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रवीन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी - Rabindranath tagore biography

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रवीन्द्रनाथ टैगोर, यह वो नाम है, जो भारतीय जनमानस के ह्रदयों में गुरूदेव के नाम से भी सम्मानित है। रवीन्द्रनाथ एक महान कवि साहित्यकार, शिक्षाविद, चित्रकार, संगीत विशारद, नाटककार और राष्ट्रवादी विचारों वाले थे। महाकवि गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को विश्व का एकमात्र ऐसा कवि माना जाता है, जिन्होंने अपनी रचनाओं में प्रकृति, जीवन और मनुष्य के बीच निर्मल, कोमल और अति संवेदनशील भावनाओं का ऐसा सामंजस्य स्थापित किया है। जिसकी तुलना विश्व के किसी भी कवि या उसकी रचनाओं से नही की जा सकती है। सन् 1913 का वह गौरवमयी दिन भला कौन भारतीय भुला सकता है, जब रवीन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य के क्षेत्र में भारतीय इतिहास का पहला नोबेल पुरस्कार दिया गया। रवीन्द्रनाथ टैगोर भारत को पहले वो व्यक्ति थे जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला था। रवीन्द्रनाथ टैगोर के पूर्वज   माना जाता है कि रवीन्द्रनाथ टैगौर के पूर्वज बंगाल के मूल निवासी नहीं थे। वे पांच कान्यकुब्ज ब्राह्मणों में से एक थे, जिन्हें प्राचीन राजा आदिशूर ने कन्नौज से बुलाकर बंगाल में पर्याप्त सम्मान और सम्पत्ति सहित प्रतिष्ठित कराया था। बंगाल में ब्राह्मणों को सम्...

चन्द्रशेखर वेंकट रमन की जीवनी - वेंकट रमन बायोग्राफी इन हिन्दी

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विज्ञान के क्षेत्र में भारत की पताका विश्व भर में फहराने वाले महान वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेंकट रमन का जन्म 7 नवंबर 1888 को दक्षिण भारत के  तमिलनाडु राज्य के तिरूचिरापल्ली जिले के थिरूवनैक्कवल नामक गांव में एक साधारण, किंतु ज्ञान-विज्ञान से समृद्ध ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे अपने माता पिता की दूसरी संतान थे। वेंकटरमन के पिता श्री चन्द्रशेखर अय्यर गणित, विज्ञान और दर्शनशास्त्र के अच्छे विद्वान होने के साथ साथ संगीत मे भी विशेष रूची रखते थे। विशेषकर वायलिन और वीणावादन में तो उन्हें महारत हासिल थी। जब वेंकट रमन का जन्म हुआ, उस समय वे तिरूचिरापल्ली के ही एक हाईस्कूल में अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।अध्यापन के कार्य के साथ साथ उन्हें स्वयं अध्ययन में भी विशेष रूचि थी। अनेक विषयों की पुस्तकों का उनके पास एक अच्छा संग्रह था। अपनी विद्वता और परिश्रम के बल पर वे वेंकट रमन के जन्म के कुछ ही वर्षों बाद  आंध्रप्रदेश के विशाखापत्तनम के मिसेज ए.वी.एन कॉलेज में भौतिकी के प्रोफेसर पद पर नियुक्त हो गए। चक्रवर्ती विजयराघवाचार्य का जीवन परिचय हिन्दी में चन्द्रशेखर वेंकट रमन की माता पार्वती अम्...

डॉक्टर हरगोविंद खुराना की जीवनी - डॉक्टर हरगोविंद खुराना जीवन परिचय

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डॉक्टर हरगोविंद खुराना का जीवन परिचय— सन् 1930 में भौतिकी विज्ञान के क्षेत्र में पाने वाले पहले भारती वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन ने एक बार कहा था, कि भारत में मेरे जैसे न जाने कितने ही रमन भरे पड़े है। किंतु आवश्यक संसाधनों व उपयुक्त अवसरो के अभाव में व या तो अपनी प्रतिभा गंवा बैठते है, या विदेशों की ओर पलायन कर जाते है, जहां उन्हें उनके अनुकूल वातावरण मिल जाता है। रमन के इन शब्दों में कितनी सच्चाई थी, इसका जीता जागता उदाहरण है महान वैज्ञानिक डॉक्टर हरगोविंद खुराना। उनके बारेेंं इस लेख में हम जानेंगें– डॉक्टर हरगोविंद की जीवनी, डॉक्टर हरगोविंद खुराना जीवन परिचय, डॉक्टर हरगोविंद खुराना इनफार्मेशन इन हिन्दी, डॉक्टर हरगोविंद खुराना बायोग्राफी, डॉक्टर हरगोविन्द खुराना माहिती आदि।     भारत में जन्मे इस प्रतिभाशाली महान वैज्ञानिक को जब उसके अपने देश में ही आगे बढ़ने और कुछ कर दिखाने के अवसर और संसाधन  उपलब्ध न हो सके तो उन्होंने विदेश में रहकर ही अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा को निखारा। कभी रसायन विज्ञान के होनहार विद्यार्थी रहे डॉक्टर हरगोविंद खुराना ने आगे चलकर जीव रसायन विज...

सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर की जीवनी - सुब्रमण्यम चंद्रशेखर नोबेल पुरस्कार विजेता

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सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर एक महान खगोल वैज्ञानिक थे। सुब्रमण्यम चंद्रशेखर को खगोल विज्ञान के के क्षेत्र में किए गए उनके महान खोजो व कार्यों के लिए 1983 में विश्व का सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) प्रदान किया गया था। अपने इस लेख में हम भारत के इस महान वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर की जीवनी, सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर का जीवन परिचय, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर का जन्म, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर की मृत्यु, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर की खोज, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर की शिक्षा, सुब्रह्मण्यम चंदशेखर बायोग्राफी इन हिन्दी, सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के बारें में सभी महत्वपूर्ण जानकारी के बारें में विस्तार से जानेंगे, हमारा यह लेख सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर पर निबंध लिखने के लिए भी सहायक हो सकता है।       सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के बारें में (About Subrahmanyan Chandrasekhar)     विज्ञान के क्षेत्र में विश्व का सर्वाधिक प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार पाने वाले सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर तीसरे भारतीय वैज्ञानिक थे। उनसे पहले विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार चंद्रशेखर वेंकटरमन (भौतिकी विज्ञान) 193...

वेंकटरमन रामकृष्णन का जीवन परिचय - वेंकटरमन रामकृष्णन महिती इन हिन्दी

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एक बार फिर अरबों भारतवासियों के होठों पर आत्म स्वाभिमान की मुस्कराहट खिल उठी। एक बार फिर सारा देश अपनी माटी के एक सपूत की असाधारण ऊपब्धि पर झूम उठा एक बार फिर तिरंगा आसमान में गर्व और उत्साह से लहराकर सारी दुनिया के लोगों की नजरों का तारा बन गया। यह सुहावना अवसर था यह जानने का कि वर्ष 2009 के रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार भारतीय मूल के वैज्ञानिक वेंकटरमन रामकृष्णन को प्रदान किया जायेगा। यू तो भारत भूमि शुरु से ही महान एवं प्रतिभाशाली व्यक्तियों की जननी रही है। जहां अतीत में आचार्य कौटिल्य, आर्यभट्ट, वाराहमिहिर आदि ने भारत के ज्ञान विज्ञान की प्रतिभा को सम्पूर्ण संसार के सामने प्रमाणित किया। वहीं गुलामी के अंधेरे युग में भी गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर और सर चन्द्रशेखर वेंकटरमन ने नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर सम्पूर्ण संसार के सामने यह प्रमाणित कर दिया कि भारत की धरती से विषम परिस्थितियों में भी प्रतिभा का अंकुर फूट सकता है। आधुनिक काल में डॉक्टर हरगोविंद खुराना , सुब्रमण्यम चन्द्रशेखर, वी.एस नॉयपाल और  मदर टेरेसा ने भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त कर भारत के गर्व को चार चांद लगाए...

अमर्त्य सेन की बायोग्राफी - अमर्त्य सेन की जीवनी,नोबेल पुरस्कार, सिद्धांत

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क्या गरीब होना किस्मत की बात है? क्या  अकाल से होने वाली मौतों को किसी भी प्रकार रोका या कम किया जा सकता है? क्यो आज भी विश्व के अधिकांश देश  भूखमरी और  कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से ग्रस्त है, जबकि वे खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर होने या विश्व गुरू होने का दावा करते है? समान नागरिक संहिता वाले,  लोकतांत्रिक देशों में आज भी स्त्री पुरूषों के बीच असमानता की एक चौड़ी खाई क्यों है? क्यो उच्चतर शिक्षा में अग्रणी माने जाने वाले देश इस सच्चाई से अनभिज्ञ बने हुए है। कि उनके देश का बचपन प्रारंभिक शिक्षा से भी वंचित है? ऐसे ही अनेक ज्वलंत प्रश्नों को उठाने वाले अमर्त्य सेन के नाम पर एक बारगी यह विश्वास करना कठिन हो जाता है कि वे विश्व के महान और ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री है। इसका कारण यह है कि आज तक विश्व के किसी भी अर्थशास्त्री ने चाहे वह  नोबेल पुरस्कार विजेता ही क्यों न हो, अर्थशास्त्र को कभी उस दृष्टि से देखा ही नहीं था। जहां कि वह महज अर्थशास्त्र न रहकर मानव कल्याण का शास्त्र बन जाता हो। वास्तव में आज तक अर्थशास्त्र को अमेरिका और यूरोपीय अर्थशास्त्रियो...