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डॉक्टर हरगोविंद खुराना की जीवनी - डॉक्टर हरगोविंद खुराना जीवन परिचय

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डॉक्टर हरगोविंद खुराना का जीवन परिचय— सन् 1930 में भौतिकी विज्ञान के क्षेत्र में पाने वाले पहले भारती वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन ने एक बार कहा था, कि भारत में मेरे जैसे न जाने कितने ही रमन भरे पड़े है। किंतु आवश्यक संसाधनों व उपयुक्त अवसरो के अभाव में व या तो अपनी प्रतिभा गंवा बैठते है, या विदेशों की ओर पलायन कर जाते है, जहां उन्हें उनके अनुकूल वातावरण मिल जाता है। रमन के इन शब्दों में कितनी सच्चाई थी, इसका जीता जागता उदाहरण है महान वैज्ञानिक डॉक्टर हरगोविंद खुराना। उनके बारेेंं इस लेख में हम जानेंगें– डॉक्टर हरगोविंद की जीवनी, डॉक्टर हरगोविंद खुराना जीवन परिचय, डॉक्टर हरगोविंद खुराना इनफार्मेशन इन हिन्दी, डॉक्टर हरगोविंद खुराना बायोग्राफी, डॉक्टर हरगोविन्द खुराना माहिती आदि।     भारत में जन्मे इस प्रतिभाशाली महान वैज्ञानिक को जब उसके अपने देश में ही आगे बढ़ने और कुछ कर दिखाने के अवसर और संसाधन  उपलब्ध न हो सके तो उन्होंने विदेश में रहकर ही अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा को निखारा। कभी रसायन विज्ञान के होनहार विद्यार्थी रहे डॉक्टर हरगोविंद खुराना ने आगे चलकर जीव रसायन विज...

सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर की जीवनी - सुब्रमण्यम चंद्रशेखर नोबेल पुरस्कार विजेता

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सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर एक महान खगोल वैज्ञानिक थे। सुब्रमण्यम चंद्रशेखर को खगोल विज्ञान के के क्षेत्र में किए गए उनके महान खोजो व कार्यों के लिए 1983 में विश्व का सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) प्रदान किया गया था। अपने इस लेख में हम भारत के इस महान वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर की जीवनी, सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर का जीवन परिचय, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर का जन्म, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर की मृत्यु, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर की खोज, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर की शिक्षा, सुब्रह्मण्यम चंदशेखर बायोग्राफी इन हिन्दी, सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के बारें में सभी महत्वपूर्ण जानकारी के बारें में विस्तार से जानेंगे, हमारा यह लेख सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर पर निबंध लिखने के लिए भी सहायक हो सकता है।       सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के बारें में (About Subrahmanyan Chandrasekhar)     विज्ञान के क्षेत्र में विश्व का सर्वाधिक प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार पाने वाले सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर तीसरे भारतीय वैज्ञानिक थे। उनसे पहले विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार चंद्रशेखर वेंकटरमन (भौतिकी विज्ञान) 193...

वेंकटरमन रामकृष्णन का जीवन परिचय - वेंकटरमन रामकृष्णन महिती इन हिन्दी

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एक बार फिर अरबों भारतवासियों के होठों पर आत्म स्वाभिमान की मुस्कराहट खिल उठी। एक बार फिर सारा देश अपनी माटी के एक सपूत की असाधारण ऊपब्धि पर झूम उठा एक बार फिर तिरंगा आसमान में गर्व और उत्साह से लहराकर सारी दुनिया के लोगों की नजरों का तारा बन गया। यह सुहावना अवसर था यह जानने का कि वर्ष 2009 के रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार भारतीय मूल के वैज्ञानिक वेंकटरमन रामकृष्णन को प्रदान किया जायेगा। यू तो भारत भूमि शुरु से ही महान एवं प्रतिभाशाली व्यक्तियों की जननी रही है। जहां अतीत में आचार्य कौटिल्य, आर्यभट्ट, वाराहमिहिर आदि ने भारत के ज्ञान विज्ञान की प्रतिभा को सम्पूर्ण संसार के सामने प्रमाणित किया। वहीं गुलामी के अंधेरे युग में भी गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर और सर चन्द्रशेखर वेंकटरमन ने नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर सम्पूर्ण संसार के सामने यह प्रमाणित कर दिया कि भारत की धरती से विषम परिस्थितियों में भी प्रतिभा का अंकुर फूट सकता है। आधुनिक काल में डॉक्टर हरगोविंद खुराना , सुब्रमण्यम चन्द्रशेखर, वी.एस नॉयपाल और  मदर टेरेसा ने भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त कर भारत के गर्व को चार चांद लगाए...

अमर्त्य सेन की बायोग्राफी - अमर्त्य सेन की जीवनी,नोबेल पुरस्कार, सिद्धांत

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क्या गरीब होना किस्मत की बात है? क्या  अकाल से होने वाली मौतों को किसी भी प्रकार रोका या कम किया जा सकता है? क्यो आज भी विश्व के अधिकांश देश  भूखमरी और  कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से ग्रस्त है, जबकि वे खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर होने या विश्व गुरू होने का दावा करते है? समान नागरिक संहिता वाले,  लोकतांत्रिक देशों में आज भी स्त्री पुरूषों के बीच असमानता की एक चौड़ी खाई क्यों है? क्यो उच्चतर शिक्षा में अग्रणी माने जाने वाले देश इस सच्चाई से अनभिज्ञ बने हुए है। कि उनके देश का बचपन प्रारंभिक शिक्षा से भी वंचित है? ऐसे ही अनेक ज्वलंत प्रश्नों को उठाने वाले अमर्त्य सेन के नाम पर एक बारगी यह विश्वास करना कठिन हो जाता है कि वे विश्व के महान और ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री है। इसका कारण यह है कि आज तक विश्व के किसी भी अर्थशास्त्री ने चाहे वह  नोबेल पुरस्कार विजेता ही क्यों न हो, अर्थशास्त्र को कभी उस दृष्टि से देखा ही नहीं था। जहां कि वह महज अर्थशास्त्र न रहकर मानव कल्याण का शास्त्र बन जाता हो। वास्तव में आज तक अर्थशास्त्र को अमेरिका और यूरोपीय अर्थशास्त्रियो...

उमेशचंद्र बैनर्जी का जीवन परिचय हिन्दी में

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कांग्रेस के सर्वप्रथम सभापतित्व का गौरव जिन्हें प्राप्त हुआ वह उमेशचन्द्र बनर्जी अपने समय के एक विशिष्ठ पुरुष थे। आपका व्यक्तित्व विलक्षण था। दिसम्बर 1844 में खिदिरपुर ( बंगाल ) में उमेशचंद्र बैनर्जी का जन्म हुआ और 26 जुलाई 1906 को  इंग्लैंड में देहावसान। स्वदेश विदेश का यह सम्मिश्रण न केवल आपके जन्म-मरण मे बल्कि सारे जीवन क्रम मे मिलता है।   उमेशचंद्र बैनर्जी का जीवन परिचय हिन्दी में   जिस कुटुम्ब मे उमेशचंद्र बैनर्जी का जन्म हुआ उसे वकीलो का घराना कहा जा सकता हैं। उमेशचंद्र बैनर्जी के न केवल पिता किन्तु पितामह बाबू पीताम्बर बैनर्जी भी एटर्नी थे। उमेश बाबू अपने पिता बाबू गिरीशचन्द्र बनर्जी के द्वितीय पृत्र थे। ओरियएंटल समिनरी ओर हिन्दू स्कूल में आपकी पढ़ाई हुई लेकिन 17 वर्ष की उम्र होते-होते जब मैट्रिक की परीक्षा निकट आई तो पिता ने स्कूल छुड़ा दिया। स्कूल छुड़ाकर आप डब्लू० पी० डाउनिंग नामक एटर्नी के यहां कलर्क रखे गये। वहां आप एक साल से अधिक नहीं रहे और डब्लू० एफ० गैलेणडर्स के यहां चले गये जहां दस्तावेज और दलील तैयार करने मे काफ़ी प्रवीणता प्राप्त की। उसके बाद 1864 में ...

बदरुद्दीन तैयबजी कौन थे और उनका जीवन परिचय

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बदरुद्दीन तैयबजी 8 अक्टूबर 1844 को एक सम्मानित अरबी घराने में जो बहुत समय से  बम्बई आ बसा था, पैदा हुए थे। बदरुद्दीन तैयब के पिता तैयबजी भाई मियां एक समृद्ध व्यापारी ओर सूरुचि वाले सुसंस्कृत व्यक्ति थे।   बदरुद्दीन तैयबजी का जीवन परिचय हिन्दी में   बचपन मे उर्दू फारसी की शिक्षा आपने दादा मखरा के मदरसे में प्राप्त की। फिर एलफिस्टन इंस्टीट्यूशन ( अब कालेज ) में भर्ती हुए, पर वहां ज्यादा नहीं रहे। आंख के इलाज के लिए पिता ने आपको फ्रांस भेज दिया, वहां से इंग्लैंड गये और लन्दन के न्यूबरी हाईपार्क कालेज में भर्ती हुए। वहां लन्दन यूनिवर्सिटी से मैट्रिक पास किया, पर तन्दुरुसती खराब होने के कारण उसके बाद शीघ्र ही हिन्दुस्तान लौट आये। एक साल यहां रहकर 1865 में फिर इंग्लैंड गये और अप्रैल 1867 में बेरिस्टरी पास की। नवम्बर 1867 में भारत लौटे और दिसम्बर में बम्बई हाईकोर्ट के एडवोकेट बन गये यही आपके भाई कमरूद्दीन तैयबजी एटर्नी थे, जिससे आपका बड़ी सुविधा रही। अपनी योग्यता से, खासकर जिरह में, आपने बहुत ख्याति प्राप्त की।   बदरुद्दीन तैयबजी   बेरिस्टरी शुरू करने के बाद पहले दस व...

जॉर्ज यूल का जीवन परिचय हिन्दी में

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जॉर्ज यूल पहले अंग्रेज थे, जिनको भारत की महान राष्ट्रीय संस्था के सभापति के सर्वोच्च सम्मान के आसन पर बिठाया गया था। उस समय सरकार की कांग्रेस के साथ सहानुभूति नहीं रही थी और सरकारी अधिकारी कांग्रेस को संदेह की दृष्टि से देखने लग गये थे। संयुक्त प्रान्त के लेफ्टिनेट-गवर्नर आकलैण्ड कॉलविन कांग्रेस से सहानुभूति रखने को आग से खेलने की उपमा दे चुके थे। ऐसे समय जॉर्ज यूल का अंग्रेज होकर सबसे पहले कांग्रेस का सभापतित्व स्वीकार करना असाधारण बात थी।   जॉर्ज यूल का जीवन परिचय हिन्दी में   जॉर्ज यूल कलकत्ते में व्यापार करने वाली एक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी फर्म के प्रमुख साझीदार थे। शुरू से ही भारतीय विषयों में आप बहुत रुची रखते थे। आप भारत और  इंग्लैंड दोनों देशों में सरकारी अधिकारियों के सामने भारतीय प्रश्नों को उपस्थित करते रहते थे। आपका कहना था कि भारतवर्ष का शासन उस योग्यता ओर उत्तमता से नहीं होता, जिससे होना चाहिए। आपने अंग्रेज़ जनता को यह समझाने का बहुत प्रयत्न किया कि भारतीयों और उनके हितो की उपेक्षा से काम नहीं चलेगा।   भारत के सम्बन्ध में लगातार प्रचार और सवाओं के उपलक्ष्य...

फिरोजशाह मेहता बायोग्राफी इन हिन्दी

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सर फिरोजशाह मेहता उन व्यक्तियों में से हैं जिनका हाथ कांग्रेस की स्थापना में था ओर जिनका कांग्रेस की नीति ओर कार्यक्रम के निर्माण में बहुत प्रमुख भाग रहा है। आप बहुत मेधावी, ऊंचे दर्जे के वक्ता और खूब कमाने व खुले हाथों खर्च करने वाले शाही आदमी थे।   फिरोजशाह मेहता का जीवन परिचय हिन्दी में   4 अगस्त 1845 को बम्बई के एक पारसी परिवार में फिरोजशाह मेहता जन्म हुआ था। आपके पिता एक बड़े भारी व्यापारी थे। बुद्धि आपकी बचपन से ही बड़ी कुशाग्र थी। 1861 में मैट्रिक किया, 1864 में बी० ए० हुए, और छः मास बाद ही एम० ए० भी हो गये। फिर बेरिस्टरी के लिए इंग्लैंड गये और तीन साल बाद बैरिस्टर होकर बम्बई लौटे। थोड़े ही दिनो में आपकी बेरिस्टरी चमक उठी। फौजदारी के मामलों में आप उच्च श्रेणी के बैरिस्टर गिने जाने लगे और आमदनी इतनी बढ़ गई, जितनी कि मुम्बई तो क्या, कहते हैं कि, हिन्दूस्तान भर में और किसी वकील बैरिस्टर की नहीं थी।   इंग्लैंड  में जब पढ़ते थे तब दादाभाई नौरोजी का आप पर प्रभाव पड़ा, जिससे राजनैतिक कार्यों में रुचि हुईं। वही उमेशचन्द्र बनर्जी और मनमोहन घोष से मित्रता हुई, जिनक...