महाराजा रत्नसिंह बीकानेर का परिचय और इतिहास
महाराजा सूरत सिंह जी के परलोकवासी होने पर उनके पुत्र महाराजा रत्नसिंह जी बीकानेर राजसिंहासन पर विराजमान हुए। आपके सिंहासन पर बेठने के साथ ही बीकानेर राज्य के सामन्त और समस्त प्रजा के मन का भाव भी सहसा बदल गया। महाराज सूरत सिंह जी की मृत्यु के पहले राज्य में जिस प्रकार अशान्ति, उत्पीड़न और अत्याचारों की वृद्धि हो रही थी, चोर डाकुओं के उपद्रव से जो राज्य में अराजकता फैली हुई थी, वह सब इस नवीन शासन के प्रारम्भ में शान्त हो गई। आपके सिंहासन पर बैठते ही जैसलमेर की प्रजा ने तथा राज-कमचारियों ने बीकानेर राज्य की प्रज्ञा के ऊपर घोर अत्याचार करना शुरू कर दिया। उन्होंने बीकानेर राज्य की सारी धन सम्पत्ति लूट ली। जब यह समाचार आपको मालूम हुए तो आपने जैसलमेर महाराज के पास युद्ध करने का प्रस्ताव भेजा। आपके युद्ध के प्रस्ताव को सुन कर जैसलमेर के महाराज कुछ भी भयभीत न हुए। आपने जयपुर और मेवाड़ आदि के राजाओं से सहायता मांगी। युद्ध की तैयारियाँ हो जाने पर आपने जैसलमेर पर आक्रमण कर दिया। अंग्रेजों के साथ संधि करते समय महाराज सूरतसिंह ने स्वीकार किया था कि बीकानेर के अधीश्वर किसी देशी राज्य पर आक्रम...