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चीन की दीवार कितनी चौड़ी है, चीन की दीवार का रहस्य

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प्राचीन काल से ही संसार के सभ्य देशों में चीन का स्थान अग्रणी था। कहते हैं चीन ही वह देश है जिसने विश्व को सभ्यता की प्रारम्भिक शिक्षा दी थी। हमारे वैदिक युग के साहित्य मे भी इस देश की गौरव गरिमा की अनेक गाथाएँ यत्र-तत्र बिखरी पड़ी है। यहाँ के निवासी दस्तकारी और कारीगरी में संसार के अन्य देशों के गुरु समझे जाते थे। अब भले ही यूरोप आदि महाद्वीप के विभिन्‍न देश अपनी विद्वता और कला-कौशल का बोल पीटते हों, पर सृष्टि के प्रारम्भ मे जब उन देशों के निवासी नग्नावस्था में रहा करते थे, जंगलों में घूमा करते थे तथा पहाड़ो और पड़ाड़ियों की कन्दराओं मे जानवरों की तरह जीवन व्यतीत करते रहते थे, उन दिनो चीन और भारत आदि एशिया महाद्वीप देशों के लोग अच्छे-अच्छे वस्त्र धारण करते थे तथा अपने आवास के लिए इन देशो के लोगों ने सुन्दर-सुन्दर महल तक बनाये थे।’चीन की दीवार’ जो विश्व के प्रमुख आश्चर्यो मे से एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है और जिसका उल्लेख हम अपने इस लेख में करेंगे और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से जानेंगे:—-     चीन की दीवार कब बनी थी? चीन की दीवार की उंचाई कितनी है? चीन की दीवार कितनी...

जियस की मूर्ति - ओलंपिया में जियस की मूर्ति जिसको बनाने वाले को खुद आश्चर्य हुआ

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जिस प्रकार एशिया महाद्वीप मे भारत अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृत के लिये संसार में अग्रणी माना जाता है, उसी प्रकार यूरोपीय महाद्वीप में ग्रीस एवं  रोम सभ्यता और संस्कृति के आदि गुरु समझे जाते हैं। ग्रीस देश की सभ्यता बहुत ही प्राचीन है। इस देश ने भौतिक संसार को बहुत कुछ सीख दी है। एक जमाना था कि जब इस देश की पताका संस्कृति और सभ्यता के क्षेत्र में काफी ऊंची लहरा रही थी। उसी की बानगी है ओलंपिया में जियस की मूर्ति, परंतु आज वह बात नहीं है। इतिहास लेखकों का मत है कि पौराणिक काल में ग्रीस के निवासियों में धर्म के प्रति बडी ही प्रबल चेतना थी। लोगो के प्रत्येक कार्य का संचालन धर्म द्वारा निर्धारित सूत्रो पर ही होता था। प्राचीन काल में इस देश के लोग देवी-देवताओं को बहुत अधिक मानते थे और उनकी पूजा-अर्चना किया करते थे। प्राचीन इतिहास लेखक हेरोडोटस ने अपने इतिहास मे ग्रीस के विषय में लिखते हुए कहा है कि इस देश के लोग बडे ही धर्म भीरु थे और अपने हर काम में देवी-देवताओ को प्रमुखता देते थे। जिस प्रकार अपने देश भारत के निवासी ईश्वर के विभिन्‍न रूप को तरह-तरह की मूर्तियों में देखते हैं और उ...

एलोरा और अजंता की गुफाएं किस लिए विख्यात है?

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संसार के महान आश्चर्यों में  भारत में एलोरा और अजंता के गुफा मन्दिर अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। इन गुफाओं मे जो चित्रकारी की गई है, उन्हे देखने से ही इनकी महानता का वास्तविक मूल्याकन हो सकता है। संसार के अन्य देशों में भी अनेक गुफा मन्दिर हैं पर एलोरा और अजंता से उनकी कोई तुलना नहीं की जा सकती। अब तक संसार के भिन्‍न-भिन्‍न देशो के हजारों और लाखों कलाकार एव विद्वानों ने इन गुफा मन्दिरों को देखा है और मुक्‍त कंठ से इनकी प्रशंसा की है। प्राचीनकाल से ही भारत वर्ष कला के क्षेत्र मे संसार का अग्रणी रहा है। जिस प्रकार इस देश ने विश्व के अनेक अंधकूप में पड़े देशों को शिक्षा, संस्कृति और सभ्यता की सीख दी है, वैसे ही कला के क्षेत्र मे भी इसने संसार का नेतृत्व संभाला हैं। आज भले ही पश्चिम के राष्ट्र अपनी कलम ओर कूंची तथा छेनी और हथौडी का पराक्रम दिखलाते हो, पर आज जो कुछ भी उनके पास है, वह सब उन्हें भारत की ही देन है। संसार के बडे-बड़े विद्वान भी आज यह अस्वीकार करने की हिम्मत नही रखते कि भारत ने ही वास्तव में उन्हें शिक्षित तथा सुसंस्कृत बनाया है। एलोरा और अजंता की गुफाएं एलोरा की जुफाएं ...

अपोलो की मूर्ति का रहस्य क्या आप जानते हैं? वे आश्चर्य

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पिछले लेख में हमने ग्रीक देश की कला मर्मज्ञता का उल्लेख किया है।  जियस की विश्वप्रसिद्ध मूर्ति इसी देश के महान कलाकार की अलौकिक कृति थी। अब हम इसी देश की एक दूसरी आश्चर्य जनक वस्तु का उल्लेख कर रहे हैं। भूमध्य सागर में एक टापू है जिसका नाम “रोड्स द्वीप! है। इस द्वीप के इतिहास से पता चलता है कि सर्वप्रथम यूनान के लोग ही यहां पर पहुँचे थे और अपने निवास के लिए मकान आदि बनवाये थे। वे वीर और साहसी थे और युद्ध विद्या में पूर्ण निपुण थे। उन्होने अपनी शक्ति से रोड्स द्वीप के आस-पास के अनेक स्थानों पर अधिकार कर लिया था। अत्यन्त प्राचीनकाल में रोड्स द्वीप के रहने वाले लोग भी सभ्य और सुसंस्कृत थे। रोडस द्वीप की भूमि बडी उपजाऊ है और वहां खाने की प्राय सभी वस्तुएं पैदा होती हैं। फल-फूल के लिये तो पृथ्वी का यह हिस्सा बहुत ही प्रसिद्ध है। कहते हैं कि जब यूनानी (ग्रीक) लोगो ने इस द्वीप मे प्रवेश किया तो उन्होने एक ऊंचे पर्वत पर अपनी राजधानी बनाई।राजधानी को खूब सजाया गया। बडे-बडे सुन्दर-सुन्दर महल और देवी देवताओं के मन्दिर बनवाये गये। धीरे-धीरे रोड्स द्वीप के निवासियों की अपनी एक अलग जाति बन ...

बेबीलोन हैंगिंग गार्डन - बेबीलोन की प्रमुख विशेषताएं क्या थी?

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बेबीलोन को यदि हम स्वर्ण नगरी की समता मे रखें तो यह कोई अत्युक्ति नहीं होगी। एक जमाना था कि कृत्रिम एवं प्राकृतिक सौन्दर्यो की इस नगरी में भरमार थी। पर जैसे परमात्मा को अपनी कृति के सम्मुख उतने साज सौन्दर्य में कोई मानवी कृति पसन्द नहीं, इसीलिये इस स्वर्ण नगरी बेबीलोन के कृत्रिम अद्भुत सौन्दर्य अब केवल इतिहास के पृष्ठों ही में समाहित रह गये हैं। बेबीलोन आज भी है, वहां के पर्वत, नदी और झीलें आज भी हैं पर वहां के लोगों ने उस भूमि पर जिन अद्भुत विश्व विमोहिनी सौन्दर्यों की रचना की थी, उनके चिन्ह अब वर्तमान में नहीं है। समय के चक्र में घुलते-पिसते वे सब खत्म हो गये। बगदाद से दक्षिण की तरफ पचास मील की दूरी पर यूफतीज नदी के तट पर बेबीलोन नगर बसा हुआ है। विद्वानों में इस बात को लेकर तगड़ा मतभेद है कि इस सुन्दर नगर बेबीलोन को कब और किसने बसाया था। इतिहास के पृष्ठों में प्राचीन काल के एक बादशाह नेबुकनेजर के राज्यकाल के उल्लेख के मध्य इस बात का पता चलता है कि यह नगर की उस समय काफी उन्नति थी। उस समय यह नगर सब प्रकार से सुखी और सम्पन्न था। स्पष्ट है कि अब से लगभग चार हजार वर्ष पूर्व इस नगर की काफ...

माउसोलस का मकबरा - ताजमहल की तरह प्यार की निशानी

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इस पृथ्वी पर समय-समय पर अनेक स्मृति चिन्ह बने हैं। उनमें से कितने ही तो काल के निष्ठर थपेडों को सहते-सहते अपना निशान तक मिटा गये है और उनमें से कितने ही आज भी मौजूद है। पर जो मिट गये उनका नाम नही मिटा है, उनकी स्मृतियां आज भी इतिहास के पृष्ठों में अमिट और सुरक्षित हैं। पिछले लेख में हमने संसार के एक अदभूत समाधि मंदिर (मकबरे) का उल्लेख किया है। जिस प्रकार शहंशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में  ताजमहल जिसे अद्वितीय समाधि (मकबरा) का निर्माण कराया था, इस लेख में हम उसी प्रकार की एक अन्य विश्व प्रसिद्ध समाधि का उल्लेख करने जा रहे है। जिसे माउसोलस का मकबरा के नाम से जाना जाता है। माउसोलस का मकबरा क्यों और किसने बनवाया था बहुत ही प्राचीन काल की बात है, केरिया नामक प्रदेश का राजा माउसोलस नाम का एक व्यक्ति था। इस प्रदेश की राजधानी हेलिकोर्नसस नगर में थी। बादशाह माउसोलस की पत्नी का नाम आर्टिमिसिया था। राजा और रानी में अदभुत प्रेम था और वे एक दूसरे को अपने प्राणों से भी अधिक चाहते थे। कहते हैं कि ईसा के जन्म से 363 वर्ष पूर्व बादशाह माउसोलस की मृत्यु हो गई। रानी आर्टिमिसिया ने अप...