जेट स्कीइंग की सुविधा उपलब्ध है। 8. ...

पतंजलि योग पीठ - patanjali yog peeth - योग जनक

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हरिद्वार जिले के बहादराबाद में स्थित भारत का सबसे बड़ा योग शिक्षा संस्थान है । इसकी स्थापना स्वामी रामदेव द्वारा योग का अधिकाधिक प्रचार करने एंव इसे सर्वसुलभ बनाने के उद्देश्य से किया है । आज पतंजलि योग पीठ विश्व भर में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। तथा बाबा स्वामी रामदेव जी महाराज आज विश्व भर में योग गुरू के रूप प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके है । पतंजलि योग पीठ पतंजलि योग पीठ में योग शिक्षा व आयुर्वैदिक  स्वास्थ्य लाभ के साथ साथ भ्रमण का भी लुफ्त उठाया जा सकता है । हरिद्वार तीर्थ यात्रा पर आने वाले अधिकतर पर्यटक यहाँ योग प्रशिक्षण  भ्रमण तथा स्वास्थ्य लाभ के उद्देश्य से जरूर आते है। यहाँ की भव्य इमारत खुबसूरत बगीचे योग प्रशिक्षण केंद्र तथा अनुसंधान केन्द्र देखने योग्य है। पतंजलि योग पीठ दो भागों में स्थित है । फैस वन और फैस टू। रामानंदी संप्रदाय के संस्थापक, पीठ, नियम व इतिहास पतंजलि योग पीठ पतंजलि योग पीठ फेस 1 योग पीठ फेस 1 के मुख्य द्वार में प्रवेश  करते ही खुबसुरत गार्डन में योग सूत्र के रचनाकार महर्षि पतज्जली शल्य चिकित्सा के जनक महर्षि सुश्रुत तथा चरक संहिता के रचनाकार ...

रूद्रपुर के पर्यटन स्थल - रूद्रपुर दर्शनीय स्थलों

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प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी श्री उधमसिंह के नाम पर इस जिले का नामकरण किया गया है। श्री उधमसिंह ने जनरल डायर की हत्या कर जलियांवाला बाग कांड का प्रतिशोध लिया था। उधमसिंह नगर ( रूद्रपुर ) जिले की स्थापना अक्टूबर 1995 में हुई थी जब इसे नैनीताल जिले से पृथक किया गया था। उधमसिंह नगर जिले का क्षेत्रफल 2908 वर्ग किलोमीटर है। तथा उधमसिंह नगर जिले का जिला मुख्यालय रूद्रपुर roodarpur शहर है। उधमसिंह नगर जिले को कुमांऊ की पहाडियो का मुख्यद्धार भी कहा जाता है। उधमसिंह नगर जिले मे तीन सब डिविजन ( रूद्रपूर, काशीपुर, खटिमा ) तथा चार तहसीले ( काशीपुर, किच्छा, खटिमा, और सितारगंज ) है। यह खुशहाल जिला अपनी ऊपजाऊ भूमि और कौमी एकता के लिए प्रसिद है। उधमसिंह नगर जिले को उत्तरांचल का औधोगिक जिला भी कहा जाता है। इस जिले के अंदर कई बडी बडी औधोगिक ईकाईयां है। जो इस जिले को सृमिद्ध बनाती है। Tourist place near roodarpur (रूद्रपुर) यह प्रसिद नगर उधमसिंह नगर जिले का मुख्यालय है। यहा पर कई बडेे बडे होटल रेस्तरां है। यहां यात्रीयो के ठहरने की उचित व्यवस्था है। इसके अलावा आप यहां के मुख्य बाजारो और प्रमुख मॉलो मे शॉपि...

हरिद्वार ( मोक्षं की प्राप्ति) haridwar sapt puri teerth in hindi

उतराखंड राज्य में स्थित हरिद्धार जिला भारत की एक पवित्र तथा धार्मिक नगरी के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हरिद्धार हिन्दू धर्म के सात पवित्र स्थलों में से एक है । हरिद्वार का अर्थ है कि हरि ( ईश्वर) द्वार यानि ईश्वर तक पहुँचने का द्वार। यही वह स्थान है जहाँ पर्वतों से उतरकर पवित्र पावन गंगा मैय्या मैदानी धरती पर प्रथम आगमन होता है । हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार यही वह स्थल है जहाँ अमृत की कुछ बूंदें भूल से घड़े से गिर गई थी । जब खगोलीय पक्षी गरूड़ उस घड़े को समुद्र मंथन के बाद ले जा रहे थे । यह अमृत बूंदें चार स्थानों पर गिरी थी – उज्जैन, हरिद्वार, नासिक ओर प्रयाग आज यही वह स्थान है जहाँ कुंभ मैला लगता है । जिस स्थान पर वह बूंद गिरी थी उसे हर की पौड़ी पर ब्रहम्कुंड माना जाता है इस ब्रहम्कुंड में स्नान करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है । हरिद्वार को चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार भी माना जाता है । चारधाम यात्रा का सुभारंभ यही से होता है । इस धार्मिक नगरी में अनेकों धार्मिक स्थल है। हर की पौड़ी ब्रहम्कुंड को ही हर की पौड़ी कहते है । इस घाट के ब्रहम्कुंड में स्नान करने से मोक्ष  की प्...

पीरान कलियर शरीफ - दरगाह करियर शरीफ - कलियर दरगाह का इतिहास पाक

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पीरान कलियर शरीफ उतराखंड के रूडकी से 4किमी तथा हरिद्वार से 20 किमी की दूरी पर स्थित   पीरान  कलियर शरीफ हिन्दू मुस्लिम एकता की मिशाल कायम करता है । यहाँ पर हजरत अलाऊद्दीन साबीर साहब की पाक व रूहानी दरगाह है । इस दरगाह का इतिहास काफी पुराना है यहाँ पर सभी धर्मों के जायरीन  जियारत करने आते है । तथा अपनी मन्नतें मागंते है तथा चादर और सीनी (प्रसाद) चढाने के साथ साथ यहाँ भूखों के लिए लंगर भी लगाते है । यहाँ पर साबिर साहब की दरगाह से अलग और भी कई दरगाह है जैसे :-  हजरत इमाम साहब की दरगाह, हजरत किलकिली साहब , नमक वाला पीर, अब्दाल साहब और नौ गजा पीर  कलियर जियारत के लिए यह दरगाह अपना महत्व रखती है। कलियर के बीच से  एक साथ निकलने वाली दो नहरें इसकी शोभा और बढ़ा देती है। हमारे यह लेख भी जरूर पढे:— दरगाह अजमेर शरीफ ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर शरीफ का इतिहास दरगाह साबीर पाक हजरत अलाऊद्दीन साबीर पाक की दरगाह यहाँ की मुख्य दरगाह है । इस दरगाह के दो मुख्य द्वार है तथा बीच में हजरत साबीर साहब का मजार है मजार के अन्दर साबीर साहब की कब्र है । कब्र पर जायरीन चादर व फूल चढाते है । म...

सिद्धबली मंदिर - सिद्धबली मंदिर का इतिहास - sidhbali tample

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सिद्धबली मंदिर उतराखंड के कोटद्वार कस्बे से लगभग 3किलोमीटर की दूरी पर कोटद्वार पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भव्य सिद्धबली मंदिर स्थित है । यह मंदिर खो नदी के किनारे पर स्थित लगभग 40मी ऊचे पहाड़ी टीले पर बना हुआ है । कोटद्वार को गढ़वाल का प्रवेश द्वार भी माना जाता है तथा यह सिद्धबली मंदिर पौड़ी गढ़वाल का प्रसिद्ध देव स्थल है । इसकी स्थापना के बारे में कहा जाता है कि यहाँ तप साधना करने के बाद एक सिद्ध बाबा को हनुमानजी की सिद्धि प्राप्त हुई थी । सिद्ध बाबा ने यहाँ बजरंगबली की एक विशाल पाषाणी प्रतिमा का निर्माण किया था । इससे इसका नाम सिद्धबली पड गया अथार्त् सिद्ध बाबा द्वारा स्थापित बजरंगबली । कहा जाता है कि बाद में ब्रिटिश शासन काल के एक खान मुस्लिम अधिकारी अपने घोड़े से कहीं जा रहे थे जैसे ही वह सिद्धबली के पास पहुँचे वह बेहोश होकर गिर गये उनको स्वपन हुआ की सिद्धबली की समाधि पर मंदिर की स्थापना की जायें। जब वह होश में आये तो उन्होंने आसपास के लोगों को अपने स्वपन के बारे में बताया ।   सिद्धबली मंदिर कोटद्धार के सुंदर दृश्य   पौराणिकता और शक्ति की महत्वता के कारण श्रृदालुओ ने इसे भव्यता...

बद्रीनाथ धाम - बद्रीनाथ मंदिर चार धाम यात्रा का एक प्रमुख धाम

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उत्तराखण्ड के चमोली जिले मे स्थित व आकाश की बुलंदियो को छूते नर और नारायण पर्वत की गोद मे बसे आदितीर्थ बद्रीनाथ धाम न सिर्फ श्रद्धा व आस्था का अटूट केन्द्र है। बल्कि अद्धितीय प्राकृतिक सौंदर्य से भी पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह हिन्दुओ के चार प्रमुख धामो में से एक है। भगवान नारायण के वास के रूप मे जाना जाने वाला बद्रीनाथ धाम अादि शंकराचार्य की कर्मस्थली रहा है। चारो और पहाडियो से घिरा बद्रीनाथ मंदिर अलंकृत है। नारायण पर्वत के निकट बसा होने के कारण यहा प्राय: भारी हिमशिखाए खिसकती रहती है। परंतु आज तक मंदिर को कोई हानि नही हुई है यह तो कुछ भी नही 2013 मे आयी भारी बाढ आपदा जिसमे बद्रीनाथ शहर तिनके की तरहा बह गया था परंतु इस पवित्र मंदिर का बाल भी बांका नही कर सकी। बद्रीनाथ का इतिहास चारों धाम यात्रा मे बद्रीनाथ धाम को सबसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यहां स्थित भव्य बद्रीनाथ मंदिर का निर्माण 9 वी शताब्दी मे शंकराचार्य द्धारा कराया गया था। यह भव्य मंदिर अलकनंदा नदी के तट पर बना हुआ है। कहा जाता है कि यहां बदरी ( बेर) के घने वन होने के कारण इस क्षेत्र का नाम बदरी वन पडा था। बाद म...

यमुनोत्री धाम यात्रा - यमुनोत्री की कहानी - यमुनोत्री यात्रा के 10 महत्वपूर्ण टिप्स

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भारत के राज्य उत्तराखंड को देव भूमी के नाम से भी जाना जाता है क्योकि इस पावन धरती पर देवताओ का वास रहा है यहा की पवित्र धरती के कण कण में देवता निवास करते है। यह राज्य पवित्र चार धाम यात्रा  का भी स्थल है। जिनका हिन्दु धर्म में बहुत बडा महत्व है। चार धाम यातत्रा के अंतर्गत आने वाले धाम गंगोत्री,यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ, है। अपनी इस पोस्ट के अंतर्गत हम चार धाम यात्रा के एक पवित्र धाम यमुनोत्री धाम यात्रा की संम्पूर्ण जानकारी हिन्दी में साझा करेगें। इस पोस्ट के अंतर्गत हम जानेगें:- यमुनोत्री धाम यात्रा का महत्व क्या है यमुनोत्री धाम कि धार्मिक पृष्ठभूमी यमुनोत्री की कहानी यमुनोत्री धाम कैसे पहुंचे यमुनोत्री धाम यात्रा में कया क्या सावधानिया बरते यमुनोत्री धाम यात्रा में धाम के दर्शन कैसे करे यमुनोत्री धाम के कपाट कब खुलते है। यमुनोत्री धाम के कपाट कब बंद होते है। यमुनोत्री धाम कपाट बंद होने के बाद मांं यमुनोत्री पुजा कहा होती है। यमुनोत्री के पैदल मार्ग की दूरी किलोमीटर में   यमुनोत्री धाम के सुंदर दृश्य यमुनोत्री धाम यात्रा का महत्व हिन्दु धर्म में कई नदियो जैसे गंगा, यमुना, सरस...

गंगोत्री धाम यात्रा, गंगोत्री तीर्थ दर्शन, महत्व, व रोचक जानकारी

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गंगाजी को तीर्थों का प्राण माना गया है। गंगाजी हिमालय से उत्पन्न हुई है। जिस स्थान से गंगा जी का प्रादुर्भाव हुआ है, उसे गंगोत्री कहते है। उत्तरकाशी से गंगोत्री की दूरी पांच किलोमीटर है। गंगोत्री धाम हिमालय के प्रसिद्ध चार धामों- गंगोत्री, यमुनोत्री , केदारनाथ , बद्रीनाथ में से एक धाम है। यहां पर डोडीताल से निकली असिगंगा भागीरथी में मिलती है। यही से एक मार्ग डोडीताल जाता है। यहां से 18 मील दूर यह ताल है, जो दो मील घेरे का है। यह मार्ग सुगम है। डोडीताल एक मनोहर स्थान है। ऐसा माना जाता है कि गंगाजी भगवान नारायण के चरणों से निकलकर भगवान शंकर के मस्तक पर गिरी और वहां से पृथ्वी पर आई। गंगोत्री धाम के दर्शन – गंगोत्री धाम के दर्शनीय स्थल गंगा मंदिर गंगोत्री धाम का मुख्य मंदिर यही है। इस मंदिर में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा प्रतिष्ठित गंगाजी की मूर्ति है। राजा भगीरथ, यमुना, सरस्वती एवं शंकराचार्य जी की मूर्तियां भी है। मंदिर में गंगाजी की मूर्ति व छत्र इत्यादि सड सोने के है। गंगाजी के मंदिर के पास एक भैरव मंदिर है। गंगौत्री में सूर्यकुण्ड, विष्णुकुंड, ब्रह्मा कुंड आदि तीर्थ भी है। गंगोत्री ...

हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा - Hemkund Sahib Gurudwara history in hindi

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समुद्र तल से लगभग 4329 मीटर की हाईट पर स्थित गुरूद्वारा श्री हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) उतराखंड राज्य (Utrakhand state) के सीमांत district Chamoli में स्थित है। गोविंदघाट (Govindghat) से लगभग 12 किमी की पैदल यात्रा के बाद घोघरीया (Ghoghriya) नामक स्थान आता है। यहां से आगे 6 किमी की यात्रा में नैसर्गिक सौंदर्य को निहारते हुए हेमकुंड साहिब (Hemkund sahib) पहुंचा जाता है। हेमकुंड साहिब  (Hemkund sahib) से लक्ष्मण गंगा (lakshman ganga) बहती है। हर साल May, june में हेमकुंड साहिब (Hemkund sahib) के द्वार (gate) दर्शनार्थियों के लिए खुलते है। और सर्दियों के मौसम (winter weather) में बंद हो जाते है। जिसका मुख्य कारण यहां अधिक बर्फबारी (Snowfalls) है, जिसमें हेमकुंड साहिब का तापमान माइनस(temperature minus) में चला जाता है। और यहां मनुष्य का रहना संभव नहीं है।     हेमकुंड साहिब का इतिहास (Hemkund sahib history in hindi)     हेमकुण्ड साहिब क वर्णन स्कन्दपुराण (Skand puran) में वर्णित बदरिकाश्रम महात्म्य में भी है। कई विद्वान हेमकुंड की खोज को इसके काफी बाद की बताते है। तो ...

नानकमत्ता साहिब का इतिहास - नानकमत्ता गुरूद्वारा हिस्ट्री इन हिन्दी

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नानकमत्ता साहिब सिक्खों का पवित्र तीर्थ स्थान है। यह स्थान उतराखंड राज्य के उधमसिंहनगर जिले (रूद्रपुर) नानकमत्ता नामक नगर में स्थित है। यह पवित्र स्थान सितारगंज — खटीमा मार्ग पर सितारगंज से 13 किमी और खटीमा से 15 किमी की दूरी पर स्थित है। सिक्खों के प्रथम गुरू नानक देव जी ने यहां की यात्रा की थी। इसलिए इस स्थान का महत्व बहुत बडा माना जाता है। अपने इस लेख में हम इसी पवित्र स्थान की यात्रा करेंगे और जानेंगे:– नानकमत्ता साहिब का इतिहास, नानकमत्ता साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी, नानकमत्ता का महत्व, नानकमत्ता साहिब में देखने लायक स्थान, नानकमत्ता गुरूद्वारा हिस्ट्री इन हिन्दी, नानकमत्ता गुरूद्वारे के बारें में बहुत कुछ जानेगें। नानकमत्ता साहिब का इतिहास – नानकमत्ता साहिब हिस्ट्री इन हिन्दी नानकमत्ता का प्राचीन नाम गोरखमत्ता था। जो गुरू नानक देव जी के यहां आगमन के बाद नानकमत्ता हो गया। आज से लगभग 495 वर्ष पूर्व 1524 ईसवीं में सिक्खों के प्रथम गुरू नानकदेव जी करतारपुर से ऊधमसिंह नगर स्थित नानकमत्ता नामक स्थान पर आये थे। पवित्र ग्रंथ गुरवाणी में इस यात्रा का उल्लेख नानक देव जी की तीसरी उदासी अर्थात...

घोड़ाखाल मंदिर या सैनिक स्कूल घंटी वाला मंदिर

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भारत की देव भूमि कहीं जाने वाले राज्य  उत्तराखंड के कण कण मे ऐतिहासिक प्राचीन और सुंदर मंदिर बड़ी संख्या में हैं, आज अपने इस लेख में हम जिस ऐतिहासिक व सुंदर मंदिर का उल्लेख करेंगे, इस मंदिर को घोड़ाखाल मंदिर या घंटी वाला मंदिर के नाम से जाना जाता है।   घोड़ाखाल मंदिर या घंटी वाला मंदिर   उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है नैनीताल।  नैनीताल उत्तराखंड का प्रमुख जिला भी है और इस राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। नैनीताल जिले में ही भिवाली नगर से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर घोड़ाखाल गांव यह मंदिर स्थित है, घोड़ाखाल में प्रसिद्ध सैनिक स्कूल भी है। सैनिक स्कूल के पिछले गेट के बाहर घोड़ाखाल मंदिर या घंटी वाला मंदिर स्थित है। एक तो उत्तराखंड का प्रथम सैनिक स्कूल और दूसरा यहां पर स्थित प्रसिद्ध घंटी वाला मंदिर होने के कारण यह गांव काफी प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। बड़ी संख्या में सैलानी और भक्त यहां आते है। मंदिर की सुंदरता यहां टंगी लाखों की संख्या में घंटियां है। जो बरबस ही पर्यटकों अपनी ओर आकर्षित करती है। घोड़ाखाल मंदिर या घंटी वाला मंदिर ...

नैनीताल( सुंदर झीलों का शहर) नैनीताल के दर्शनीय स्थल

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देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 300किलोमीटर की दूरी पर उतराखंड राज्य के कुमांऊ की पहाडीयोँ के मध्य बसा यह खुबसूरत शहर झीलों के शहर के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह हिमालयन बेल्ट  में ही स्थित है । नैनीताल अपने खुबसूरत परिदृश्यों ओर शांत परिवेश के कारण पर्यटकों के स्वर्ग के रूप में भी जाना जाता है। अपने इस लेख में हम नैनीताल की यात्रा करेगें और नैनीताल के पर्यटन स्थल, नैनीताल के दर्शनीय स्थल, नैनीताल टूरिस्ट पैलेस, नैनीताल भारत आकर्षक स्थल, नैनीताल में घुमने लायक जगह आदि कै साथ साथ नैनीताल के टॉप आकर्षक स्थलो के बारे में विस्तार से जानेगें। औली पर्यटन स्थल – औली में बर्फबारी का आनंद – औली का तापमान   नैनीताल मल्लीताल, नैनी झील   नैनीताल का इतिहास नैनीताल की स्थापिता में कई कथाएँ प्रचलित है । नैंंनीताल को श्री स्कन्द पुराण के मानस खंड में तीन संतों की झील या त्रि-ऋषि-सरोवर के रूप में उल्लेखित किया गया है । तीन संत जिनके नाम – अत्री, पुलस्त्य ओर पुलाह थे अपनी प्यास मिटाने के लिए नैनीता़ल में रूके थे परन्तु उन्हें कहीं भी पानी नहीं मिला तब उन्होंने एक गढ्ढा खोदा ओर मानसरोवर झील से ...

मसूरी (पहाड़ों की रानी) मसूरी टूरिस्ट पैलेस - masoore tourist place

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उतरांचल के पहाड़ी पर्यटन स्थलों में सबसे पहला नाम मसूरी का आता है। मसूरी का सौंदर्य सैलानियों को इस कदर प्रभावित करता है। कि इसे पर्वतों की रानी भी कहा जाता है। इस जगह को यमुनोत्री और गंगोत्री के धार्मिक केन्द्रों के लिए प्रवेश द्वार भी माना जाता है । मसूर एक प्रकार की झाड़ी होती है जो एक बार इस क्षेत्र में बहुतायत में पाई गई थी इसी से इसका  नाम मसूरी पड़ गया। मसूरी का इतिहास सन् 1825 में केप्टन यंग एक साहसिक ब्रिटिश मिलिट्री अधिकारी और श्री शोर , देहरादून के निवासी और अधिक्षक द्वारा वर्तमान  मसूरी स्थल की खोज से आरम्भ होता है तभी इस छुट्टी पर्यटन स्थल की नीवं पड़ी थी। मसूरी में पर्यटकों को लुभाने वाले अनेक स्थल है। उन्हीं में से कुछ पर प्रकाश डालते है। गनहिल मसूरी की दूसरी सबसे उंची चोटी पर रोपवे द्वारा जाने का आनन्द ले । यहाँ पैदल रास्ते से भी पहुँचा जा सकता है । यह रास्ता माल रोड़ पर कचहरी के निकट से जाता है और यहाँ पहुँचने में लगभग बीस मिनट का समय लगता है । रोपवे की लम्बाई केवल 400 मीटर है । सबसे ज्यादा इसकी सैर में जो रोमांच है वह अविस्मरणीय है । गनहिल से हिमालय पर्वत श्रृंखला...