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बहादुर शाह जफर का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

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बहादुर शाह जफर भारतीय स्वतत्रता संग्राम के महान सेनानी थे। वे एक त्यागी और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे।  भारत के अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर का जन्म 24 अक्तूबर, 1775 को  दिल्ली के  लाल किले में हुआ था। उनकी माता का नाम लाल बाई था। उनका लालन-पालन राजकुमारों की तरह हुआ और उन्हें अरबी, फारसी और राजनीति की उच्च शिक्षा दी गई। बहादुर शाह जफर बचपन से ही घुड़सवारी, तलवार चलाने और निशानेबाजी में अद्वितीय रहे। अपने पिता की मृत्यु के पश्चात वे सिंहासन पर बैठे। इस समय देश की अवस्था बहुत ख़राब हो रही थी। अंग्रेज भारत में पूरी तरह फैल चुके थे और अपने साम्राज्य-विस्तार में लगे हुए थे। अब उन्होंने राजा महाराजाओं और दिल्‍ली के सम्राट के शासन प्रबंध में भी हस्तक्षेप करना आरंभ कर दिया था। बहादुर शाह को बचपन से ही अंग्रेज़ों से चिढ़ थी। उनके मन में यह बात बैठी हुई थी कि अंग्रेज विदेशी हैं, इन्हे देश से निकाल ही देना चाहिए। बहादुर शाह जफर का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान बहादुर शाह जफर जब गद्दी पर बैठे तो देश में  इस्ट इंडिया कंपनी का जाल बिछा हुआ था। बहादुर शाह यह अच्छी...

स्वामी दयानंद सरस्वती का जीवन परिचय और आजादी में योगदान

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उन्नीसवीं शताब्दी में  भारत के पुनर्जागरण के लिए जो विविध आंदोलन प्रारंभ हुए, उनमें आर्य समाज का स्थान सर्वोपरि है।इसके संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती पुनर्जागरण की उस प्रवृत्ति के प्रतिनिधि थे जिसने अपनी प्रेरणा पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान से ग्रहण न कर प्राचीन शास्त्रों से प्राप्त की थी। वस्तुतः स्वाधीनता प्राप्ति का राष्ट्रीय आंदोलन शुरू ही एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण से हुआ। भारत में सदियों के विदेशी शासन के कारण भारतीय संस्कृति और धर्म को बड़ा धक्का लगा। सांस्कृतिक मूल्यों की ओजस्विता जाती रही और उनका ह्रास होने लगा। लोगों में हीनत्व भावना बढ़ने लगी। सांस्कृतिक पुनर्जागरण ही इस दुर्दशा का उपचार था। राजनैतिक आंदोलन से पहले उसे आना ही था, क्योंकि उसी के आधार पर किसी ऐसे राजनैतिक आंदोलन की इमारत खड़ी की जा सकती थी, जिसके लिए निष्ठा, साहस तथा आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। इस महान सांस्कृतिक आंदोलन का प्रवर्तन करने वाले नेताओं में स्वामी दयानंद सरस्वती प्रमुख थे। अपने प्रचंड आंदोलन के फलस्वरूप वे एकविवादास्पद व्यक्ति बन गए थे। लोग उन्हें एक महान समाज सुधारक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का...

लखनऊ के क्रांतिकारी और 1857 की क्रांति में अवध

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1857 के स्वतंत्रता संग्राम में  लखनऊ के क्रांतिकारी ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई। इन लखनऊ के क्रांतिकारी पर क्या-क्या न ढाये जुल्मों सितम इन फिरंगियों ने भारतीयों पर। 1857 का विद्रोह शुरू होते ही तमाम लोगों को जानवरों की तरह जेलों में ठूस दिया गया। अनेक लोग नज़रबन्द कर दिये गये। तुलसीपुर के राजा दुर्गविजय सिंह एक साल तक नज़रबन्द रहे। बीमार हो गये इलाज न होने की वजह से दिलकुशा में मृत्यु हो गयी।  दिल्ली में भी विद्रोह हो जाने के कारण शाहजादे मिर्जा मोहम्मद शिकोह और मिर्जा हैदर शिकोह लखनऊ भाग आये थे मगर यहां आते ही इन्हें भी नज़रबन्द कर दिया गया।  नवाब सआदत अली खां के साहबज़ादे मिर्जा मोहम्मद हसन खाँ बेलीगारद में नजरबन्द थे। हैजा हो जाने के कारण उनका इन्तकाल हो गया। मरने के बाद उन्हें शहीदमर्द की कब्र के करीब ही बेलीगारद में दफन कर दिया था।  नवाब वाजिद अली शाह के भाई जान मुस्तफा अली भी बेलीगारद में नज़रबन्द थे। सन्‌ 1857 की इस जंगे आज़ादी में अवध के ताललुकेदारों व ज़मीदारों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। सैय्यद कमालुद्दीन के अनुसार गोण्डा के राजा देवी बख्श सिंह 3000...

बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय और विचार

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स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं उसे लेकर रहूंगा” के उद्घोषक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का स्थान स्व॒राज्य के पथ-गामियों मे अग्रणीय है। उनकी दृढता का महामंत्र देश-विदेश में विद्युत की तीव्रगति की तरह गूंजा और दलितों एवं पीड़ितों के लिए अमर संदेश बन गया। स्वतंत्र भारत का बच्चा-बच्चा इस बात से परिचित है कि उपर्युक्त मंत्र को फूंकने वाले तिलक ही थे। भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास मे आपका अद्वितीय स्थान है। देश की राजनीति को उम्र रूप देने, उसे जनसाधारण तक पहुंचाने और उसके लिये जीवन अर्पण करने वाले कार्यकर्ता तैयार करने का महत्त्वपूर्ण कार्य आपने ही सर्वप्रथम किया। लाला लाजपत राय का जीवन परिचय हिन्दी में अंग्रेज उन्हें भारतीय असंतोष के जनक कहते थे। वास्तव में वह भारतीय राजनैतिक असंतोष के जनक, देश के पुण्य पुरुष, महान्‌ गरम नेता, तत्त्वज्ञानी, राजनीतिज्ञ, आदर्श पत्रकार, महान शिक्षाविद थे। वे भारतीय जनता के हृदय में निवास करने वालें आराध्यदेव थे। उनका कठोर संघर्ष पूर्ण जीवन प्रजातंत्र के निर्माण के लिए समर्पित था। वे भारतीय जनता के कल्याण हेतु जन्मे और उसी की पूर्ति हेतु मरे। जनसाधारण ने ...