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चेन्नई का इतिहास - चेन्नई के टॉप 15 दर्शनीय स्थल

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चेन्नई भारत के राज्य तमिलनाडू की राजधानी है। जिसे मद्रास के नाम से भी जाना जाता है। चेन्नई भारत का एक खूबसूरत शहर है। चेन्नई के दर्शनीय स्थल इसकी खूबसूरती को और बढाते है। यूं तो चेन्नई और उसके आस पास अनेक पर्यटन स्थल है। लेकिन अपने इस लेख में हम आपको चेन्नई के टॉप 15 पर्यटन स्थलो के बारे में यहा जानकारी देगें। यदि चेन्नई के दर्शनीय स्थल, चेन्नई के पर्यटन स्थल, चेन्नई के आकर्षक स्थल, चेन्नई टूरिस्ट पैलेस, चेन्नई फेमस टूर डेस्टिनेशन या चेन्नई पर्यटन से संबंधित ऐसी किसी जानकारी को इंटरनेट पर सर्च कर रहे है। तो हमारा यह लेख आपके लिए ही है। हमारे इस लेख में आपको अपने इन सभी सवालो के जवाब मिल जाएगें। चेन्नई एक ऐसा शहर है जो अपने ऐतिहासिक, सास्कृतिक धरोहरो के साथ साथ अपने खूबसूरत समुद्री तटो के लिए दुनिया भर के पर्यटको में जाना जाता है। और सबसे बडी बात तो यह है कि दुनिया का दुसरा सबसे बडा बीच यानि समुद्र तट भी यही पर है। इसलिए चेन्नई सैर सपाटे और पर्यटन की दृष्टि से भारत का एक महत्वपूर्ण शहर है। आइए अपने इस लेख में इन्ही खूबसूरत चेन्नई के दर्शनीय स्थल व चेन्नई के पर्यटन स्थलो के बारे में विस्...

कन्याकुमारी के दर्शनीय स्थल - कन्याकुमारी के टॉप 10 पर्यटन स्थल

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भारत के तमिलनाडु राज्य में भारत की धरती के अंतिम छोर पर स्थित कन्याकुमारी एक खूबसूरत शहर है। यहा अरब सागर, हिन्द महासागर और बंगाल की खाडी का पानी एक दूसरे से आलिंगन करता है। कन्याकुमारी के दर्शनीय स्थल वैसे तो खास प्रसिद्ध नही है। लेकिन समुद्र का किनारा और भारत की धरती का अंतिम छोर होने के साथ साथ कन्याकुमारी वह स्थान है। जहां स्वामी विवेकानंद जी ने योग साधना की थी। इसे  “केप कीमोरिन”  के नाम से भी जाना जाता है। अपने इस लेख मे हम भारत के इस अंतिम छोर की यात्रा करगे। और इन सवालो के बारे में जानेगें कन्याकुमारी के दर्शनीय स्थल, कन्याकुमारी के पर्यटन स्थल, कन्याकुमारी भारत आकर्षक स्थल, कन्याकुमारी टूरिस्ट पैलेस, कन्याकुमारी टूरिस्ट डेस्टिनेशन, कन्याकुमारी कहां है, कन्याकुमारी कैसे पहुचे, कन्याकुमारी में कहा घुमें, कन्याकुमारी में देखने लायक स्थल। यदि आप इन्टरनेट पर इन सभी सवालो को सर्च कर रहे है तो हमारी यह पोस्ट आपके लिए ही है। इसमे हम आपको कन्याकुमारी के टॉप 10 पर्यटन स्थलो के बारे में विस्तार से बताएगें।   कन्याकुमारी के दर्शनीय स्थल   कन्याकुमारी के टॉप 10 पर्यटन ...

कांचीपुरम का इतिहास और दर्शनीय स्थल

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कांची यह शहर मद्रास के पास आधुनिक कांचीपुरम है। यह  तमिलनाडु राज्य का प्रमुख शहर है। तीसरी चौथी शताब्दी में कांचीपुरम में पल्लव शासकों का राज्य था। ये राजा पहले सातवाहनों को अपना अधिपति मानते थे और बाद में स्वतंत्र हो गए थे। सबसे पहला स्वतंत्र राजा सिंहवर्मा प्रथम (275-300) था। उसका एक लेख गुंदूर जिले के पलनाद तालुके में मिला है। यह प्राकृत में है और इसके अक्षर ईक्ष्वांकुओं के लेखों से मिलते हैं, जिससे प्रतीत होता है कि वह ईक्ष्वांकुओं का समकालीन था।   कांचीपुरम का इतिहास इस कुल का एक शासक स्कंद वर्मा था। उसने अश्वमेध, वाजपेय और अग्निष्टोम यज्ञ किए और कांचीपुरम को अपनी राजधानी बनाया। उसने तीसरी शताब्दी के अंत में राज्य किया। इस वंश का एक अन्य शासक विष्णुगोप समुद्रगुप्त (335-75 ई०) का समकालीन था। समुद्रगुप्त के दक्षिण अभियान के समय उसने अपने सामंत पालक्क उग्रसेन की सहायता से समुद्रगुप्त का विरोध किया था, परंतु हार गया था। इस वंश के अन्य राजाओं में स्कंद वर्मा (370-85), वीर वर्मा (385-400), स्कंद वर्मा द्वितीय (400-36), सिंह वर्मा द्वितीय (436-40), स्कंद वर्मा तृतीय (460-80), न...

अर्काट का इतिहास - अर्कोट कहा है

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सतरहवीं-अट्ठारहवीं शताब्दी में  कर्नाटक दक्खन (हैदराबाद) के निजाम का एक सूबा था, जिसकी राजधानी अर्काट थी। इसका प्रशासनिक मुखिया सूबेदार होता था। उसे नवाब कहा जाता था। औरंगजेब ने 1690 ई० में जुल्फीकार अली खाँ को यहाँ का सबसे पहला नवाब बनाया था। उसने 1703 ई० तक शासन किया। उसके बाद दाउद खाँ (1703-10), मुहम्मद सैयद सआदत उल्ला खाँ (1710-32) और दोस्त अली (1732-40) यहां के नवाब हुए। परंतु हैदराबाद का निजाम मराठों और उत्तरी भारत के मामलों में इतना अधिक व्यस्त रहता था कि वह अर्काट पर अपना पूर्णाधिकार स्थापित नहीं कर पाता था। 1740 में मराठों ने दोस्त अली को मारकर यहां खूब लूट-पाट की तथा उसके दामाद चंदा साहिब को कैद करके सतारा ले गए।   अर्काट का इतिहास   दोस्त अली के पुत्र सफदर अली खाँ ने मराठों को एक करोड़ रु, देने का वचन देकर अपनी जान और अपना राज्य बचाया। परंतु उसके एक चचेरे भाई ने 1742 में उसकी हत्या कर दी। उसके अवयस्क पुत्र सआदत उल्ला खाँ द्वितीय उर्फ मुहम्मद सैयद को नवाब बनाया गया। तब 1743 में हैदराबाद का निजाम यहां शांति स्थापित करने आया। 1744 में वह अपने एक विश्वस्त सेवक अनव...

करूर का इतिहास और दर्शनीय स्थल

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करूर (karur) भारत के तमिलनाडु राज्य में एक प्रमुख नगर और जिला मुख्यालय है। करूर यह वन्नी नदी के किनारे स्थित है। इसका प्राचीन नाम वंजी है। दूसरी और तीसरी शताब्दी में करूर चेर राजाओं की दूसरी शाखा की राजधानी थी। इस शाखा के राजा केरल में मरंदाई की मुख्य शाखा के समकालीन थे। इसका प्रथम ज्ञात राजा अंडुवन था। वह एक विद्वान था। आय और पारी उसके समकालीन सरदार थे।   करूर का इतिहास – करूर हिस्ट्री इन हिन्दी आय ने तमिल प्रदेश के कई भागों पर शासन किया। पारी का राज्य कोडुंगुरम अथवा पिरानमलाई नामक पहाड़ी के चारों ओर था। पारी के दरबार में कपिलार नाम का एक कवि रहता था। पारी की मृत्यु के बाद कपिलार अंडुबन के पुत्र सेलवक्कडुगो वाली आदन के दरबार में चला गया। आदन के बाद उसका पुत्र पेंसुजेराल इरुंपोराई (190 ई०) शासक बना। उसने आदिगाईमान सरदारों की राजधानी टगादुर (सेलम जिले में धर्मपुरी) के गढ़ को ढ़ा दिया। उसने कलुवुल नामक विद्रोही का दमन करके उसके किले पर कब्जा कर लिया। उसने अनेक यज्ञ भी किए।   आदिगाईमान, जिसे नेडुमान अंजी भी कहा जाता था, इरुपोराई का शत्रु था। अंजी के दरबार में ओवैयार नामक कवयित्री...

महाबलीपुरम का इतिहास - महाबलीपुरम दर्शनीय स्थल

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महाबलीपुरम यह स्थान तमिलनाडु में मद्रास (चेन्नई) के दक्षिण में 50 किमी दूर है। इसका निर्माण पल्‍लव राजा मम्मल नरसिंह वर्मन प्रथम (630-638 ई०) ने कराया था। प्रारंभ इसे मम्मलपुरम कहा जाता है। यह कभी पल्‍लव राजाओं की प्रमुख बंदरगाह होती थी। यह स्थान यहां स्थित महाबलीपुरम रथ मंदिर के लिए भी जाना जाता है।   महाबलीपुरम का इतिहास   महाबलीपुरम में मम्मल शैली में शिलाओं को काट-काटकर बनाए गए मंदिर और मूर्तियां पाई गई हैं। यहां विभिन्‍न देवी-देवताओं के दस मंडप भी हैं, जिनमें से वराह, त्रिमूर्ति, आदि वराह, महिष मर्दिनी और पांडव मंडप विशेष उल्लेखनीय हैं। नरसिंह वर्मन प्रथम द्वारा बनवाए गए द्रौपदी, अर्जुन, भीम, सहदेव, युधिष्ठिर, गणेश, पिजरी और वल्लैकुट्टै के आठ रथ मंदिर भी पाए गए हैं। इन रथ मंदिरों को पगोडा भी कहा जाता है। इनके समीप ही हाथी, शेर और बैल की मूर्तियां हैं। उन दिनों शहर में आदमियों और पशुओं दोनों की शानदार मूर्तियां जगह-जगह लगी होती थीं। इनमें से ज्यादातर मूर्तियां बढ़िया दर्जे की थीं।   महाबलीपुरम नरसिंह वर्मन द्वितीय है (695-722 ई०) द्वारा राजसिंह शैली में बनवाए गए मंदिर...

तिरुचिरापल्ली का इतिहास और दर्शनीय स्थल

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त्रिचिनापल्ली  तमिलनाडु राज्य में तंजौर के 55 किमी पश्चिम में है। इसका आधुनिक नाम तिरुचिरापल्ली है। इसे त्रिची भी कहा जाता है। द्वारसमुद्र के होयसल वंश का अंतिम शासक बल्लाल तृतीय 1342 में मुस्लिमों से युद्ध करता हुआ तिरुचिरापल्ली में ही मारा गया था। 1732 में अर्काट के नवाब दोस्त अली खान ने अपने दामाद चंदा साहिब को त्रिचनापल्‍ली पर कब्जा करने के लिए भेजा था। चंदा साहिब ने यहां की विधवा रानी को प्रेम-पाश में फंसाकर तिरुचिरापल्ली पर कब्जा कर लिया।   तिरुचिरापल्ली का इतिहास   सन् 1740 में मराठों ने इसे उससे छीन लिया। पेशवा ने सात साल तक चंदा साहिब को बरार और सतारा में कैद करके रखा, परंतु 1748 में वह सतारा से बच निकला। अगस्त, 1749 में हैदराबाद के मुजफ्फरजंग और डुप्ले की सहायता से जब उसने अर्काट पर धावा बोला, तो अर्काट का नवाब अनवरुद्दीन मारा गया और उसके पुत्र मोहम्मद अली ने तिरुचिरापल्ली के किले में शरण ली। अब डुप्ले ने त्रिचिनापल्‍ली पर पुनः कब्जा करने का विचार किया। उसने एक बड़ी सेना त्रिचिनापल्‍ली भेजी, परंतु वह सेना तंजौर पर कब्जा करने के असफल प्रयास में लग गई। उधर त्रिचि...

रामेश्वरम यात्रा - रामेश्वरम दर्शन - रामेश्वरम टेम्पल की 10 रोचक जानकारी

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हिन्दू धर्म में चार दिशाओ के चार धाम का बहुत बडा महत्व माना जाता है। जिनमे एक बद्रीनाथ धाम दूसरा द्वारका धाम तीसरा जगन्नाथ धाम और चोथा रामेश्वरम धाम है। अपने एक पिछले लेख में हम बद्रीनाथ धाम का वर्णन कर चुके है। अपने इस लेख में हम रामेश्वरम धाम का वर्णन करेगें और रामेश्वरम यात्रा का सम्पूर्ण विवरण आपको देगें। रामेश्वरम धाम की गणना द्वादश ज्योतिर्लिंगो में भी की जाती है। जिससे इसका महत्व और भी बढ जाता है। अपनी 12 ज्योतिर्लिगों की यात्रा के अंतर्गत हमने अन्य द्वादश ज्योतिर्लिगों की जानकारी दी थी जिनका विवरण इस प्रकार है:— सोमनाथ ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम का इतिहास काशी विश्वनाथ धाम वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भीमशंकर ज्योतिर्लिंग त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास नागेश्वर ज्योतिर्लिंग घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा     रामेश्वरम यात्रा   चार दिशाओ के चार धामों में रामेश्वरम दक्षिण दिशा का धाम है। यह एक समुद्री द्वीप पर स्थित है। समुंद्र का एक भाग बहुत संकीर्ण हो गया है, उस पर पाम्बन स्...

मीनाक्षी मंदिर मदुरै - मीनाक्षी मंदिर का इतिहास, दर्शन, व दर्शनीय स्थल

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दोस्तो सबसे पहला सवाल उठता है कि मीनाक्षी मंदिर कहाँ है? तो हम आपको बता दे यह भव्य व सुंदर मंदिर दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के मदुरै मे स्थित है। दक्षिण भारत तीर्थ स्थानों से भरा पडा है। इसी कारण कभी कभी साउथ इंडिया की रेलवे को तीर्थ यात्रियों की रेलवे कहा जाता है। परंतु दक्षिण भारत मे रामेश्वरम तथा मदुरै को तीर्थों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यहां के मंदिर प्राचीन काल मे बने हुए है। तथा इनका इतिहास भी सदियों पुराना है। मीनाक्षी मंदिर का इतिहास भी इसी श्रेणी में आता है। यहां के मंदिर भव्य और कला की दृष्टि से उच्चकोटि के है। यात्री इन्हें देख कर सम्मोहित से हो जाते है। उत्तर भारत में ऐसा कोई मंदिर नही है, जिससे इन मंदिरों की तुलना की जा सके। इन्ही भव्य मंदिरों मे से एक मीनाक्षी मंदिर है। अपनी मदुरै की यात्रा के दौरान हम इसी पवित्र मीनाक्षी तीर्थ की यात्रा करेंगे और उसके बारे मे विस्तार से जानेगें।   मीनाक्षी मंदिर की धार्मिक पृष्ठभूमि   इस पवित्र तीर्थ के बारे मे कहा जाता है कि- पहले यहां कदंब वन था। कदंब के वृक्ष के नीचे भगवान सुंदरेश्वर का स्वयंभू लिंग था। देवता उसकी पू...