लखनऊ के क्रांतिकारी और 1857 की क्रांति में अवध
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में लखनऊ के क्रांतिकारी ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई। इन लखनऊ के क्रांतिकारी पर क्या-क्या न ढाये जुल्मों सितम इन फिरंगियों ने भारतीयों पर। 1857 का विद्रोह शुरू होते ही तमाम लोगों को जानवरों की तरह जेलों में ठूस दिया गया। अनेक लोग नज़रबन्द कर दिये गये। तुलसीपुर के राजा दुर्गविजय सिंह एक साल तक नज़रबन्द रहे। बीमार हो गये इलाज न होने की वजह से दिलकुशा में मृत्यु हो गयी। दिल्ली में भी विद्रोह हो जाने के कारण शाहजादे मिर्जा मोहम्मद शिकोह और मिर्जा हैदर शिकोह लखनऊ भाग आये थे मगर यहां आते ही इन्हें भी नज़रबन्द कर दिया गया। नवाब सआदत अली खां के साहबज़ादे मिर्जा मोहम्मद हसन खाँ बेलीगारद में नजरबन्द थे। हैजा हो जाने के कारण उनका इन्तकाल हो गया। मरने के बाद उन्हें शहीदमर्द की कब्र के करीब ही बेलीगारद में दफन कर दिया था। नवाब वाजिद अली शाह के भाई जान मुस्तफा अली भी बेलीगारद में नज़रबन्द थे। सन् 1857 की इस जंगे आज़ादी में अवध के ताललुकेदारों व ज़मीदारों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। सैय्यद कमालुद्दीन के अनुसार गोण्डा के राजा देवी बख्श सिंह 3000...