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भरतपुर राज्य का इतिहास - History of Bhartpur state

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भरतपुर राज्य के महाराजा जाट वंश के हैं। जाट वंश की उत्पत्ति के लिये भिन्न भिन्न विद्वानों की भिन्न भिन्‍न राय है। कुछ पाश्चात विद्वानों ने इनकी उत्पत्ति इन्डो सीथियन्स से बतलाई है और लिखा है कि कई विदेशी जातियों की तरह जाट भी मध्य एशिया से आकर हिन्दुस्तान में बस गये और धीरे धीरे हिन्दु जाति ने इन्हें अपने में मिला लिया। पर आधुनिक ऐतिहासिक अन्वेषणों ने उक्त मत को भ्रम पूर्ण सिद्ध कर दिया है। सुप्रख्यात्‌ डॉक्टर ट्रम्प और बीम्स ने इनकी उत्पत्ति विशुद्ध आर्यवंश से मानी है ( Memoirs of the races of North Western provinces of India ) सर ह॒र्बट रिसली ले अपने ( people of India) नामक ग्रंथ में ऐेतिहासिक ओर भौतिक प्रमाणों के आधार पर जाटों को विशुद्ध आर्य जाति के सिद्ध करने की सफल चेष्टा की है। महामति कर्नल टॉड साहब ने शिलालेखों के आधार पर यह प्रगट किया है कि इसवी सन्‌ 409 में  भारत में जाट जाति के राज्यवंश का अस्तित्व था। महाभारत में जत्रि नामक लोगों का वर्णन है। सर जेम्स केम्बेल और प्रियर्सन उक्त लोगों को जाट ही ख्याल करते हैं। और भी कितने ही विख्यात विद्वानों ने जाटों को विशुद्ध आर्य वंश...

उदयपुर राज्य का इतिहास - History Of Udaipur State

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इस पुण्य भूमि भारत के इतिहास में मेवाड़ के गौरवशाली उदयपुर राज्य के राजवंश का नाम बड़ें अभिमान के साथ लिया जाता है। इस गौरवशाली राजवंश में ऐसे अनेक प्रतापशाली नृपति हुए हैं, जिन्होंने अपने अपूर्व वीरत्व, अलौकिक स्वार्थ त्याग और अद्वितीय आत्मासम्मान के कारण मानव-जाति के इतिहास को प्रकाशमान किया है। संसार भर में उदयपुर राज्य यही एक ऐसा राजवंश है जो सन्‌ 568 से लगाकर आजादी तक अनेक परिवतनों और तूफानों को सहता हुआ एक ही प्रदेश पर राज्य करता चला आ रहा था। जिस समय परम प्रतापी महाराज हर्ष कन्नौज की राज्य-गद्दी पर विराजमान थे, उस समय उदयपुर राज्य यानि मेवाड़ का शासन-सूत्र शिलादित्य संचालित करते थे। महाराज हर्ष का विशाल साम्राज्य तो उनकी मृत्यु के साथ साथ ही नष्ट हो गया पर शिलादित्य के वंशज अब भी मेवाड़ पर राज्य कर रहे थे। सुप्रख्यात फारसी इतिहास-वेत्ता फ़रिश्ता लिखता है “ उज्जैन- वाले महाराज विक्रमादित्य के पीछे राजपूत जाति का उत्थान और अभ्युद्य हुआ। मुसलमानों के हिन्दुस्तान में आने के पहले यहाँ पर बहुत से स्वतंत्र राजा थे, परन्तु सुल्तान महमूद गज़नवी तथा उनके वंशजों ने उनमें से बहुतों को अपने ...