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विजयवाड़ा पर्यटन - विजयवाड़ा के टॉप 10 दर्शनीय, ऐतिहासिक, मनोरंजक स्थल

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विजयवाड़ा का समृद्ध अतीत और समृद्ध उपस्थिति है। कृष्णा नदी के किनारे स्थित, विजयवाड़ा अपने पश्चिम में सुरम्य इंद्रकीलाद्री पहाड़ियों और इसके उत्तर में, बुदामेरू नदी है। संस्कृति और राजनीति के साथ एसोसिएशन और एक व्यापार केंद्र होने के कारण शहर ने आंध्र प्रदेश का दिल कहने की प्रसिद्धि अर्जित की है। इस क्षेत्र में पाई जाने वाली पाषाण युग कलाकृतियों से संकेत मिलता है कि यह जगह प्राचीन काल में बसा थी। उपजाऊ मिट्टी आमों की कुछ बेहतरीन किस्मों का उत्पादन करती है। विजयवाड़ा का रेलवे स्टेशन भारत के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक है। आंध्र प्रदेश के इस तीसरे सबसे बडे शहर को ‘आंध्र प्रदेश की बिजनेस कैपिटल’भी कहा जाता है। विजयवाड़ा पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। विजयवाड़ा के पर्यटन स्थल या विजयवाड़ा के दर्शनीय स्थलों मे विजयवाड़ा की ऐतिहासिक धरोहरों, खुबसूरत सुंदर पहाड़ी क्षेत्र और वातावरण मुख्य भूमिका निभाता है। विजयवाड़ा की यात्रा, विजयवाड़ा भ्रमण, विजयवाड़ा के आकर्षक स्थलो की सूची बहुत लम्बी है। यहां हम आपको विजयवाड़ा पर्यटन के अंतर्गत आने वाले टॉप 10 दर्शनीय स्थलों के बारे मे विस्तार से नी...

वारंगल का इतिहास और वारंगल के पर्यटन स्थल

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वारंगल (warangal)  तेलंगाना राज्य का एक प्रमुख शहर है, वारंगल एक जिला मुख्यालय और ऐतिहासिक शहर है। यह शहर यहां स्थित ऐतिहासिक वारंगल का किला के लिए भी जाना जाता है, बड़ी संख्या में इतिहास में रूची रखने वाले पर्यटक इसकी ओर आकर्षित होते हैं, अपने इस लेख में हम इस ऐतिहासिक शहर वारंगल का इतिहास और वारंगल के पर्यटन स्थलों के बारे में विस्तार पूर्वक जानेंगे।     वारंगल का इतिहास   मध्य काल में वारंगल एक हिंदू शहर हुआ करता था तथा इसका बहमनी राज्य और दिल्‍ली सल्तनत से झगड़ा होता रहता था। यहाँ काकतीय वंश का शासन हुआ करता था। इस वंश का पहला राजा बेत प्रथम था। उसने कल्याणी के चालुक्य राजा सोमेश्वर प्रथम (1042-68) के आधिपत्य में अपने राज्य की नींव डाली। सोमेश्वर प्रथम ने उसके उत्तरा- धिकारी प्रोल प्रथम और बेत द्वितीय को कुछ जिले और दे दिए, परंतु उनका उत्तराधिकारी चालुक्य राजा विक्रमादित्य षष्ठ (1076-1126) के काल में 1115 ई० में स्वतंत्र हो गया। उसने तेलंगाना और आंध्र के प्रदेश जीत लिए। उसने चालुक्य राजा तैलप तृतीय को बंदी बना लिया। उसके पुत्र प्रताप रूद्रदेव प्रथम (1168-99) ने ...

पेनुकोंडा का इतिहास और पेनुकोंडा का किला

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पेनुकोंडा ( Penukonda )आंध्र प्रदेश राज्य का एक ऐतिहासिक नगर है, जो यहां स्थित ऐतिहासिक पेनुकोंडा का किला के लिए जाना जाता है। पहले यह  आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में था सन् 2022 में जिले का विभाजन हुआ और पेनुकोंडा नवनिर्मित जिला श्री सत्य साईं में आ गया। पर्यटकों के लिए पेनुकोंडा की स्वप्न के कम नहीं है। यहां की ऐतिहासिक धरोहरें पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती है। इसलिए यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते है।     पेनुकोंडा का इतिहास     1565 में तलीकोटा की लड़ाई में विजयनगर साम्राज्य के अंतिम शासक रामराय की मृत्यु के बाद उसके भाई तिरुमल ने शासन की बागडौर अपने हाथ में ले ली थी, परंतु उसके पास शासन चलाने के लिए पर्याप्त साधन नहीं थे। उसने विजयनगर छोड़ दिया और पेनुकोंडा में रहना आरंभ कर दिया। विजयनगर में वातावरण रामराय के पुत्र पेडा तिरुमल अर्थात्‌ टिम्मा के पक्ष में था। इस प्रकार तिरुमल के वास्तविक रूप में शासक बनने में छह वर्ष लगे और इस दौरान राज्य में अराजकता बनी रही।   पेडा तिरुमल ने अपने चाचा तिरुमल के विरुद्ध बीजापुर के सुल्तान अली आदिलशाह से सह...

मसूलीपट्टम के दर्शनीय स्थल - मछलीपट्टनम पर्यटन स्थल

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मसूलीपट्टम जिसका वर्तमान नाम मछलीपट्टनम है। मसूलीपट्टम की स्थापना अरब के व्यापारियों द्वारा 14वीं शताब्दी में की गई थी। मसूलीपट्टम यह स्थान  आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा क्षेत्र में है। तथा कृष्णा जिले में है। इसका प्राचीन नाम मसालिया है। यहाँ अंग्रेजों ने 1613 ई० में एक कारखाना लगाया था। मसूलीपट्टम का इतिहास दिसंबर, 1669 में फ्रांसीसियों ने भी यहाँ अपना दूसरा कारखाना स्थापित किया था। गोलकुंडा के राजा ने फ्रांसीसी कंपनी को आयात- निर्यात कर से मुक्त कर दिया था। फ्रांसीसियों की सहायता से हैदराबाद का निजाम बनने के उपलक्ष्य में मुजफ्फरजंग ने दिसंबर, 1750 में इसे डुप्ले को दे दिया था। 7 दिसंबर, 1759 को इसे अंग्रेजों ने कर्नल फोर्ड के नेतृत्व में जीत लिया था।   संगम युग और मुगल काल के दौरान मसूलीपट्टम व्यापार का एक केंद्र था और यहाँ से पेरू व फारस को वस्तुएँ भेजी जाती थीं। प्राचीन काल में यह व्यापार के लिए इतना अधिक प्रसिद्ध था कि मुबारक शाह के सेनानायक खुसरो खाँ ने मसूलीपट्टम पर आक्रमण करके यहाँ के एक समृद्ध व्यापारी ख्वाजा तकी का धन हड़प लिया था। मौर्य काल में यहाँ से जावा, सुमात्रा,...

तिरूपति बालाजी दर्शन - तिरुपति बालाजी यात्रा

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तिरूपति बालाजी भारत वर्ष के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों मे से एक है। यह आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले मे स्थित है। तिरूपति तमिल भाषा का शब्द है। तिरू का अर्थ है  श्री  तथा पति का अर्थ है  प्रभु । इस प्रकार तिरूपति का सम्मिलित अर्थ है –  श्री प्रभु । तिरूमलै वह पर्वत है, जिस पर लक्ष्मी जी के साथ स्वयं विष्णु जी विराजमान है। तिरूपति इसी पर्वत के नीचे बसा हुआ नगर है। कपिलतीर्थ मैं स्नान एवं कपिलेश्वर भगवान का दर्शन करके यात्री पर्वत पर चढते है। पातालेश्वर मंदिर कालपी धाम जालौन उत्तर प्रदेश तिरूमलै पर्वत का दूसरा नाम वेंकटाचल है। यहां पर श्री तिरूपति बालाजी (वेंकटेश्वर भगवान) का स्थान है। कहते है, कि साक्षात शेषजी यहा पर्वत रूप मे स्थित है, इसलिए इसे शेषाचलम भी कहते है। तिरूपति बालाजी का महात्म्य स्कंदपुराण के अनुसार ‘सभी वेद भगवान श्री निवास का ही प्रतिपादन करते है। यज्ञ भी श्री निवास की ही साधना के साधन है। अधिक क्या सभी लोग श्री निवास के ही आश्रित है। उनसे भिन्न कुछ भी नहीं है। अतः सभी यज्ञ, तप, दोनो के अनुष्ठान तथा तीर्थों मे स्ना का जो फल है, उससे करोड गुना अधिक फल श्री नि...

कालहस्ती मंदिर का इतिहास, कालहस्ती मंदिर तिरूपति की कथा

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श्री कालाहस्ती मंदिर आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में तिरूपति शहर के पास स्थित कालहस्ती नामक कस्बे में एक शिव मंदिर है। ये मंदिर पेन्नार नदी की शाखा स्वर्णामुखी नदी के तट पर बसा है और कालहस्ती के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण भारत में स्थित भगवान शिव के तीर्थस्थानों में इस स्थान का विशेष महत्व है। दक्षिण भारत में भगवान शिव के जो पंचतत्व लिंग माने जाते है, उनमें कालहस्ती वायुतत्व लिंग है। यहां 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ भी है। यहां देवी सती का दक्षिण स्कंध गिरा था। श्री कालहस्ती मंदिर स्वर्णमुखी नदी के तट पर है। इस नदी में जल कम रहता है। नदी के पार तट पर ही यह मंदिर है। कालहस्ती मंदिर की कथा – कालहस्ती मंदिर की कहानी कहते है कि नील और फणेश नाम के दो भील लड़के थे। उन्होंने शिकार खेलते समय वन में एक पहाड़ी पर भगवान शिव की लिंग मूर्ति देखी। नील उस मूर्ति की रक्षा के लिए वही रूक गया और फणीश लौट आया। घोड़ाखाल मंदिर या सैनिक स्कूल घंटी वाला मंदिर नील ने पूरी रात मूर्ति का पहरा इसलिए दिया ताकि कोई जंगली पशु उसे नष्ट न कर दे। सुबह वह वन में चला गया। दोपहर के समय जब वह लौटा तो उसके एक हाथ ...

विशाखापट्टनम पर्यटन - विशाखापट्टनम के टॉप 10 दर्शनीय स्थल

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विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश राज्य का एक बंदरगाह शहर है। अपने आकार के कारण विशाखापट्टनम आंध्रप्रदेश के शहरों में दूसरे स्थान पर है। इस शहर को भारत में सबसे पुराना शिपयार्ड रखने का श्रेय भी जाता है। और इसमें प्राकृतिक बंदरगाह है जो भारतीय पूर्वी तट पर अपनी तरह का पहला बंदरगाह है। विशाखापट्टनम कको विजा़ग के नाम से भी जाना जाता है। शहर के सुरम्य परिदृश्य विशाखापट्टनम पर्यटन मे महत्वपूर्ण योगदान देते है। विशाखापट्टनम पर्यटन स्थलों मे अनेक सुरम्य, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। जो बरबस ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है। विदिशा के पर्यटन स्थल – विदिशा के दर्शनीय स्थल यदि आप ऐसे गंतव्य की तलाश करते हैं जो प्राकृतिक सुंदरियों और मानव निर्मित चमत्कारों के साथ आपकी आत्माओं को उभरता रहे, विशाखापत्तनम के दर्शनीय स्थलों, विशाखापत्तनम आकर्षक स्थलो, विशाखापट्टनम की सैर, विशाखापट्टनम भ्रमण, या विशाखापत्तनम की यात्रा जरूर करे। आपके विशाखापत्तनम टूर को आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए हम यहां विशाखापट्टनम के टॉप 10 टूरिस्ट प्लेस की सूची और उनके बारे मे विस्तार से जानकारी नीचे दे रहे है:— विशाखापट्टनम पर्...