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अटलांटिस द्वीप का रहस्य - अटलांटिक महासागर का रहस्य

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क्या कभी अटलांटिक महासागर के मध्य मे एक विशाल और विकसित सभ्यता फली फूली थी? यूनानी दार्शनिक प्लेटो द्वारा किए गए वर्णन से ऐसा लगता है कि अटलांटिस की सभ्यता उस युग की एक सर्वश्रेष्ठ और शक्तिशाली व्यवस्था थी, जिसकी स्वर्ण से तुलना करना अतिशयोक्ति न होगी। तभी अचानक एक ज्वालामुखी फटा। ऐसा लगा कि जैसे आसमान से मौत की बारिश हुई हो और अटलांटिस द्वीप महासागर की गहराईयों में विलीन हो गया। आखिरकार अटलांटिस वासियों को किस अपराध की सजा भुगतनी पडी थी ? क्या यूनान में पुरातात्विक खुदाई में निकला शहर आक्रोतिरी ही अटलांटिस महासागर का खोया हुआ शहर है? क्या प्लेटो द्वारा किया गया वर्णन सिर्फ एक कहानी ही है? इन्हीं अटलांटिक के रहस्यों के ताने-बाने मे लिपटा है इस गुप्त सभ्यता का खोया हुआ अस्तित्व। दुनिया भर के भूगर्भशास्त्री ज्वालामुखी विशेषज्ञ तथा पुरातत्वशास्त्री निरंतर इस रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए प्रयत्नशील हैं।   अटलांटिस द्वीप का रहस्य की जानकारी हिंदी में साढे तीन हजार साल पहले की एक शाम। अटलांटिस द्वीप पर बसा हुआ नगर हमेशा की तरह दिन भर का काम-काज समाप्त करके रात बिताने की तैयारिया कर रहा...

भूत प्रेत होते है - क्या भूत प्रेतों का अस्तित्व होता है

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हैरी प्राइस नामक व्यक्ति ने पहली बार 40 वर्ष तक लगातार कोशिश करके भूत प्रेत और आत्माओं को गिरफ्तार करने की चेष्टा की थी। स्पिरिट फोटोग्राफरों ने आत्माओं के चित्र खींचकर भूत प्रेतों के अस्तित्व को सिद्ध करने का अनथक प्रयास किया है। कनाडा के एक दल ने तो फिलिप्स नामक एक नकली भूत का ही निर्माण कर डाला। इन सब प्रयासों के बाद भी आज तक भूतो-प्रेतो के अस्तित्व को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं क्या जा सका है। जब भी भूत प्रेत पर विश्वास करने वालो के कथनों की जांच की गई तो उसके पीछे या तो धोखाधड़ी निकली या कोई मानसिक रोग। विज्ञान ने बार-बार इस तरह की धारणाओ का खण्डन किया है। फिर भी हर बार आम जनता के बीच इस तरह की घटनाएं घटती रहती है, जो घुमा-फिराकर भूत प्रेत और आत्माओं के अस्तित्व को सिद्ध करती हैं। ऐसा क्यो होता है? क्या भूत प्रेत और आत्माओं का अस्तित्व है? – क्या भूत प्रेत हकीकत में होते हैं? विश्व के प्रत्येक देश मे भूत ओर आत्माओं के देखे जाने अथवा उनसे मुलाकात की घटनाओं का संबंध उस देश की संस्कृति तथा धार्मिक मिथकों मे पाया गया है। भूत प्रेत और आत्माओं का अस्तित्व अधिकांशतः दृष्टाता पर टिका हुआ...

यू एफ ओ क्या है - उड़न तश्तरी का रहस्य - एलियन की खोज

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यू एफ ओ की फुल फॉर्म है अनआइडेटीफाइड फ्लाइंग ऑब्जेफ्ट्स यानी उड़न तश्तरी, उड़न तश्तरी या यू एफ ओ का रहस्य इस परमाणु युग का महानतम रहस्य है। मानव दिन रात अंतरिक्ष पर जाने के सपने देखता रहता है। क्‍या अंतरिक्षवासी भी इसी भांति पृथ्वी पर आते है? इसी प्रश्न के साथ जुडी है उड़न तश्तरियों को देखे जाने की अनगिनत घटनाएं। अमेरिकी वैज्ञानिकों की काडन कमेटी ने काफी जांच-पड़ताल करके उड़न तश्तरियों की धारणा को एकदम तर्कहीन और निराधार बताया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब हमारे सौरमंडल में अपार्थिव जीवन के चिह्न ही मौजूद नहीं है तब कोई अपार्थिव शक्ति अपने यान मे बैठकर पृथ्वी पर कैसे आ सकती है? परंतु दूसरे पक्ष का कहना है कि अंतरिक्ष मे कई आकाश गंगाएं है और कई सौर-मण्डल है। क्या गारंटी है कि यू एफ ओ का आगमन किसी दूसरे सौरमंडल से नहीं हो सकता?   यू एफ ओ की खोज विश्व के 133 देशों से 70000 ऐसी रिपोर्ट मिल चुकी है जिनमें दावा किया गया है कि वहा अनआइडटीफाइड फ्लाइग ऑव्जक्टस (UFO) देखे गए है। इन 70000 रिपार्टो में से 95 प्रतिशत घटनाए जांच-पड़ताल करने पर विमानों, मौसम के गुब्बारों, बिजली चमकने, रॉकेटों,...

लौह स्तम्भ महरौली का रहस्य - लौह स्तम्भ को जंग क्यों नहीं लगता

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महरौली (नई दिल्ली) में बने लौह स्तम्भ में कभी जंग नहीं लगता, जबकि उसका लोहा वैज्ञानिक दृष्टि से कई अशुद्धियों से भरा हुआ है। यह स्तम्भ अंतरिक्ष से आई कुछ अपार्थिय शक्तियों की मदद से बनवाया गया था या यह प्राचीन काल के मनुष्य की विप्तक्षण बुद्धि और ज्ञान की ही उपज है? अपने इस लेख में हम महरौली के इसी लौह स्तम्भ पर जंग क्यों नहीं लगता इसके पिछे छुपे रहस्य को जानेंगे। वैज्ञानिकों ने लौह स्तम्भ के रहस्य को जानने के लिए क्या क्या प्रयत्न किते और उन्हें कितनी सफलता मिली। लौह स्तम्भ महरौली का अनसुलझा रहस्य भारत की राजधानी नई दिल्ली के महरौली नामक स्थान पर एक ऐसा लौह स्तम्भ है जिसका रहस्य आज तक वैज्ञानिकों की समझ में नही आ सका है। यह स्तम्भ  चंद्रा नामक राजा की स्मृति मे बनवाया गया था। 22 फुट ऊंचे इस स्तम्भ का ओसत व्यास 4.1/2 फुट है। इस लौह स्तम्भ को देखने से ही पता चलता है कि इसे बनाने वाले कितने कुशल घातुकर्मा होंगे। ठोस पिटवा लोहे से बना यह स्तम्भ अपने अलंकृत शीर्ष के कारण अत्यंत विशिष्ट लगता है। इस आकार का स्तम्भ बनाना आधुनिक युग में भी एक कठिनाई भरा काम साबित होगा। विद्वानों का मत है ...

तूतनखामेन का रहस्य - तूतनखामेन की कब्र वह ममी का रहस्य

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अमेरिकी पुरातत्व शास्त्रियों ने तूतनखामेन की ममी व उसका खजाना तो खोज निकाला लेकिन उनकी विद्या दो रहस्यों पर से पर्दा नहीं उठा सकी। तूतनखामन की ममी मे निकले 150 ताबीजो का क्या रहस्य है और तूतनखामन की ममी समय से पहले खराब होनी क्यो शुरू हो गई थी? 150 में से केवल 3 ताबीजो के बारे में पता लग पाया है कि उनका क्या अर्थ है तथा ममी के खराब होने के बारे में जो तर्क दिए जाते है, वे खासे अविश्वसनीय हैं। तूतेनखामेन का खजाना, तूतनखामेन का रहस्य तथा अपने इस लेख में हम अनसुलझे तूतनखामेन मकबरे का रहस्य जानेंगे। तूतनखामेन का मकबरा व उसके अनसुलझे रहस्य मिस्र जितना प्रसिद्ध अपनी प्राचीन सभ्यता के लिए है उतना ही अपने रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। विशालकाय पिरामिडों के रहस्य से आज भी विश्व भर के पुरातत्वशास्त्री, वास्तुकार ओर वैज्ञानिक जूझ रहे है। लेकिन अभी तक वे उनके निर्माण का वास्तविक उद्देश्य नही खोज पाए है। महान मिस्री फराआ राजा चिआप्स (Cheops) के शासन की समाप्ति की 12 शताब्दियों के बाद मिस्र पर तूृतनखामेन (Tutankhaman) नामक राजा का शासन हुआ, तूतनखामेन मकबरे का रहस्य भी पिरामिडों के रहस्य से कम गम्भ...

अंकोरवाट मंदिर कंबोडिया का इतिहास - अंकोरवाट मंदिर का रहस्य

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सैकड़ों वर्षों तक दक्षिण पूर्व एशिया के संघन जंगल मनुष्य की आंखों से एक ऐसा रहस्य छिपाए रहे जिसे आज अंकोरवाट मंदिर के नाम से जाना जाता है।  कंबोडिया के मध्यवर्ती मैदानों में अंकोरवाट की सभ्यता के खंडहर खड़े हुए हैं। जो एक ऐसी सभ्यता के प्रतीक है जो हिन्दू संस्कृति से बेहद प्रभावित थी। अपने देवता रूपी राजाओं के नेतृत्व में की शताब्दियों तक अंकोरवासियो ने प्रकृति का मुकाबला किया और उसे नियंत्रित करना सीखा। उन्होंने जल व्यवस्था पर आधारित एक राज्य को जन्म दिया। जिसकी तत्कालीन उन्नति और वैभव का अनुमान आज भी आंखें चौंधिया देने के लिए पर्याप्त है। परंतु इस खोज के साथ एक रहस्य भी जुड़ा हुआ है कि इस सभ्यता के निवासी इसे क्यों छोड़ ग्रे और कहां चले गए। अपने इस लेख में हम अंकोरवाट का इतिहास, अंकोरवाट की खोज किसने की, अंकोरवाट का मंदिर किसने बनवाया आदि सभी रहस्यों पर विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे। अंकोरवाट मंदिर का रहस्य सन् 1860 में फ्रांसीसी प्रकृति वैज्ञानिक हेनरी मौहात (Henri Mouhot) ने पहली बार कंबोडिया के मध्यवर्ती मैदानों में घने जंगलों की आड़ में छिपे अंकोर (Angkor) सभ्यता के खंडहरों को...

बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य - बरमूडा ट्रायंगल क्या है इन हिंदी

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बरमूडा ट्रायंगल कहा पर है, बरमूडा ट्रायंगल क्या है, बरमूडा की खोज कब हुई थी, बरमूडा त्रिभुज कौन से महासागर में स्थित है, बरमूडा त्रिकोण का रहस्य क्या है, क्या वास्तव में अटलांटिक महासागर के त्रिकोणात्मक जैसे क्षेत्र में कोई रहस्य छिपा हुआ है या सिर्फ बरमूडा ट्रायंगल मानवीय कल्पना की उडान भर है? इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए आज तक काफी साहित्य लिखा जा चुका है। अमेरिकी और सोवियत वैज्ञानिक इस रहस्यमय जल क्षेत्र मे होने वाली दुर्घटनाओं की जांच पड़ताल कर चुके है। अभी भी लोग इस निष्कर्ष पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं है कि बरमूडा ट्राएंगल में कोई अपार्थिव शक्ति अपना प्रभाव नहीं छोड़ रही है। मिथकों और दंतकथाओं से घिरा हुआ त्रिकोण आज भी विश्व भर के समुद्रों का सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है। बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य विश्व भर के समुद्रों का सबसे महान और अनसुलझा रहस्य है बरमूडा त्रिकोण अथवा बरमूडा ट्राएंगल (Barmuda triangle)। पश्चिमी अटलांटिक महासागरके इस त्रिकोणात्मक जल क्षेत्र द्वारा नष्ट किए गए अथवा गायब हुए जहाज़ों विमानों तथा मार गए व्यक्तियों की संख्या सैकड़ों में जा पहुंची है लेकिन अभी ...

स्टोनहेंज का रहस्य हिंदी में - स्टोनहेंज का इतिहास व निर्माण किसने करवाया

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ब्रिटेन की धरती पर खड़ा हुआ स्टोनहेंज का रहस्यमय स्मारक रहस्यों के घेरे में घिरा हुआ है। विज्ञान के सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ-साथ आध्यात्मवादी, अतीर्द्रियता के स्वामी तथा सनकी अफवाहबाजों ने इस रहस्यमय स्मारक के भूतकाल के बारे मे जानने की भरपूर चेष्टा की है। क्या यह स्मारक सूर्य देव का मंदिर है या इसे एक शाही महल के रूप मे बनाया गया था? क्‍या यूनानियों द्वारा गणित की जानकारी किए जाने से भी पहले के इस स्मारक को एक विशालकाय आदिकालीन कम्प्यूटर के रूप में देखा जाना चाहिए? क्या कभी इन दैत्याकार पत्थरों के नीचे दबा रहस्य खुलेगा या यह स्मारक यू ही पर्यटकों को आश्चर्यचकित करता रहेगा? स्टोनहेंज का रहस्य व स्टोनहेंज का इतिहास दक्षिणी इंग्लैंड में सेलिसबरी के मैदानी इलाकों मे खड़े हुए धूसर बलुआ पत्थरो के एक स्मारक का नाम स्टोनहेंज (Stonehenge) है। 13 फुट ऊंचे ये पत्थर थोडी दूर से देखने पर उस विशालकाय मैदान के मुकाबले बहुत छोटे और अपने एकांत में डूबे हुए से दिखाई पड़ते है। पिछले 4 हजार वर्षो से इन्होंने हवा, धूप, वर्षा, पाले का सामना किया है लेकिन इसके बाद भी उन पर उन औजारों के निशान मौजू...

ब्लैक होल कैसे बनता है - ब्लैक होल की खोज किसने की थी

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धरती पर अक्सर तरह तरह के विस्फोट होते रहे हैं। कभी मानव निर्मित कभी प्रकृति द्वारा प्रेरित तो कभी दूर्घटनावश लेकिन  साइबेरिया को हिला देने वाले विस्फोट के सामने कोई भी अन्य विस्फोट इतने बड़े रहस्य का आधार नहीं बना है। यह विस्फोट कहा हुआ और कब हुआ इसका ज्ञान हो चुका है, लेकिन यह कैसे हुआ यह किसी को मालूम नहीं है। क्या साइबेरिया में कोई उल्कापिंड फट गया था? या कोई उड़नतश्तरी अपने इंजन मे खराबी आ जाने के कारण किसी आणुविक विखंडन की शिकार हो गई थी? अथवा समय और अंतरिक्ष के नियमों का उलंघन कर सकने मे सक्षम कोई नन्हा सा ब्लैक होल ही साइबेरिया से आ टकराया था?। ब्लैक होल क्या है, ब्लैक होल कैसे बनता है, ब्लैक होल ट्रेजेडी, ब्लैक होल की खोज किसने की, ब्लैक होल की थ्योरी किसने दी, ब्लैक होल का सिद्धांत क्या है? आदि अनेक सुलझे वह अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर हम अपने इस लेख में जानने की कोशिश करेंगे। ब्लैक होल की दुर्घटना कब हुई थी – ब्लैक होल क्या है मध्य साइबेरिया के टंगस (Tungus) क्षत में 30 जून सन 1908 को स्थानीय समयानुसार प्रातः 7 बजकर 17 मिनट पर एक प्रलयकारी विस्फोट हुआ जिससे 20 मील की त्रिज...

ईस्टर द्वीप की दैत्याकार मूर्तियों का रहस्य - ईस्टर द्वीप का इतिहास

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प्रशांत महासागर की विशालता में खोया हुआ ईस्टर द्वीप और उस पर खड़े हुए ये विशालकाय पथरीले चेहरे आज सारे विश्व का ध्यान अपनी ओर बरबस खींच लेने में सफल है। आधुनिक शोधकर्ताओं ने नई नई तकनीकों का सहारा लेकर तथा अथक प्रयास करके यह तो साबित कर दिया कि ईस्टर द्वीप वासियों ने इन विशाल प्रस्तर मूर्तियों को कैसे बनाया होगा लेकिन वे यह नहीं बता पाएं है कि इन विशाल मूर्तियों को क्यों बनाया गया था। इनके पीछे क्या उद्देश्य था ? इनके निर्माता इन मूर्तियों को छोड़ कर अचानक क्यो भाग गए? क्या कभी इस द्वीप पर किसी समृद्ध समाज की बस्तियां थीं? भूल भुलैया का रहस्य – भूल भुलैया का निर्माण किसने करवाया ईस्टर द्वीप पर स्थित दैत्याकार पत्थरों की खोज किसने की? यू तो इस द्वीप पर उनसे भी पूर्व कई लोग आए और गए पर सही अर्थों में ईस्टर द्वीप की खोज का श्रेय एक अंग्रेज महिला कैथरीन राउटनज (Katherine Routledge) को दिया जाता है। इन्होंने सन 1914-15 में प्रशांत महासागर में स्थित ईस्टर द्वीप की यात्रा की और संसार को इसकी विचित्रता से परिचित करवाया। यह द्वीप सन्‌ 1888 से चिली के कब्जे में है। इस पर 3 ज्वालामुखी पर्वत हैं। ...

मिस्र के पिरामिड का रहस्य - मिस्र के पिरामिड के बारे में जानकारी

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मिस्र के दैत्याकार पिरामिड दुनियां के प्राचीनतम अजुबों मे से एक है। इनकी वास्तुकला आश्चर्यजनक और चौका देने वाली है। इससे भी कहीं आधिक चौंका देने वाला है यह प्रश्न कि क्या मिस्र के पिरामिड सिर्फ फराओ राजाओं की ममीयों को सुरक्षित रखने वाले मकबरे ही थे ? क्या उनका यही एकमात्र उद्देश्य था? आज इस वियय मे अलग-अलग सिद्धांत निकल कर सामने आ रहे हैं। कुछ का कहना है कि ये पिरामिड अकाल से बचने के लिए अन्न के भण्डार के रूप मे बनाए गए थे। कुछ अन्य लोगो का दावा है कि ये पिरामसिड खगोलीय वेधशालाएं हैं, जिनसे ग्रह-नक्षत्रों तथा पृथ्वी के बारे मे मिस्रवासी अध्ययन किया करते थे। क्या ये पिरामिड प्राचीन मिस्रियों के इन विश्वासों के ही प्रतीक हैं, जो मत्यु के पश्चात्‌ भी जीवन की निरंतरता से संबंधित था या उन्हें बनवाने के पीछे कोई अन्य मकसद काम कर रहा था? मिस्र के पिरामिड का निर्माण कब हुआ – मिस्र के पिरामिड कहा है पिछली 40 शताब्दियों से मिस्र के भीमाकार पिरामिड सारे विश्व के कौतूहल तथा आश्चर्य क केन्द्र बने हुए है। ये पिरामिड इस तथ्य के जीवित प्रमाण है कि प्राचीन काल का मानव तकनीकी कुशलता मे कितनी दूर तक जा ...