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लाल किला किसने बनवाया - लाल किले का इतिहास और तथ्य

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यमुना नदी के तट पर भारत की प्राचीन वैभवशाली नगरी दिल्ली में मुगल बादशाद शाहजहां ने अपने राजमहल के रूप में दिल्ली के लाल किले का निर्माण कराया था। इससे पूर्व आगरे का प्रसिद्ध किला मुगल वंशीय बादशाहों द्वारा निर्मित हो चुका था परन्तु शाहजहां ने दिल्‍ली नगरी में मुख्य रूप से निवास करने की दृष्टि से सन 1638 में लाल किले के निर्माण का कार्य प्रारम्भ कराया। लाल किले के निर्माण का कार्य लगभग 10 वर्षों तक चलता रहा। राज्य भवनों के वैभव और सौंदर्य की दृष्टि से यह किला भारत में विशेष ख्याति पाता है। जिस समय मुगल साम्राज्य अपने यौवन के उभार में था उस समय शहंशाह जैसे भव्य भवनों के निर्माता ने इस दुर्ग में सुन्दर से सुन्दर भवन बनवाने में अपने शक्ति लगाई। लाल किले के सुंदर दृश्य   कहा जाता है कि जब मुगल सम्राट शाहजहां का मन  आगरा में न लगा उस समय उसने यमुना तट दिल्ली में शाहजहांनाबाद नाम से एक नगरी बसाई ओर वहीं पर लाल किला नाम से एक विशाल राजमहल का निर्माण कराया। उस राज महल को सुरक्षित करने के लिये उसके चारों ओर लाल पत्थर की सुदृढ़ प्राचीर बनवाई गई और इस प्रकार इस राज महल ने भारत की राजधानी...

हुमायूं का मकबरा मुगलों का कब्रिस्तान humanyu tomb history in hindi

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भारत की राजधानी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन तथा  हजरत निजामुद्दीन दरगाह  के करीब मथुरा रोड़ के निकट  हुमायूं का मकबरा  स्थित है। यह मुग़ल कालीन इमारत दिल्ली पर्यटन के क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध है। तथा यहाँ के पर्यटन स्थलों में अपना अलग ही मुकाम रखती है। इस खुबसूरत इमारत को देखने के लिए दुनिया भर के इतिहास प्रेमी, वास्तुकला प्रेमी तथा पर्यटक आते है। इसकी प्रसिद्धि और महत्वता का अंदाजा यही से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति  बराक ओबामा  भी इस भव्य इमारत के दर्शन के लिए यहाँ आ चुके है। तथा 1993 में यूनेस्को  द्वारा इस इमारत को  विश्व धरोहर  घोषित किया गया है। हुमायूं का मकबरा हुमायूं की मृत्यु सन् 1556  में हुई थी। और  हाजी बेगम के नाम से जानी जाने वाली उनकी विधवा पत्नी  हमीदा बानू बेगम  ने 9 वर्ष बाद सन् 1565 में इस मकबरे का निर्माण शुरू करवाया था। 1572 में हुमायूँ का मकबरा बनकर तैयार हुआ था। एक फारसी वास्तुकार  मिराक मिर्जा ग्यासुद्दीन बेग  को इस मकबरे के निर्माण के लिए हाजी बेगम ने नियुक्त कि...

कुतुबमीनार का इतिहास Qutab minar history in hindi

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पिछली पोस्ट में हमने  हुमायूँ के मकबरे  की सैर की थी। आज हम एशिया की सबसे ऊंची मीनार की सैर करेंगे। जो भारत के अनेक शासकों के शासन की गवाही देती है। जिस कों यूनेस्को द्वारा 1983 में विश्व धरोहर घोषित किया गया है जिसे देखने के लिए भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने कोने से पर्यटक भारत की राजधानी दिल्ली आते है। अब तो आप समझ गये होगें कि हम किस मीनार की बात कर रहे है। जी हाँ। ठीक समझें हम बात कर रहे है। दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र के मेहरौली में स्थित  कुतुबमीनार की। जिसकों दिल्ली के अंतिम हिन्दू शासक की पराजय के तत्काल बाद   दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक  द्वारा  1193 में इसकी नीव रखी गई थी। कुतुबमीनार के सुंदर दृश्य कुतुबमीनार की स्थापत्य विवाद पूर्ण है। कुछ लोगों का मानना है कि भारत में मुस्लिम शासन की शुरुआत में विजय दिवस के रूप में देखते है। तथा कुछ लोगों का मानना है की मस्जिद के मुअज्ज़िन के अजान देने के लिए कराया गया था। जिससे अजान की आवाज़ दूर तक जा सके। कुतुबुद्दीन ऐबक  अपने शासन काल में कुतुबमीनार के आधार का ही निर्माण करा पाया था। कुतुबुद्दीन ऐबक के बाद उसके दामाद एवं उ...

Lotus tample history in hindi कमल मंदिर एशिया का एक मात्र बहाई मंदिर

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भारत की राजधानी के नेहरू प्लेस के पास स्थित एक बहाई उपासना स्थल है। यह उपासना स्थल हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आदि सभी धर्मों के एकता का प्रतीक के रूप जाना व माना जाता है। यहाँ सभी धर्मों के लोग उपासना करते है।( lotus Temple ) इसी कारण इसे एक अलग पहचान मिली हुई है। इस स्थल के अंदर न कोई मूर्ति है और न ही किसी प्रकार का कोई धार्मिक कर्म कांड किया जाता है। यहाँ लोग सिर्फ भगवान को मन में याद करके तथा धार्मिक ग्रन्थों को पढकर पूजा करते है। यह उपासना स्थल मूर्ति पूजा में नहीं अपितु ईश्वर की उपस्थिति में विशवास करता है। विश्व में इस तरह के अभी तक कुल सात ऐसे उपासना स्थल है। एशिया का यह एक मात्र पहला उपासना स्थल है। अब तो आप समझ गये होगें हम किस स्थल की बात कर रहे है। जी हाँ। हम बात कर रहे है।  Lotus tample (कमल मंदिर) अथवा बहाई मंदिर  की। पिछली पोस्ट में हमने  कुतुबमीनार के बारे में जाना और उसकी सैर की थी इस पोस्ट में हम Lotus tample (कमल मंदिर) के बारे में जानेगें और सैर करें कमल मंदिर के सुंदर दृश्य इसकी गिनती दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में की जाती है तथा 20 शताब्दी में नयी दिल्ली में पर्...

Charminar history in hindi- चारमीनार का इतिहास

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प्रिय पाठकों पिछली पोस्ट में हमने दिल्ली के प्रसिद्ध स्थल स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के बारे में जाना और उसकी सैर की थी। इस पोस्ट में हम आपको तेलंगाना राज्य के प्रसिद्ध शहर हेदराबाद ले चलेंगे। हेदराबाद शहर किस लिए प्रसिद्ध है यह तो आप सभी अच्छी तरह जानते होगें। हेदराबाद शहर वहाँ स्थित चारमीनार के लिए जाना जाता है। तो इस पोस्ट में हम हेदराबाद में स्थित चारमीनार( charminar history in hindi ) मस्जिद स्मारक की सैर करेगें और जानेगें कि:- चारमीनार को किसने बनवाया चारमीनार का निर्माण क्यों किया गया चारमीनार का निर्माण कब हुआ चारमीनार की कहानी चारमीनार को बनाने में किस मटेरियल का प्रयोग किया गया चारमीनार का इतिहास चारमीनार किस वास्तुशैली में बनाया गया है चारमीनार की ऊचाँई क्या है Charminar history in hindi दिल्ली लाल किले का इतिहास जामा मस्जिद दिल्ली का इतिहास कुतुबमीनार का इतिहास Charminar चारमीनार कहा स्थित है यह इमारत भारत के तेलंगाना राज्य के प्रसिद्ध शहर हेदराबाद में स्थित है। इस इमारत का निर्माण मुसी नदी के पूर्वी तट पर किया गया है। चारमीनार के निर्माण के बाद उसके चारों ओर हेदराबाद शहर ...

Amer fort jaipur आमेर का किला जयपुर का इतिहास हिन्दी में

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पिछली पोस्टो मे हमने अपने जयपुर टूर के अंतर्गत जल महल की सैर की थी। और उसके बारे में विस्तार से जाना था। इस पोस्ट में हम जयपुर की ही एक और राजपूताना विरासत व सांसकृतिक धरोहर आमेर दुर्ग amer fort jaipur की सैर करेगें और उसके बारे में विस्तार से जानेगें। यह सांसकृतिक धरोहर राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर के उपनगर आमेर में स्थित है। जयपुर शहर से आमेर की दूरी 11 किलोमीटर के लगभग है। आमेर पर कछवाहा समुदाय के राजपूत शासको का शासन था। तथा उनकी राजधानी भी थी। जिसको बाद में राजा सवाई जयसिंह द्धारा स्थानांतरित कर जयपुर कर दिया गया था। आमेर का किला के सुंदर दृश्य आमेर का किला अरावली पर्वत श्रृखला पर चील के टिले नामक पहाडी की चोटी पर स्थित है। पहाडी के नीचे की ओर माओटा झील है। जिसके पानी मे किले का सुंदर प्रतिबिंब दिखाई पडता है। इस भव्य अजय आमेर का किला का निर्माण राजा मान सिंह प्रथम ने सन् 1592 ई° मे करवाया था उसके बाद राजा सवाई जय सिहं द्धारा इसमें कई योगदान व सुधार कार्य किये गये है। जल महल जयपुर Amer fort jaupur history in hindi Jaipur tourist place amer fort jaipur आमेर के किले के मुख्य प्रवे...

चित्तौडगढ का किला - चित्तौडगढ दुर्ग भारत का सबसे बडा किला

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इतिहास में वीरो की भूमि चित्तौडगढ का अपना विशेष महत्व है। उदयपुर से 112 किलोमीटर दूर चित्तौडगढ एक ऐतिहासिक व दर्शनीय स्थान है। चित्तौडगढ का किला अपनी वैभवता और विशालता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। अपनी विशालता के कारण ही भारत में स्थित सभी किलो में क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत देश का सबसे बडा किला माना जाता है। इसकी विशालता, वैभवता और प्रसिद्धि से प्रभावित होकर देश और दुनिया के कोने कोने से लाखो पर्यटक प्रतिवर्ष इस खुबसूरत व ऐतिहासिक इमारत को देखने के लिए आते है।   यह   “चित्तौडगढ का किला”   बेडच और गंभीरी नदियो के संगम के पास लगभग 500 फुट ऊंचे एक भीमकाय पहाड पर स्थित है। यह विशाल किला 5 किलोमीटर लंबे तथा 1 किलोमीटर चौडे क्षेत्रफल में फैला हुआ है। जिसमे 7 प्रवेशद्वार है। यह किला समुंद्रतल से लगभग 1850 फुट कि ऊंचाई पर स्थित है।     चित्तौडगढ का किला के सुंदर दृश्य   इस भव्य व विशाल दुर्ग में भामा जैसे देशभक्त और कर्मवती जैसी बहनो की गौरव गाथाएं आज भी गूंजती है। इस किले के अंदर अनेक प्राकृतिक झीले, झरने, कुंड, अनेक महल व स्तम्भ है। चित्तौडगढ का किला ब...

शेखचिल्ली का मकबरा - शेखचिल्ली के चटकुले बहुत सुने होगें

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शेखचिल्ली यह नाम सुनते ही आपके दिमाग में एक हास्य कलाकार की तस्वीर और उसके गुदगुदाते चुटकुलो की कल्पना करके आपने चहरे पर हल्की सी मुस्कान तो जरूर आई होगी। आज तक आपने शेखचिल्ली के चटुकुले तो बहुत सुने होगें, क्या आप जानते है शेखचिल्ली का मकबरा भी है? जी हां आज हम आपको अपनी इस पोस्ट में शेख चिल्ली के मकबरे के बारे में बताने जा रहे है। यह मकबरा भारत के राज्य हरियाणा के कुरूक्षेत्र जिले के थानेसर में स्थित है। और यह मकबरा इतना प्रसिद्ध है। कि इसे हरियाणा का ताजमहल भी कहा जाता है। और तो और पुरात्तव सर्वेषण विभाग द्वारा इसे संरक्षित धरोहर भी घोषित किया गया है। कंफयूज मत होइए शेख चिल्ली के जिस मकबरे की बात हम कर रहे है। वो हास्य कलाकार का नही बल्कि एक अध्यात्मिक गुरू और सूफी संत हजरत शेखचिल्ली का है। जो सूफी सम्प्रदाय के ईरानी संत थे। जिनका नाम अब्दुल-उर-रहीम उर्फ अब्दुल-उर-करीम अब्दुल-उर-रज्जाक था। जिनको शेख चिल्ली के नाम से जाना जाता था।   शेखचिल्ली के मकबरे के सुंदर दृश्य   इतिहासकारो की माने तो संत शेख चिल्ली मुगल राजकुमार दारा शिकोह के धर्म गुरू थे। जिनका मानना है कि दारा शिकोह ...

India gate history in hindi - इंडिया गेट दिल्ली भारत का गौरव

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इंडिया गेट भारत की राजधानी शहर, नई दिल्ली के केंद्र में स्थित है।( india gate history in Hindi )  राष्ट्रपति भवन से 2.3 किमी दूर, यह ऐतिहासिक इमारत, राजपथ के पूर्वी चरम पर स्थित है। इंडिया गेट एक युद्ध स्मारक है जो अविभाजित भारतीय सेना के सैनिकों का सम्मान करने के लिए समर्पित है, जो 1 9 14 और 1 9 21 के बीच प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए थे। दिल्ली की यात्रा पर आये पर्यटको के लिए यह स्मारक दिल्ली के परयटन स्थलो मे सबसे अधिक पसंदीदा जगहो में से एक है। दिल्ली वासियो के लिए यह स्मारक किसी पिकनिक स्थल से कम नही है। शाम होते दिल्ली वासी यहा घूमने आने लगते है। रात्रि में प्रकाश की रोशनी में इंडिया गेट का नजारा बेहद मनमोहक होता है।   इंडिया गेट के सुदंर दृश्य   India gate history in hindi अखिल भारतीय युद्ध स्मारक नामक इंडिया गेट को अविभाजित भारतीय सेना के 82,000 सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बनाया गया था, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध (1 914-19 18) में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए लड़ने और तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध 1919 में अपनी जान गंवा दी । इसे 1 9 17 में ब्रिटिश इंपीरियल म...

कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास - कोणार्क सूर्य मंदिर का रहस्य

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कोणार्क’ दो शब्द ‘कोना’ और ‘अर्का’ का संयोजन है। ‘कोना’ का अर्थ है ‘कॉर्नर’ और ‘अर्का’ का मतलब ‘सूर्य’ है, इसलिए जब यह जोड़ता है तो यह ‘कोने का सूर्य’ बन जाता है। कोणार्क सूर्य मंदिर पुरी के उत्तर पूर्वी कोने पर स्थित है और सूर्य भगवान को समर्पित है। कोणार्क को अर्का खेत्र भी कहा जाता है।   कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास 13 वीं शताब्दी के मध्य में निर्मित कोणार्क का सूर्य मंदिर कलात्मक भव्यता और इंजीनियरिंग निपुणता की एक बड़ी धारणा है। गंगा राजवंश के महान शासक राजा नरसिम्हादेव प्रथम ने इस मंदिर को 12 साल (1243-1255 ईसवी) की अवधि के भीतर 1200 कारीगरों की मदद से बनाया था। कोणार्क सूर्य मंदिर को 24 पहियों पर घुड़सवार एक भव्य सजाए गए रथ के रूप में डिजाइन किया गया था, प्रत्येक व्यास में लगभग 10 फीट, और 7 शक्तिशाली घोड़ों द्वारा खींचा गया था। यह समझना वास्तव में मुश्किल है, यह विशाल मंदिर, जिसमें से प्रत्येक इंच की जगह इतनी आश्चर्यजनक रूप से नक्काशीदार थी,रोचक बात यह है कि इतनी कम समय में यह पूरी हो ...

ओरछा का किला - ओरछा दर्शनीय स्थल - ओरछा के टॉप 10 पर्यटन स्थल

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शक्तिशाली बुंदेला राजपूत राजाओं की राजधानी ओरछा शहर के हर हिस्से में लगभग इतिहास का जादू फैला हुआ है। ओरछा दर्शनीय स्थल व स्मारक पर्यटकों को अपने समृद्ध अतीत में अंतर्दृष्टि देने के लिए ऐतिहासिक स्पर्श बनाए रखते हैं। ओरछा शहर जहां बसा हुआ है वह स्थान पहाड़ियों और सुन्दर हरियाली के साथ सुरम्य छटा बिखेरता है जो इसे ओरछा पर्यटन को सही बनाने के आसपास है। यदि आप प्रकृति या इतिहास या दोनों के प्रेमी हैं, तो आप मध्य प्रदेश की खूबसूरत प्राचीन भूमि ओरछा की यात्रा के लिए जरूर जाएं। जहां ओरछा के पर्यटन स्थल व ओरछा का खुशनुमा वातावरण आपकी राह में पलके बिछाए बैठा है। ओरछा जहां कई युद्ध लड़े गए थे। जिनकी गवाही ओरछा के ऐतिहासिक स्थल आज भी देते है। ओरछा के प्रमुख आकर्षक स्थल की संख्या काफी बडी है। किन्तु ओरछा पर्यटन पर आधारित अपने इस लेख में हम नीचे ओरछा के टॉप 10 पर्यटन स्थलो के बारे में अपने पाठको को वितार से बतायेगें। आइए सबसे पहले जान लेते है कि ओरछा कहाँ है। ओरछा भारत के राज्य मध्य प्रदेश राज्य के टिकमगढ़ जिले का एक प्रमुख नगर है। ओरछा के मंदिर और ओरछा का किला इस नगर के प्रमुख आकर्षण है। ओरछा दर्श...