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टिहरी झील प्राकृतिक सौंदर्य और एक्टिविटी का संगम

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 ये_मालदीव_के_नजारे_नहीं_हैं यहाँ आप ऋषिकेश से सिर्फ 1.30 घंटे में पहुंच सकते हैं,ये टिहरी झील के नजारे हैं जो कि इस समय बहुत फेमस टूरिस्ट प्लेस बन गया है ,इन तस्वीरों में फ्लोटिंग हट भी दिख रही हैं जो की झील में तैरते हुए घर हैं,यहां भी लोग नाइट स्टे कर सकते हैं,और यहां बहुत सारी वाटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी कर सकते हैं, ये जगह ऋषिकेश से सिर्फ 77 km दूर है शानदार रोड बना हुआ है सिर्फ 1.30 घंटे लगते हैं,टिहरी झील में विभिन्न प्रकार की वाटर स्पोर्ट्स और एक्टिविटीज़ का आनंद लिया जा सकता है, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं: 1. स्कीइंग और वॉटर स्कीइंग टिहरी झील में स्कीइंग और वॉटर स्कीइंग की सुविधा उपलब्ध है। 2. पैराग्लाइडिंगझील के ऊपर पैराग्लाइडिंग का आनंद लिया जा सकता है। 3. बोटिंग और टिहरी झील में बोटिंग और याटिंग की सुविधा उपलब्ध है। 4. *फिशिंग झील में मछली पकड़ने का आनंद लिया जा सकता है। 5. कयाकिंग और कैनोइंग टिहरी झील में कयाकिंग और कैनोइंग की सुविधा उपलब्ध है। 6. विंड सर्फिंग झील में विंड सर्फिंग का आनंद लिया जा सकता है। 7. जेट स्कीइंग टिहरी झील में जेट स्कीइंग की सुविधा उपलब्ध है। 8. ...

उदयपुर दर्शनीय स्थल - उदयपुर के टॉप 15 पर्यटन स्थल

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उदयपुर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख शहर है। उदयपुर की गिनती भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलो में भी होती है। प्रिय पाठको हमने अपनी राजस्थान यात्रा के अंतर्गत अपने पिछले कुछ लेखो में राजस्थान के अनेक पर्यटन स्थलो की सैर की और उनके बारे में विस्तार से जाना है। अपने इस लेख में हम राजस्थान के इस खूबसुरत शहर उदयपुर की सैर करेगे और उदयपुर दर्शनीय स्थल, उदयपुर के पर्यटन स्थल, उदयपुर टूरिस्टस पैलेस, उदयपुर में घूमने लायक स्थान, आदि के साथ साथ उदयपुर के टॉप 15 पर्यटन स्थलो की सैर करेगें। गलियाकोट दरगाह राजस्थान – गलियाकोट दरगाह का इतिहास उदयपुर इतना खूबसुरत शहर है कि इसे कई उपनामो से भी संबोधित किया जाता है। यहा अनेक खूबसुरत झीले है। जिसके कारण इसे  “झीलो की नगरी”  और  पूर्व का वेनिस  तथा  राजस्थान का कशमीर  आदि नामो से भी जाना जाता है। यह सभी उपलब्धियां इस शहर को यहा की अथा सुंदरता के कारण की प्राप्त हुई है। इसी अकाल्पनिक सुंदरता को निहारने के लिए देश विदेश से प्रति वर्ष लाखो सैलानियो का यहा आना जाना लगा रहता है। इस खुबसूरत शहर उदयपुर की स्थापना सन् 1559 में महार...

राधा कुंड यहाँ मिलती है संतान सुख प्राप्ति - radha kund mthura

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राधा कुंड :- उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर को कौन नहीं जानता में समझता हुं की इसका परिचय कराने की शायद की जरूरत हो । यह तो आप सभी जानते है कि इस शहर को भगवान श्रीकृष्ण का ही एक रूप माना जाता है । यह पूरा शहर ही उनकी भक्ति और कृपा से भरा हुआ है । और यही पर  वह स्थान है जिसकी हम बात करने जा रहे है यह स्थान गोवर्धन गिरधारी की परिक्रमा मार्ग पर है इस चमत्कारी स्थान को राधा कुंड के नाम से जाना जाता है । जिसके बारे में मान्यता है कि अगर निसंतान दम्पति अहोई अष्टमी की मध्य रात्रि को इस पवित्र कुंड में एक साथ स्नान करें तो उन्हें संतान सुख प्राप्त हो सकता है । यहाँ निसंतान महिलाएं अपने बाल खोलकर राधा जी से संतान  सुख  का वरदान मांगती है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है राधा कुंड की कहानी केदारनाथ धाम का इतिहास कुंड कि स्थापिता में एक कथा प्रचलित है कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को मारने के लिए कंस ने अरिष्टासुर नामक राक्षस को भेजा था । अरिष्टासुर बछड़े का रूप धारण कर श्रीकृष्ण की गायोँ में शामिल हो गया तथा गवालों को मारने लगा। श्रीकृष्ण ने बछड़े का रूप...

मानेसर झील ऐसा लगता है पानी कम मछलियां ज्यादा

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मानेसर लेक या सरोवर मई जून में पडती भीषण गर्मी चिलचिलाती धूप से अगर किसी चीज से सकून व राहत मिल सकती है तो वो है पानी और वृक्षो की छाया। जी हाँ प्राकृति की कुदरती व अनमोल देन अगर हमें एक साथ व एक स्थान पर मिल जायें तो फिर क्या कहने। अगर आप जम्मू या उसके आसपास किसी ऐसी ही जगह की तलाश कर रहे है जहाँ पानी और वृक्षो की घनी छाया के साथ साथ पिकनिक स्पॉट, टूरिस्ट पैलेस, धार्मिक स्थल के दर्शन, सैरसपाटा,विभिन्न प्रकार के जीव जन्तु देखने, बोटिंग,तथा सुंदर दृश्यों का आनन्द उठा सके तो वो है। मानेसर सरोवर या मानेसर झील। मानेसर झील जम्मू के सबसे पॉपुलर पिकनिक स्पॉट में एक है जो इसे एक टूरिस्ट पैलेस भी बनाता है। जम्मू कश्मीर टूर या वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा पर आने वाले अधिकतर सैलानी इस झील का आनन्द लेने यहाँ जरूर पहुचते है। मानेसर झील के सुंदर दृश्य बरूआ सागर का किला – बरूआसागर झील का निर्माण किसने और कब करवाया जम्मू कश्मीर के पर्यटन स्थल वैष्णो देवी माता की यात्रा मानेसर झील यह प्रसिद्ध झील जम्मू से लगभग 62 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।  (मानेसर झील) चारों ओर से पहाडियो से घिरी हुई है। जो इस भीषण...

Jal mahal history hindi जल महल जयपुर रोमांटिक महल

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प्रिय पाठको जैसा कि आप सब जानते है। कि हम भारत के राज्य राजस्थान कीं सैंर पर है । और हम राजस्थान राज्य के गुलाबी शहर जयपुर की सैर कर रहे है। उसके बारे मे विस्तार से जानने की कोशिश कर रहे है। पिछली पोस्टो मे हमने जयपुर के कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थलो की सैर की और उसके बारे मे विस्तार से जाना है जिसमे जयपुर का हवा महल सिटी प्लेस और जंतर मंतर शामिल है । JAL mahal history hindi जलमहल के सुंदर दृश्य JAL mahal history hindi इस पोस्ट मे हम जयपुर के हीं एक और प्रमुख पर्यटन स्थल जो अपनीं खुबसूरती अदभुत  निर्माण और प्यार के लम्हे  बिताने के लिए जाना जाता है । जिसको देखने के लिए दुनिया भर से हजारो की संख्या मै पर्यटक गुलाबी नगरी जयपुर आते है । इस अदभुत व खुबसूरत इमारत को जल महल के नाम से जाना जाता है । हवा महल का इतिहास सिटी प्लैस की जानकारी जंतर मंतर जयपुर यह खुबसूरत इमारत जयपुर-आमेर मार्ग पर स्थित मानसागर झील के मध्य मे स्थित है। झील के बीचो-बीच होने के कारण इसे आई बॉल भी कहा जाता है । इस प्रसिद्ध इमारत का निर्माण महाराजा सवाई जयसिह ने अश्वमेध यज्ञ के बाद करवाया था इस इमारत के बनाने के पीछ...

मिरिक झील प्राकृतिक सुंदरता का अनमोल नमूना- tourist place in mirik

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प्रिय पाठको पिछली पोस्टो मे हमने  पश्चिम बंगाल हिल्स स्टेशनो की यात्रा के दौरान दार्जिलिंग और कलिमपोंग के पर्यटन स्थलो की सैर की और उसके बारे में विस्तार से जाना । इस पोस्ट मे हम अपनी इसी यात्रा के दौरान दार्जिलिंग जिले के एक और खुबसूरत पर्यटन स्थल मिरिक झील की सैर करेगे और उसके बारे में विस्तार से जानेगें। बरूआ सागर का किला – बरूआसागर झील का निर्माण किसने और कब करवाया मिरिक पर्वतो की गोद में बसा बहुत ही सुंदर स्थान है। यहा खिलते रंगबिरंगे फूलों, हरी भरी वादियां कल कल करते झरने व खुशबूदार वृक्षो से ढका यह शहर बरबस ही पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां की शुद्ध जलवायु और मन भावन वातावरण सैलानियो को मंत्रमुग्ध कर देता है। मिरिक की समुन्द्र तल से ऊचाई 5899 फुट के लगभग है। इसके आलावा पर्यटको को यहा की झीले खूब भाती है। इन प्रसिद्ध झीलो के कारण ही मिरिक को पहचाना जाता है। मिरिक झील- मिरिक के दर्शनीय स्थल- मिरिक के पर्यटन स्थल- tourist place in mirik- mirik lake मिरिक झील के सुंदर दृश्य सुमेन्दु झील:-  ढेड किलोमीटर के लगभग लंबी यह झील मिरिक का सबसे बडा आकर्षण है। सुमेन्दु झील...

सापूतारा लेक गुजरात का एक मात्र हिल्स स्टेशन की जानकारी हिन्दी में

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प्रिय पाठको पिछली पोस्ट मे हमने मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल्स स्टेशन पचमढ़ी और उसके आस पास के पर्यटन स्थलो की सैर की और उसके बारे में विस्तार से जाना। इस पोस्ट मे हम गुजरात के एकमात्र हिल्स स्टेशन सापूतारा लेक की सैर करेगे और उसके बारे में विस्तार से जानेगें। भारत के राज्य गुजरात का एकमात्र हिल्स स्टेशन सापूतारा गुजरात के सुदूर छोर पर महाराष्ट्र की सीमा पर सापूतारा गुजरात राज्य के डांग जिले मे स्थित है। जिसकी समुन्द्र तल से ऊचाई 1000 मीटर है। सापूतारा यहा की खुबसूरत सापूतारा लेक या सापूतारा झील के लिए पर्यटक के बीच प्रसिद्ध है।  सापूतारा लेक को डांग के आदिवासी “सांपो का घर” के नाम से भी पुकारते है। जो होली तथा वास दरश जैसे त्योहारो मे निकटवर्ती सर्पगंगा नदी के किनारे हर वर्ष सांपो की पूजा करने आते है। सापूतारा झील के चारों और बने सुंदर लेक गार्डन पर्यटको को खूब भाता है। यह पिकनिक मानाने के लिए एक उपयुक्त स्थान है। इसके आलावा पर्यटक यहां की स्थिर व शांत झील में बोटिंग का भी आनंद उठा सकते है। यहां का वातावरण इतना शांत होता है कि आप करीब मे स्थित लेक गार्डन के खुबसूरत वृक्षों पर ब...

Renuka lake - रेणुका झील स्त्री की देह के आकार वाली झील

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प्रिय पाठको पिछली पोस्ट मे हमने अपने झील संस्करण में जम्मू की प्रसिद्ध झील मानेसर झील की सैर की और उसके बारे में विस्तार से जाना था। इस पोस्ट मे हम भारत के खुबसूरत राज्य हिमाचल की प्रमुख व सुंदर रेणुका झील renuka lake की सैर करेगें और उसके बारे में विस्तार से जानेगें कि रेणुका झील कहां स्थित है, रेणुका झील कैसे पहुँचे, रेणुका झील का इतिहास, रेणुका झील का निर्माण कैसे हुआ, रेणुका झील की कहानी, आदि सभी प्रमुख जानकारी हिन्दी मे जानेगें। Renuka lake history in hindi रेणुका झील हिमाचल प्रदेश के नाहन से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रेणुका झील की समुन्द्र तल से ऊचाई लगभग2200 फीट है। यह एक अत्यंत रमणीक झील है जो लगभग तीन किलोमीटर लंबी तथा आधा किलोमीटर चौडी एक अदभुत झील है। इस झील का आकार एक लेटी हुई स्त्री की देह के समान है। जो इसे अदभुत व अनोखा बनाता है। रेणुका झील के सुंदर दृश्य इस झील के चारो ओर हरियाली व इसके पानी मे अठखेलियां करती मछलिया पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करती है। इस झील की गणना एक पावन तीर्थ स्थल के रूप में भी की जाती है। हर वर्ष दिपावली के लगभग दस दिन बाद यहां एक विशाल...

उदयपुर दर्शनीय स्थल - उदयपुर के टॉप 15 पर्यटन स्थल

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उदयपुर भारत के राज्य राजस्थान का एक प्रमुख शहर है। उदयपुर की गिनती भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलो में भी होती है। प्रिय पाठको हमने अपनी राजस्थान यात्रा के अंतर्गत अपने पिछले कुछ लेखो में राजस्थान के अनेक पर्यटन स्थलो की सैर की और उनके बारे में विस्तार से जाना है। अपने इस लेख में हम राजस्थान के इस खूबसुरत शहर उदयपुर की सैर करेगे और उदयपुर दर्शनीय स्थल, उदयपुर के पर्यटन स्थल, उदयपुर टूरिस्टस पैलेस, उदयपुर में घूमने लायक स्थान, आदि के साथ साथ उदयपुर के टॉप 15 पर्यटन स्थलो की सैर करेगें। गलियाकोट दरगाह राजस्थान – गलियाकोट दरगाह का इतिहास उदयपुर इतना खूबसुरत शहर है कि इसे कई उपनामो से भी संबोधित किया जाता है। यहा अनेक खूबसुरत झीले है। जिसके कारण इसे  “झीलो की नगरी”  और  पूर्व का वेनिस  तथा  राजस्थान का कशमीर  आदि नामो से भी जाना जाता है। यह सभी उपलब्धियां इस शहर को यहा की अथा सुंदरता के कारण की प्राप्त हुई है। इसी अकाल्पनिक सुंदरता को निहारने के लिए देश विदेश से प्रति वर्ष लाखो सैलानियो का यहा आना जाना लगा रहता है। इस खुबसूरत शहर उदयपुर की स्थापना सन् 1559 में महार...

राजसमंद पर्यटन स्थल - राजसमंद जिले के टॉप 10 ऐतिहासिक व दर्शनीय स्थल

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राजसमंद राजस्थान राज्य का एक शहर, जिला, और जिला मुख्यालय है। राजसमंद शहर और जिले का नाम राजसमंद झील, 17 वीं शताब्दी में मेवाड़ के राणा राज सिंह द्वारा बनाई गई कृत्रिम झील के नाम पर रखा गया है। राजसमंद जिला का गठन उदयपुर जिले से 10 अप्रैल, 1991 को हुआ था। राजसमंद जिला मेवाड़ क्षेत्र का हिस्सा है, और ऐतिहासिक रूप से मेवाड़ साम्राज्य का हिस्सा था, जिसे उदयपुर साम्राज्य भी कहा जाता था। महाराणा प्रताप की पांचवीं पीढ़ी के सक्षम प्रशासक महाराणा राज सिंह ने 1662 ईस्वी में राजसमंद झील का निर्माण किया, जो मूर्तिकला और सार्वजनिक उपयोगिता कार्यों का एक सुंदर उदाहरण है। राजसमंद झील के अलावा भी इस जिले मे अनेक पर्यटक आकर्षण है। जिनके बारें मे हम नीचे विस्तार से जानेंगे। इससे पहले राजसमंद का इतिहास जान लेते है। राजसमंद के बारें में (About of Rajsamand district Rajasthan) राजसमंद अपने संगमरमर उत्पादन के लिए सबसे बड़े उत्पादक जिले के साथ-साथ पूरे देश में सबसे बड़ी एकल इकाई के रूप में जाना जाता है। राजसमंद ने 1857 में ‘राममगढ़ का छापर’ में तात्या टोपे और ब्रिटिश सैनिकों के बीच स्वतंत्रता संग्राम को भी देख...

जैतपुर का किला या बेलाताल का किला या बेलासागर झील हिस्ट्री इन हिन्दी,

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जैतपुर का किला उत्तर प्रदेश के महोबा हरपालपुर मार्ग पर कुलपहाड से 11 किलोमीटर दूर तथा महोबा से 32 किलोमीटर दूर और हमीरपुर से 117 किलोमीटर दूर है। यहाँ झाँसी मानिकपुर मार्ग पर एक रेलवे स्टेशन भी है। जिसे बेलाताल के नाम से जाना जाता है। यह जैतपुर से 3 किलोमीटर दूर है। जैतपुर किले को बेलाताल का किला या बेलासागर का किला के नाम से भी पुकारा जाता है। इस दुर्ग के आस पास निम्नलिखित स्थल दर्शनीय महत्व के है। बेलाताल या बेलासागर बेलाताल यहाँ का सबसे बडा जलाशय है। जिसका निर्माण चन्देल वंशीय शासक बलराम ने कराया था। उसका पूरा नाम बलवर्मन था। ऐसा कहा जाता है कि उसी के नाम पर इस जलाशय का नाम बेलाताल पड़ा। यह सरोवर 9 मील की लम्बाई चौडाई में स्थित है। तथा सिचांई के लिए इससे नहरें भी निकाली गई है। जैतपुर का किला के भग्नावशेष दर्शनीय स्थल जैतपुर दुर्ग स्थल पर एक प्राचीन दुर्ग के भग्नावशेष हैं। जो बेलाताल के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। इस दुर्ग का निर्माण बुन्देलखण्ड केसरी छत्रसाल ने कराया था। लेकिन स्थानीय लोग यह मानते है कि इस दुर्ग के निर्माता केसरी सिंह थे इस किले में छत्रसाल के पुत्र जगतराय के महलो क...

तालबहेट का किला किसने बनवाया - तालबहेट फोर्ट हिस्ट्री इन हिन्दी

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तालबहेट का किला  ललितपुर जनपद मे है। यह स्थान झाँसी – सागर मार्ग पर स्थित है तथा झांसी से 34 मील दूर है तथा इस स्थल में एक रेलवे स्टेशन भी है इसका नामकरण ताल अथवा सरोवर के नाम हुआ है। यहाँ पर झील की आकृति का एक सरोवर है इस सरोवर से गाँव के लोग सिचाई किया करते है। इस क्षेत्र के लोग गौंडवानी भाषा बोलते है। तालबहेट का किला – तालबहेट का किला हिस्ट्री इन हिन्दी प्राचीन किवदंती के अनुसार यह स्थल जिडियाखेरा के नाम से प्रसिद्ध था, और सरोवर के किनारे यहाँ एक प्राचीन नगर बसा हुआ था। इस नगर में चन्देलो का शासन था। जिनके भग्नावशेष अभी भी उपलब्ध होते है। सन्‌ 1618 में यह स्थान भारतशाह के अधिकार में आ गया, जो चन्देरी के नरेश थे। उन्होने यहाँ एक सुन्दर किले का निर्माण कराया जिसके भग्नावशेष यहाँ उपलब्ध होते है। इसी नरेश ने यहाँ एक सुन्दर तालाब का निर्माण कराया और तालबहेट किले के चारो ओर एक ऊँचे परकोटे का निर्माण कराया। बरूआ सागर का किला – बरूआसागर झील का निर्माण किसने और कब करवाया इनके पुत्र देवीसिंह बुन्देला ने सिंह बाग का निर्माण कराया और किले में नरसिंह मन्दिर भी बनवाया। वर्तमान समय मे इस मन्द...

कोलायत मंदिर के दर्शन - कोलायत का इतिहास- कपिलायतन सरोवर

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प्रिय पाठकों अपने इस लेख में हम उस पवित्र धरती की चर्चा करेगें जिसका महाऋषि कपिलमुनि जी ने न केवल स्पर्श ही किया है। बल्कि उन्होंने अनेक वर्षों तक आसन लगाकर घोर व कठिन तपस्या की। और उसी का प्रताप है कि आज भी हजारों साल के बाद भी उस धरती में श्रद्धालुजनों के लिए चुम्बक जैसी शक्ति है। जिसके फलस्वरूप श्रृद्धालु स्वयं उस ओर खीचे चलें आते है। इस पवित्र पावन धरती का नाम है। कपिलायतन जिसे साधारणतया लोग कोलायत जी के नाम से जानते है। यह पवित्र धरती भारत के राजस्थान राज्य बीकानेर जिले के कोलायत नामक स्थान पर स्थित है। यह धरती प्रसिद्ध ऋषि कपिलमुनि की तपस्थली रही है। और यहां कपिलमुनि का आश्रम और कोलायत मंदिर है। आश्रम को मरूउद्यान भी कहते है। यह स्थान कोलायत झील के लिए भी जाना जाता है। जिसमें स्नान करना श्रृद्धालु अपना सौभाग्य समझते, और कोलायत सरोवर में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है यह श्रृद्धा भी भक्तों में होती है। यहां प्रति वर्ष कार्तिक की पूर्णिमा को कोलायत का मेला लगता है। जो बहुत विशाल होता है, और भारी संख्या में यात्री उसमें भाग लेते है। कोलायत मंदिर या कोलायत का इतिहास, कोलाय...

तालकटोरा जयपुर - जयपुर का तालकटोरा सरोवर

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राजस्थान  की राजधानी जयपुर नगर प्रासाद और  जय निवास उद्यान के उत्तरी छोर पर तालकटोरा है, एक बनावटी झील, जिसके दक्षिण मे बादल महल और तीन ओर चौडी मिट॒टी की पाल हुआ करती थी जिस पर अब जयपुर की बढती आबादी ने मकान ही मकान बनाकर इस चित्रोपम जलाशय के सारे सौन्दर्य को विकृत कर दिया है। इस पाल पर भी पहले बहुत सुन्दर बगीचा था जिसे पाल का बाग कहा जाता था। जयपुर के तीज और गणगौर के प्रसिद्ध मेलो का समापन पाल के बाग मे ही होता आया है। बादल महल के एकदम सामने वाली पाल पर जिसके कोनों पर अष्टकोणीय छतरिया, बीचों-बीच कमानीदार छतवाली लम्बी छतरी और इनके बीच मे समतल छतों वाली जालियों से बंद दो छतरिया और बनी हैं। तीज और गणगौर के जुलूस इसी जगह आकर समाप्त होते हैं। भोग के बाद तालकटोरा मे ही तीज और गणगौर को पधराने या विसर्जित करने का रिवाज रहा है। लह-लहाते बाग-बगीचो के बीच, तालकटोरा के किनारे तीज और  गणगौर के रगो से भरे जुलूसों का यह नजारा इस शहर के सबसे चित्रोपम नजारो मे गिना गया है। दूसरी पाल पर जब इस प्रकार मेले का समापन होता था तो बादल महल मे जुडी सभा या दरबार मे नाच-गान के कार्यकम चलते रहते थ...

कोट्टायम पर्यटन स्थल - कोट्टायम के टॉप 20 टूरिस्ट आकर्षण

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कोच्चि से 63 किमी की दूरी पर, एलेप्पी से 48 किमी, त्रिवेंद्रम से 155 किमी, मुन्नार से 142 किमी और कोयंबटूर से 240 किमी दूर, कोट्टायम केंद्रीय केरल में स्थित एक शहर है और कोट्टायम जिले की प्रशासनिक राजधानी भी है। कोट्टायम पर्यटन के क्षेत्र मे केरल के जाने-माने स्थानों में से एक है। यह शहर मसालों और वाणिज्यिक फसलों, विशेष रूप से रबड़ का एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र है। कोट्टायम के बारें में (about kottayam) कोट्टायम पूर्व में पश्चिमी घाट और पश्चिम में वेम्बानाद झील से घिरा हुआ है। कोट्टायम आश्चर्यजनक परिदृश्य और सौंदर्य के साथ एक सुंदर केरल बैकवाटर गंतव्य के रूप में जाना जाता है। केरल के सबसे प्रसिद्ध बैकवॉटर गंतव्य कुमारकोम कोट्टायम (13 किमी) के बहुत करीब स्थित है। यह सबरीमाला, माननम, वैकोम, एट्टुमानूर, भरणंगणम, एरुमेली, मानारकुद के तीर्थ केंद्रों का प्रवेश द्वार भी है। कोट्टायम भारत में 100 प्रतिशत साक्षरता प्राप्त करने वाला पहला शहर है। केरल में पहला कॉलेज और पहला मलयालम प्रिंटिंग प्रेस था। मलयाला मनोरामा समूह और दीपिका जैसे प्रमुख केरल प्रिंट मीडिया का मुख्यालय शहर में है। कोट्टायम प...