नवाब हयात मोहम्मद खान भोपाल राजवंश
नवाब फैज मोहम्मद खान के कोई पुत्र न था। अतएव उनके भाई हयात मोहम्मद खान मसनद पर बेठे। इस पर मृत नवाब की बेगम ने आपत्ति की। उसने शासन-सूत्र अपने हाथ में लेने की इच्छा प्रकट की। यद्यपि नवाब हयात मोहम्मद खान मसनद पर रहे, पर वे भोपाल रियासत का इन्तजाम सन्तोष-जनक नीति से न कर सके। इसका कारण यह था कि ये अपना बहुत सा समय धार्मिक क्रियाओं में व्यतीत करते थे। अतएव उन्होंने फौलाद खान नामक एक गोंड़ को अपना प्रधान मंत्री बनाया। इस समय रियासत की आमदनी में से 500000 रूपया नवाब को खर्च के लिये दिये जाने लगे और शेष 1500000 राज्य-कार्य के लिये खर्च किये जाने लगे। नवाब हयात मोहम्मद खान भोपाल रियासत सन् 1776 में जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने पुरन्दर की संधि को अस्वीकृत कर दिया, तब तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्ज मे बम्बई सरकार का समर्थन करने का निश्चय कर लिया। अतएव उन्होंने बंगाल से फौज भेजी। उसके रास्ते में भोपाल राज्य पड़ा था। उस फौज की नवाब हयात मोहम्मद खान ने यथा सम्भव हर प्रकार को सहायता की। सन् 1780 में भोपाल रियासत के तत्कालीन प्रधान मन्त्री फौलाद खाँ को किसी ने मार डाला। उसके बा...