ट्रांजिस्टर का आविष्कार किसने किया तथा ट्रांजिस्टर का सिद्धांत
ट्रांजिस्टर का आविष्कार सन् 1948 में हुआ। इसके आविष्कार का श्रेय अमेरिका के तीन वैज्ञानिको, जॉन बारडीन, विलयम शौकले तथा वाल्टर ब्राटेन को जाता है। इस अद्वितीय आविष्कार के लिए इन तीनो को सन् 1956 का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।
ट्रांजिस्टर नाम का यह अवयव रेडियो में वाल्वो की जगह इस्तेमाल किया जाता है। ट्रांजिस्टर के छोटे आकार की वजह से रेडियो का आकार बहुत छोटा बनाने मे सफलता मिली। जिस रेडियो सेट मे वाल्वो की जगह ट्रांजिस्टर इस्तेमाल किए जाते है, उसे आजकल आम भाषा में ‘ट्रांजिस्टर’ अथवा ‘ट्रांजिस्टर रेडियो कहा जाता है।
ट्रांजिस्टर का आविष्कार किसने किया
ट्रांजिस्टर जर्मेनियम और सिलिकन नामक तत्त्वो से बनाया जाता है। ये दोनो तत्व अर्धचालक कहलाते हैं। इनमे जब कुछ दूसरे पदार्थों को मिलाया जाता है, तो इनकी विद्युत चालकता बदल जाती है ओर इन्हे बेहतर अर्धचालक के रूप मे प्रयोग किया जा सकता है।
ट्रांसफार्मर का आविष्कार किसने किया और यह कैसे काम करता है
जिन अधचालकों मे विद्युत चालकता इलेक्ट्रोनों से होती है, उन्हे N प्रकार का अर्धचालक कहा जाता है। इसी तरह जिन अर्धचालकों मे धनात्मक ‘होल्स’ विचरण करते है। उन्हे ‘P’ प्रकार का अर्धचालक कहा जाता है। अर्धचालकों की सामान्य युक्ति तब बनती है, जब N प्रकार का एक छोटा-सा आयताकार टुकडा ‘P’ प्रकार के इतने ही आकार के टुकडे के साथ जोड़ दिया जाता है। इन अर्धचालको मे अन्य चालक-पदार्थों की तरह के धनात्मक कण नही होते। ये कुछ भिन होते है।

इनका अस्तित्व ऐसा है, जैसे कोइ इलेक्टॉन अपनी जगह से हट गया हो और वहा कोई नन्हा-सा छिद्ग रह गया हो। इसी छिद्र को धनात्मक होल्स कहा जाता है। जब इस तरह बने टुकडे मे करेंट पास किया जाता है, तो P वाले भाग के ‘होल्स’ बैटरी के धन-विभव से दूर हटते है, और ‘N’ भाग के इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक सिरे से दूर हटते है, क्योंकि बैटरी का धनात्मक सिर इस टुकड़े के P सिर से और ऋणात्मक सिरा ‘N’ सिरे से जोडा जाता है। अतः ये दोनो प्रकार के कण परे हटकर टुकड़े के मध्य भाग की आर आकर्षित होते है।
डायनेमो का आविष्कार किसने किया और डायनेमो का सिद्धांत
यहां विरोधी(ऋण और धन) होने के कारण ये कण आपस में मिल जाएगें ओर इसके अंदर से करेंट का प्रवाह आरम्भ हो जाएगा। यदि बैटरी के सिरे बदल कर विपरीत स्थिति में लगाए गए तो विद्युत-धारा का प्रवाह नहीं हो पाएगा। यही स्थिति डायोड वाल्व में होती है। अतः इस प्रकार से बना P-N जन्क्शन डायोड वाल्व की तरह कार्य करता है।
बैटरी का आविष्कार किसने किया और कब हुआ
जंक्शन प्रकार के ट्रांजिस्टर बनाने के लिए. ‘P’ प्रकार के टुकडे के दोनो ओर ‘N’ प्रकार के टुकडे जोडने से N-P-N प्रकार का ट्रांजिस्टर बन जाता है जिसे जंक्शन ट्रांजिस्टर कहते है। इसी तरह ‘N’ प्रकार के अर्धचालक टुकडे के दोनो ओर P प्रकार के दो टुकडे जाडने से P-N-P प्रकार का ट्रांजिस्टर बन जाता है।
रेफ्रिजरेटर का आविष्कार किसने किया और कब हुआ
विभिन्न उपकरणों में उपयोग के लिए अनेक विधियों से अनेक प्रकार के ट्रांजिस्टर बनाए जाते है। ट्रांजिस्टर का उपयोग एम्प्लीफायर आम्सीलेटर आदि सभी प्रकार के उपकरणों में किया जाता है। रेडियो सेटो में तो ट्रांजिस्टरों का उपयोग हुआ ही साथ
ही ये श्रव्य साधना (Hear adding) गिटार अंतरिक्ष राकेट, कम्प्यूटर, टेलीविज़न, वीसी आर तथा इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरी के हर क्षेत्र मे प्रयुक्त किए जा रहे है। वाल्वो का उपयोग बडी तेजी से कम हो गया है।
रेफ्रिजरेटर का आविष्कार किसने किया और कब हुआ
ट्रांजिस्टर का आकार बहुत छोटा होने की वजह सभी यंत्र छोटे आकार के बनने लगे हैं। इसके अलावा ये कम वोल्टेज पर कुशलता से कार्य कर सकने में समर्थ है। वाल्वो की अपेक्षा ये आधिक टिकाऊ आर सुरक्षितसाबित हुए हैं। इलेक्टॉनिकी के क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसी युक्ति बची हो जिसमें ट्रांजिस्टर का उपयोग न हो रहा हो।
इत्र का आविष्कार किसने किया और कब हुआ
ट्रांजिस्टर में तीन सिर होते है जिन्हें एमिटर बस और ‘कलेक्टर’ कहा जाता है। N-P-N ट्रांजिस्टर सेएक N सिरा एमिटर का कार्य करता है तथा दूसरा कलेक्टर का। बीच का P भाग बस का कार्य करता है। इसी प्रकार P-N-P ट्रांजिस्टर मे एक P सिरा एमिटर का तथा दूसरा P सिरा कलेक्टर का तथा बीच का N भाग बस का कार्य करता है। इन्हें उपयुक्त विद्युत-परिपथो में जोडकर वांछित कार्यों के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
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